जानिए, 19 वर्ष से आतंकवादियों के लिए स्वर्ग कैसे बना पुलवामा 

जानिए, 19 वर्ष से आतंकवादियों के लिए स्वर्ग कैसे बना पुलवामा 

क्या कश्मीर का पुलवामा अब आतंकवादियों का गढ़ बन चुका है? ये सवाल इसलिए, क्योंकि यहां हर रोज़ कोई न कोई आतंकवादी वारदात हो रही है। हाल के दिनों में यहां जितने भी मुठभेड़ व हमले हुए हैं, उनमें मारे गए ज्यादातर आतंकवादी युवा हैं।

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ऐसे में साफ है कि पुलवामा में एक्टिव आतंकी संगठन आतंक फैलाने के लिए लोकल युवाओं का ही प्रयोग कर रहे हैं। 14 फरवरी को हुआ पुलवामा हमला इसका उदाहरण है।

वर्ष 2000 के बाद हुए हमलों पर एक नज़र डालें, तो ये पता चल जाता है कि पिछले 19 वर्ष से कैसे पुलवामा आतंकवादियों के लिए स्वर्ग का बन गया है। 14 फरवरी को जब पुलिस कंट्रोल रूम को हमले की पहली सूचना मिली, तो इसे पैरामिलिट्री फोर्सेज पर आए दिन होने वाला छोटा अटैक समझा गया। लेकिन, जब स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की पैट्रोलिंग पार्टी हमले वाली स्थान पर पहुंची, तो वहां का हाल देखकर दंग हो गई। पुलवामा हमले को अब तक का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला माना जाता है।

धमाके से जलती बस से गुजरते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की पैट्रोलिंग पार्टी जब आगे बढ़ने लगी, तो उसे जमीन पर बिखरे पड़े सीआरपीएफ जवानों के मानव अंगों से होकर जाना पड़ा। इस समझा जा सकता है कि ये हमला कितना भयानक हुआ था।

14 फरवरी को रि-इंफोर्समेंट पार्टी के मेम्बर रहे पुलिस ऑफिसर ने बताया, 'मुझे ऐसा लगा था कि ये कोई विस्फोटक है, जिसका प्रयोग एक मुठभेड़ के दौरान सीआरपीएफ की बस को निशाना बनाने के लिए किया गया, लेकिन ये कुछ व था। ' वह आगे बताते हैं, 'मैंने कई उग्रवादी हमले देखे हैं, लेकिन यह एक ऐसी वस्तु थी जिसे मैं लंबे समय तक समझ नहीं पाया था।'


14 फरवरी को क्या हुआ था?

14 फरवरी की दोपहर सीआरपीएफ का 78 गाड़ियों का काफिला श्रीनगर जा रहा था। इसमें लगभग 2,500 जवान सवार थे। ज्यादातर जवान छुट्‌टी काटकर ड्यूटी पर लौटे थे, लेकिन जब काफिला जम्मू और कश्मीर हाईवे पर अवंतीपोरा के गोरीपोरा इलाके में पहुंचा, तो लगभग 3.15 बजे 100 किलो विस्फोटक से भरी कार काफिले में शामिल एक बस से जा टकराई। इससे ज़ोरदार धमाका हुआ। इस धमाके से बस पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। लिहाज़ा इस बस में सवार सभी 40 जवान शहीद हो गए। पुलवामा हमले को कश्मीर घाटी में हुआ अब तक का सबसे बड़ा आत्मघाती हमला माना जाता है।

इस हमले के बाद पुलवामा चर्चा में आ गया। इस हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से युद्ध जैसे दशा हो गए। बेशक पुलवामा में 14 फरवरी को हुआ हमला अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जाता है, लेकिन ये क्षेत्र वर्ष 2000 से ही आतंकवादियों का गढ़ बना हुआ है। यहां आतंकवादियों से निपटना सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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पुलिस व आर्मी के सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा समय में साउथ कश्मीर के चार जिलों में कीरब 130 आतंकवादी एक्टिव हैं। इनमें से 44 आतंकवादी सिर्फ पुलवामा में हैं।