नियुक्त प्रशासकों की समिति ने बीसीसीआई की वार्षिक आमसभा की मीटिंग में लगाई रोक

नियुक्त प्रशासकों की समिति ने बीसीसीआई की वार्षिक आमसभा की मीटिंग में लगाई रोक

तमिलनाडु (Tamilnadu), हरियाणा (Haryana) व महाराष्ट्र (Maharashtra) क्रिकेट संघों (Cricket Associations) को अपने-अपने संविधान में संशोधन न करने के चलते उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (Committee Of Administrator) ने बीसीसीआई (BCCI) की वार्षिक आमसभा की मीटिंग में भाग लेने पर रोक लगा दी है। बीसीसीआई की एजीएम मुंबई में 23 अक्टूबर को होनी है। सीओए के इस कदम का ये भी मतलब हुआ कि अगर एजीएम (AGM) में चुनाव होता है तो इन तीनों प्रदेश संघों को वोट करने का अधिकार भी नहीं होगा। प्रशासकों की समिति के अध्यक्ष विनोद राय वैसे अमेरिका में हैं, इसलिए इस बारे में उनसे बात नहीं हो सकी है।



इस बारे में नाम जाहिर न करने की शर्त पर सूत्र ने बताया कि सीओए (COA) ने तमिलनाडु व हरियाणा क्रिकेट संघों को जानकारी दे दी है कि उच्चतम न्यायालय के 9 अगस्त 2018 के आदेश के तहत अपने संविधान में संशोधन न करने के चलते उन्हें एजीएम में भाग नहीं लेने दिया जाएगा। महाराष्ट्र के भी एजीएम में भाग लेने पर भी रोक लगाई जाएगी। तमिलनाडु क्रिकेट संघ (Tamilnadu Cricket Association) के पूर्व अध्यक्ष व बीसीसीआई (BCCI) के पूर्व प्रेसीडेंट एन। श्रीनिवासन (N Sriniwasan) हैं। तमिलनाडु की ओर से एजीएम में सचिव एसएस रामास्वामी को भाग लेना था। वहीं अनिरुद्ध चौधरी की अध्यक्षता वाले हरियाण क्रिकेट संघ की ओर से मृणाल ओझा को एजीएम में शामिल होना था, जबकि महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के अध्यक्ष अजय शिर्के के प्रतिनिधि के तौर पर रियाज बागबान को इसमें भाग लेना था।

तमिलनाडु क्रिकेट संघ (Tamilnadu Cricket Association) के संशोधित संविधान में 21 बिंदु ऐसे हैं जो उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं। इनमें कूलिंग ऑफ पीरियड का समय व ऐज कैप जैसे अहम बिंदु भी शामिल हैं। हाल ही में एन। श्रीनिवासन की बेटी रूपा गुरुनाथ को तमिलनाडु क्रिकेट संघ का अध्यक्ष चुना गया था। इन तीनों राज्यों के एजीएम में शामिल होने पर रोक लगाने को लेकर सीओए का पक्ष ये है कि चूंकि उनकी देखरेख में ही चुनाव होने हैं तो किसी भी ऐसे प्रदेश क्रिकेट संघ को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिसने अपने संविधान में संशोधन न किया हो।

हालांकि अगर बीसीसीआई चुनाव (BCCI Election) में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव व कोषाध्यक्ष के पद के लिए सर्वसम्मति से उम्मीदवार का चयन होता है तो फिर इन तीनों प्रदेश क्रिकेट संघों पर रोक लगाने का बहुत अधिक मतलब नहीं रह जाएगा। इस बारे में बीसीसीआई के पूर्व पदाधिकारी ने कहा, 'अगर तमिलनाडु, हरियाणा व महाराष्ट्र क्रिकेट संघ न्यायालय का रुख करते हैं तब क्या होगा?'