शर्मसार कर देने वाला यह मुद्दा आया है सामने दिल्ली से, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर

शर्मसार कर देने वाला यह मुद्दा आया है सामने दिल्ली से, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर

समाज में दुष्कर्म की बढ़ती घटना चिंता का विषय है. हालही में हैदराबाद में विटरनरी की महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार ने सब को चौंका दिया था. ऐसा ही शर्मसार कर देने वाला मुद्दा दिल्ली से सामने आया है. जहां एक कलयुगी मामा अपनी भांजी का 4 वर्ष की आयु से दुष्कर्म कर रहा था. इतना ही नहीं इस दौरान पीड़ित का कई बार अबॉर्शन भी हुआ.

आखिरकार ये महिला 40 वर्ष से अधिक की आयु में अपने मामा को न्यायालय के कठघरे में खड़ा करने में सफल हो गई है.

महिला ने आरोप लगाया कि पहली बार 1981 में उसका यौन शोषण किया गया था जब वह महज चार वर्ष की थी. कक्षा दसवीं तक पहुंचने तक उसे तीन बार गर्भपात से गुजरना पड़ा. अलावा सत्र न्यायाधीश उमेद सिंह ग्रेवाल ने यह कहते हुए आरोपी के विरूद्ध आरोप तय किया कि प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता के तहत दुष्कर्म व आपराधिक धौंसपट्टी के कथित अपराधों का मुद्दा बनता है जो पीड़िता की सौतेली बहन का पति भी है.

महिला ने 2016 में आरोपी के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी थी. उसने न्यायालय से बोला कि इस आदमी ने पहली बार 1981 में उसके साथ दुष्कर्म किया व कक्षा दसवीं तक उसके साथ ऐसा होता रहा जब उसका आखिरी बार गर्भपात किया गया. उसने यह भी बोला कि अगस्त 2014 में उसका तलाक हो जाने के बाद से वह (आरोपी) उसे संबंध बनाने के लिए परेशान कर रहा है.

महिला ने बोला कि उसने इस आदमी (जो उसका मामा है) की हरकतों के बारे में अपनी मां व परिवार के अन्य सदस्यों को बताया लेकिन कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया, उल्टे सभी ने उसे ही शिकायत करने को लेकर डांट दिया व उससे बोला कि वह यह बात किसी व को न बताए. उसने बोला कि बाद में उसकी सौतेली बहन की विवाह उस आदमी के साथ हुई जिसके बाद दोनों उसके ही घर में रहने लगे व वह उसे अब बराबर परेशान करने लगा.

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बोला कि 2016 में उसे अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया गया व उससे बोला गया कि उसके (मां के) आखिरी दर्शन करने के लिए आरोपी की मांग मान ले. महिला की यह भी शिकायत है कि आरोपी के बेटों व अन्य संबंधियों ने उसे जान से मार डालने की धमकी दी. आरोपी के एडवोकेट ने न्यायालय में बोला कि वह आरोपी के विरूद्ध लगाये गये आरोपों पर राजी हो रहे हैं लेकिन इस मुद्दे में अन्य लोगों के विरूद्ध कोई आरोप नहीं बनता है क्योंकि आरोप सामान्य व अस्पष्ट हैं.