बिसाऊ में स्थित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा से जुडी है ये दो रोचक तथ्य, जाने

बिसाऊ में स्थित  भगवान शिव की विशाल प्रतिमा से जुडी है ये दो रोचक तथ्य, जाने

महाशिवरात्रि के मौके पर झुंझुनूं में भी अल प्रातः काल से मची हुई है। जिला मुख्यालय की बात करें तो लावरेश्वर महादेव मंदिर तथा बावलियों की बगीची समेत सभी शिवालयों में प्रातः काल चार बजे से ही भक्तों का आना प्रारम्भ हो गया था।

इसके अतिरिक्त चिड़ावा, नवलगढ़, खेतड़ी, पिलानी, सूरजगढ़ समेत अन्य क्षेत्रों में भी न केवल कस्बों में, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी भक्त भोले को रिझाने में लगे हुए हैं। महाशिवरात्रि के मौके पर भोले के दर्शन पूजन के अतिरिक्त व्रत भी रखे गए हैं।

वहीं, झुंझुनूं जिला मुख्यालय से जैसे आप चूरू की ओर बढ़ते हैं, बिसाऊ के पास ही आपको दूर से भगवान शिव की विशाल प्रतिमा दिखाई देने लगती है। कहते हैं कि आज से करीब दस वर्ष पहले बिसाऊ में इस प्रतिमा की स्थापना हुई थी। सिर पर अर्धचंद्र, जटा, गंगा व मंद मंद मुस्कुराते शिव की यह प्रतिमा खड़े हुए स्वरूप में है, जो भक्तों की आस्था का केन्द्र बन गई है। इसके साथ ही दो रोचक तथ्य भी जुड़े हैं, जो शेखावाटी के लिए गर्व की बात है।

पहला तथ्य यह कि अब तक यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिव प्रतिमा है जबकि इंटरनेट व अन्य कई सोर्सेज पर कनार्टक की मुरूदेश्वरा में स्थापित शिव प्रतिमा को दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा बताया गया है, जो 123 फुट की है। दूसरा यह है कि शिव प्रतिमा का यह स्वरूप सबसे पहले शेखावाटी के कलाकारों ने ही तैयार किया।  

सबसे पहले इस तरह की प्रतिमा बिरला परिवार ने दिल्ली के महिपालपुर स्थित मंगल महादेव बिरला कानन मंदिर में स्थापित करवाई। इसके बाद इस तरह की प्रतिमा नेपाल के कैलाशनाथ महादेव मंदिर, मॉरीशस के मंगल महादेव में बनी।