बार-बार जगह या शहर बदलने से बदल जाती है बच्चों की...

बार-बार जगह या शहर बदलने से बदल जाती है बच्चों की...

जवाब : किसी अभिभावक के लिए बच्चों को कठिन में देखना बहुत ज्यादा पीड़ादायक होता है. बार-बार स्थान या शहर बदले से वयस्कों की तरह बच्चों को भी कठिनाई होती है. कुछ बच्चे तो ज्यादा ही संवेदनशील होते हैं, उन्हें संभालना कठिन होता है. जोखिम, विफलता, आगे बढऩा, सफल होना ज़िंदगी में खुशी का भाग है. इन सबका ज़िंदगी में बहुत ज्यादा महत्व है. वैसे आपकी बच्ची की आयु महज 9 साल है. वह बिलकुल ही परिपक्व नहीं है. इस आयु में बच्चे अधिकांश समय स्कूल में होते हैं व बाकी के समय दोस्तों के साथ रहना चाहते हैं. वे अपने दोस्तों से इतने घुलमिल जाते हैं कि उन्हें छोडऩा बहुत ज्यादा खलता है. वे इस आयु में बहुत ही संवेदनशील हो जाते हैं. ऐसे में जगह या शहर बदलने पर वे टूटने लगते हैं.


इन उपायों से बच्चों को संभालें
सबसे पहले बच्चे के स्कूल जाएं व उसके टीचर से उसके बारे में विस्तार से बताएं जैसे उसका लक्ष्य क्या है, पसंदीदा जानवर या मिठाई कौनसी है. यह बातें थोड़े अजीब हैं लेकिन यह टीचर व स्टूडेंट्स के बीच माध्यम हो सकती हैं. बच्चे को नए स्कूल जाने पर आत्मविश्वास बढ़ेगा. टीचर का फ्रेंडली व्यवहार भी इसमें मदद करता है.
दूसरा, शहर छोडऩे से अपने बच्चे के लिए अगल से एक छोटी यात्रा प्लान करें. यह बच्चे को आकस्मित से नए शहर जाने वाले सदमे से बचाव करेगा. इसके साथ ही पड़ोसियों, पसंदीदा स्थानों व उसके दोस्तों की फोटो एलबम बनाएं. फोटो के डिजिटल चैटबुक भी बनवा सकते हैं.
तीसरा, जहां जाते हैं तो पहुंचने के बाद पड़ोस के लोगों को अपने घर बुलाएं व उसके लिए स्नैक्स आदि की व्यवस्था करें तो वे आपके साथ कुछ समय रहें. इससे उस समुदाय में भी बच्चे की सहभागिता बढ़े व खुद को अच्छा महसूस कर सके.