इस बिल के सपोर्ट में रिपब्लिकन व डेमोक्रेटिक पार्टी के 310 से ज्यादा सांसद है...

इस बिल के सपोर्ट में रिपब्लिकन व डेमोक्रेटिक पार्टी के 310 से ज्यादा सांसद है...

अमेरिकी संसद हाउस ऑफ रिप्रेंजेटिव में मंगलवार को ग्रीन कार्ड से जुड़े बिल पर वोटिंग होगी। इस बिल के सपोर्ट में रिपब्लिकन व डेमोक्रेटिक पार्टी के 310 से ज्यादा सांसद है।आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि देश के हिसाब से ग्रीन कार्ड की संख्या सीमित होने के चलते हिंदुस्तान व चाइना के नागरिकों को औसतन कम नागरिकता मिल पाती है जबकि अन्य राष्ट्रों के नागरिकों को सरलता से अमेरिका की स्थायी नागरिकता मिल जाती है। इस विषय में अमेरिकी संसद में पेश किए गए बिल के पास हो जाने के बाद ग्रीन कार्ड की संख्या पर लगी लिमिट समाप्त हो जाएगी।



एक्सपर्ट्स का बोलना है कि अगर यह कानून बन जाता है तो हिंदुस्तानियों को ग्रीन कार्ड के साथ-साथ H-1B वीजा भी ज्यादा संख्या मिलेगा। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2018 तक ही अमेरिका के टेक्नॉलजी क्षेत्र में 3 लाख भारतीय ऐसे हैं, जो ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।

मिल सकती हैं बड़ी राहत-अमेरिका की दोनों पार्टियों (रिपब्लिकन व डेमोक्रैटिक) के ज्यादातर सांसद इस बिल के पक्ष में हैं, ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इसके कानून बनने में कोई समस्या नहीं होने वाली है। आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि अमेरिकी संसद में हर साल सभी देश को 7 फीसदी ग्रीन कार्ड जारी करने की सीमा समाप्त करने वाला बिल पर वोटिंग होगी। ग्रीन कार्ड लोगों को अमेरिका में स्थायी रूप से बसने व कार्य करने की अनुमति देता है। अगर इस बिल को संसद की मंजूरी मिलती है, तो इसका लाभ हजारों भारतीय पेशेवरों को होगा, जो कानूनी रूप से अमेरिका में बसने की लंबे समय से आस लगाए बैठे हैं।

क्या कहता है कानून-इस बिल के पास हो जाने से अमेरिका में जॉब के आधार पर मिलने वाली स्थायी नागरिकता दिए जाने संबंधी लिमिट खत्म हो जाएगी।

>> अभी यह लिमिट सात प्रतिशत है। अभी के नियमों के हिसाब, एक वर्ष में 1,40,000 से ज्यादा ग्रीन कार्ड नहीं जारी किए जा सकते हैं।

>> इसके अतिरिक्त किसी भी एक देश से 9,800 नागरिकों को एक वर्ष में स्थायी नागरिकता नहीं दी सकती है।

>> इस कानून के लागू होने के बाद अमेरिका में नागरिकता मिलने का इंतजार कर रहे भारतीय व चीनी नागरिकों के पेंडिंग पड़े ऐप्लिकेशन क्लियर हो सकते हैं। अभी एक वर्ष में हिंदुस्तान के मात्र 9,800 नागरिकों को ही अमेरिका की स्थायी नागरिकता मिल पाती है जबकि हर वर्ष ऐसे हाई स्किल्ड लोगों की संख्या बेहद होती है,जो कार्य की तलाश में अमेरिका जाते हैं।

>> इस बिल से अन्य राष्ट्रों के अप्रवासियों में हलचल मच गई है क्योंकि उन्हें लगता है कि इस बिल को हिंदुस्तान के पक्ष में तैयार किया गया है।

>> आपको बता दें कि हर वर्ष सबसे ज्यादा भारतीय H-1B व L वीजा पर अमेरिका जाते हैं। 2018 में इस बिल के विरूद्ध लॉबिंग करने वाले राष्ट्रीय ईरानी-अमेरिकी परिषद (एनआईएसी) ने गुरुवार को कहा, 'हम अभी भी इसके प्रभावों के बारे में चिंतित हैं। '