सीएम हाउस में उपवास पर बैठने की हरीश रावत ने दी चेतावनी

सीएम हाउस में उपवास पर बैठने की हरीश रावत ने दी चेतावनी


हरिद्वार उत्तराखंड में विपक्षी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत आनें वाले 6 अगस्त को सीएम पुष्कर सिंह धामी के आवास पर उपवास पर बैठने वाले हैं हो सकता है कि वह एक से ज़्यादा दिन भी अपना यह आंदोलन करें इस तरह की बात उन्होंने हरिद्वार में ज़िला पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लोकतंत्र की मर्डर की साज़िश बताते हुए कही उन्होंने आरोप लगाया कि योग्य और समर्थ उम्मीदवार पंचायत चुनाव न लड़ सकें, इस तरह के हथकंडे राज्य गवर्नमेंट अपना रही है रावत के साथ ही कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने भी धामी गवर्नमेंट की नीयत पर प्रश्न खड़े करते हुए गवर्नमेंट और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत का आरोप भी जड़ा

सीएम आवास के बाहर उपवास करने की घोषणा करते हुए हरीश रावत ने बोला कि बीजेपी गवर्नमेंट नहीं चाहती कि चुनाव में अच्छे नेता जीतें और जनता की सेवा करें इसलिए उत्तराखंड की बीजेपी गवर्नमेंट पंचायत चुनाव को टालकर लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रही है यही नहीं रावत ने यह भी बोला कि इस बारे में सीएम धामी से बात नहीं हो पा रही है इसलिए वह आनें वाले 6 अगस्त को सीएम के देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पर उपवास करेंगे इस बारे में मीडिया से बात करने के बाद रावत ने अपने सोशल मीडिया पर भी एक पोस्ट लिखा

मुख्यमंत्री हाउस पर उपवास करने संबंधी हरीश रावत का ट्वीट

माहरा ने लगाया सीटों के आरक्षण पर बड़ा आरोप

उत्तराखंड कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष करन माहरा ने भी आरोप लगाया कि हार के डर से बीजेपी गवर्नमेंट हरिद्वार में पंचायत चुनाव टाल रही है यदि ऐसा नहीं होता तो देहरादून में हुई कैबिनेट बैठक में इस बारे में निर्णय लिया जाना चाहिए था उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार, चुनाव आयोग और अधिकारी मिलीभगत से हरिद्वार में पंचायत चुनाव के परिसीमन और सीटों के आरक्षण में गड़बड़ी कर रहे हैं

माहरा ने कहा, एक पूर्व मंत्री ने सीट के आरक्षण संबंधी घोषणा से पहले ही दावा कर दिया कि वह किस सीट से पंचायत चुनाव लड़ेंगे यह दर्शाता है कि गवर्नमेंट किस तरह पहले से ही चुनाव के नतीजों को अपने पक्ष में करने की चाल चल रही है माहरा ने साफ आरोप लगाया कि जिन पंचायतों में जिस जाति की मौजूदगी ही नहीं है, वहां उस जाति के नाम पर आरक्षण करना बीजेपी के डर और चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत का साफ सबूत है