यूपी का स्कूल जहां लड़कियां लेती हैं शपथ, विवाह करेंगे लेकिन...

यूपी का स्कूल जहां लड़कियां लेती हैं शपथ, विवाह करेंगे लेकिन...

कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते लागू लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान यूपी स्थित बुलंद शहर में एक पिता अपनी 13 वर्ष की बेटी का बाल शादी करने की योजना बना रहा था लेकिन एक फोन कॉल ने उसे पास होने से रोक दिया। एक बच्ची की जिंदगी बर्बाद होते-होते बच गई। मुद्दा 13 वर्षीय प्रीति से जुड़ा है। उनके पिता ने सोचा कि इस लॉकडाउन में वह प्रीति की विवाह कर देंगे व किसी को समाचार नहीं होगी। उनको लगा कि यह सबसे ठीक टाइम है। पांच लोगों के परिवार में अकेले कमाने वाले प्रीति के पिता ने सोचा कि वह बिना लोगों की नजर में आए यह कार्य सरलता से कर लेंगे। इतना ही नहीं। दूल्हे का परिवार प्रीति के घर तारीख पक्की करने भी आ गया था।

प्रीति ने बताया कि दूल्हे का परिवार विवाह की तारीख तय करने आ गया था लेकिन बच्ची ने अपने टीचर को इस बारे में जानकारी देकर खुद को इस चक्कर से बचाया। लॉकडाउन के चलते वह अपने भाई के फोन से औनलाइन क्लास करती थी लेकिन वह भी किसी दिन हो पाता तो किसी दिन नहीं। जिस दिन उसकी विवाह की तारीख पक्की हुई उसके अगले ही दिन उसने फोन लिया व अपने स्कूल टीचर को फोन किया। प्रीति ने टीचर को बताया, 'वो लोग मेरी विवाह करा रहे हैं। मैं विवाह नहीं करना चाहती। '

टीचर ने घर वालों को मनाया
प्रीति की टीचर मधु शर्मा ने उसके परिजनों से बात की व उन्हें विवाह ना करने के लिए मनाया। प्रीति अब फिर से औनलाइन क्लास कर रही है व वैसे उसके घर में विवाह की बात बंद है।  प्रीति, बुलंदशहर स्थित परदादा परदादी एजुकेशनल सोसाइटी इंटर कॉलेज में पढ़ने जाती हैं। यह स्कूल बुलंदशहर जिले में है जहां राष्ट्रीय औसत 940  की तुलना में 896 का चाइल्ड संभोग रेशियो है। इसके साथ ही यह जिला लड़कियों के बेकार स्वास्थ्य व कम साक्षरता दर के लिए भी बदनाम है।
प्रीति ने 5 वर्ष की आयु में स्कूल जॉइन किया था। अंग्रेजी व मैथ्स के अतिरिक्त प्रीति को यहां यह भी सिखाया जाता है कि उसे अपने अधिकारों के लिए लड़ने की आवश्यकता है ना कि उसे अपनी भाग्य मान कर पराजय मान लेने की। इस स्कूल में लड़कियों को घर पर असहज प्रश्न पूछना सिखाया जाता है जैसे 'मुझे अपने भाई की तुलना में कम भोजन क्यों दिया जाता है?' या 'मुझे पढ़ाई क्यों बंद करनी चाहिए?'

हम विवाह करेंगे लेकिन
बुलंदशहर का अनूप शहर कस्बे का वातावरण स्त्रियों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। गरीबी व क्राइम के कारण यहां स्त्रियों को भेदभाव, दुर्व्यवहार व हिंसा का सामना करना पड़ता है। व्यापक स्तर पर महिलाएं निरक्षर हैं। इतना ही नहीं कक्षा 8वीं के बाद यहां बच्चियों की पढ़ाई इतिश्री मान ली जाती है।

ये स्कूल अनोखा है। प्रातः काल अपना असेंबली में लड़कियां प्लेज लेती हैं कि 'हम विवाह करेंगे, लेकिन दसवीं कक्षा पूरी करने के बाद। ' यूपी के ग्रामीण इलाकों में, कम से कम 54% लड़कियों की विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले ही हो जाती है।