भविष्य में कोरोना संकट जैसी स्थिति होने पर विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में हुआ ये बड़ा बदलाव

भविष्य में कोरोना संकट जैसी स्थिति होने पर विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में हुआ ये बड़ा बदलाव

भविष्य में कोरोना संकट जैसी स्थिति में विद्यार्थियों के सतत मूल्यांकन के लिए उत्तर प्रदेश के में अब मिड टर्म परीक्षा, सेशनल परीक्षा, ट्यूटोरियल, असाइनमेंट्स और प्रोजेक्ट्स की व्यवस्था लागू की जाएगी।

प्रत्येक वर्ष वार्षिक परीक्षा के पूर्णांक के सापेक्ष 50 फीसदी अंक इन्हीं से निर्धारित किए जाएंगे। 

वार्षिक या सेमेस्टर परीक्षा आयोजित नहीं होने पर इन्हीं अंकों से परिणाम भी जारी किया जाएगा। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ऑनलाइन क्लासेज 4 अगस्त से शुरू हो जाएंगी, लेकिन कक्षाओं में पठन-पाठन स्थिति सामान्य रहने पर एक अक्तूबर से ही शुरू होगा। 
उच्च शिक्षा विभाग ने कोरोना संक्रमण के मद्देनजर नई व्यवस्थाएं लागू करते हुए शैक्षिक सत्र 2020-21 का शैक्षिक कैलेंडर जारी किया है। कोरोना संकट के कारण इस बार विश्वविश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों की परीक्षाएं पूरी तरह संपन्न नहीं हो सकी हैं। 
विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं और परिणाम को लेकर सरकार ने अब तक स्थिति स्पष्ट भी नहीं की है। लिहाजा 48 लाख से अधिक विद्यार्थी और उनके अभिभावकों के साथ शिक्षक भी असमंजस की स्थिति में हैं। 

भविष्य में ऐसी असामान्य स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में मिडटर्म परीक्षा, सेशनल परीक्षा, ट्यूटोरियल, असाइनमेंट्स और प्रोजेक्ट्स की व्यवस्था लागू करने का निर्णय किया है। हालांकि प्रदेश के कुछ विश्वविद्यालय में यह व्यवस्था अभी लागू है, लेकिन सरकार ने इसे अब सभी विश्वविद्यालयों में लागू किया है। 

इससे विद्यार्थियों के शैक्षिक स्थिति का सतत मूल्यांकन हो सकेगा। इसके लिए सभी पाठ्यक्रमों में सेशनल परीक्षा (मासिक या त्रैमासिक) के साथ मिड टर्म (अर्द्धवार्षिक) परीक्षा का प्रावधान किया जाएगा। 
विश्वविद्यालय के विषय से संबंधित विभाग और संबद्ध महाविद्यालय अपने स्तर से ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा आयोजित कराकर उनका मूल्यांकन कर विद्यार्थियों के प्राप्तांक विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराएंगे।

पूर्णांक के 50 प्रतिशत होंगे सेशनल या मिड टर्म परीक्षा के अंक
मिड टर्म परीक्षा, सेशनल परीक्षा, ट्यूटोरियल, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट के अंकों का विवरण सत्र शुरू होने से पहले पाठ्यक्रम समिति द्वारा निर्धारित किया जाएगा। सेमेस्टर या वार्षिक परीक्षा के पूर्णांक के सापेक्ष अधिकतम 50 प्रतिशत अंक इन्हीं से निर्धारित होंगे।  

मिड टर्म परीक्षा, सेशनल परीक्षा, ट्यूटोरियल, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट के संबंधित प्रश्न पत्र में विद्यार्थी को प्राप्त कुल अंक का 25 से 50 प्रतिशत तक उस प्रश्न पत्र की वार्षिक या सेमेस्टर परीक्षा के अंक में जोड़कर परीक्षा परिणाम जारी किया जाएगा। किसी कारण से वार्षिक या सेमेस्टर परीक्षा नहीं होने पर इन्हीं अंकों के आधार पर परिणाम जारी किया जा सकता है।

4 अगस्त से ऑनलाइन क्लासेज शुरू होगीं
शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार स्नातक और स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष को छोड़कर स्नातक और स्नातकोत्तर की शेष कक्षाओं में 4 अगस्त से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित होंगी। स्थितियां सामान्य होने पर एक अक्तूबर से विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में कक्षाएं संचालित कर पठन-पाठन किया जाएगा। 

स्नातक में नया प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षण कार्य स्थिति सामान्य होने पर एक अक्तूबर से शुरू होगा। 15 जून 2021 तक वार्षिक परीक्षा के परिणाम घोषित किए जाएंगे।