ईरान में स्त्रियों पर बिना हिजाब के फुटबॉल स्टेडियम में जाने पर प्रतिबंध

ईरान में स्त्रियों पर बिना हिजाब के फुटबॉल स्टेडियम में जाने पर प्रतिबंध

ईरान में स्त्रियों पर बिना हिजाब के फुटबॉल स्टेडियम में जाने पर प्रतिबंध है। इसके विरूद्ध लगातार आवाज भी उठती रही है। लेकिन शायद ही किसी ने सोचा होगा कि कोई महिला इस प्रतिबंध का विरोध करते हुए जान दे देगी। 29 वर्ष की सहर खोदयारी (Sahar Khodayari) ने ऐसा ही किया, जिसके बाद से दुनियाभर में ईरानी कानून की निंदा हो रही है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक 29 वर्ष की सहर खोदयारी फुटबॉल की फैन थीं। उन्होंने अपने देश के कानून का विरोध करते हुए स्टेडियम में बिना हिजाब के प्रवेश किया था। इसके बाद उन पर मुकदमा चलाया गया। इस मुद्दे की पिछले हफ्ते न्यायालय में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद सहर ने न्यायालय के बाहर ही खुद पर गैसोलिन डालकर खुद को आग लगा ली। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

इतालवी फुटबॉल क्लब रोमा ने सहर खोदयारी को श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया, ‘रोमा की जर्सी लाल-पीली रंग की है। लेकिन सहर खोदयारी की बार के बाद आज हमारे दिल में सिर्फ नीला रंग बस गया है। फुटबॉल संसार को एक करता है, ना कि हमें बांटता है। अब वक्त आ गया है कि ईरान पुरुषों की भांति स्त्रियों को भी खेलने व खेल देखने का अधिकार दे। ’

पुरुषों के भेष में स्टेडियम पहुंची थी सहर
बता दें कि सहर खोदयारी ने इसी वर्ष मार्च में बिना हिजाब के स्टेडियम जाने से संबंधित बैन का विरोध किया था। वे इसका विरोध करते हुए फुटबॉल मैच के दौरान पुरुषों के भेष में स्टेडियम गई थीं। बाद में वे पहचान ली गईं व उन पर मुकदमा चलाया गया।

सहर का क्राइम सिर्फ इतना है
एमनेस्टी इंटरनेशनल (मिडिल ईस्ट) के डायरेक्टर फिलिप लूथर ने कहा, ‘सहर के साथ जो हुआ, वह हृदयविदारक है। उनका क्राइम सिर्फ इतना था कि वे उस देश की महिला थीं, जहां महिलाएं कई तरह के प्रतिबंधों का सामना कर रही हैं। ’ ईरान में 1979 में इस्लामिक रिवॉल्यूशन होने के बाद ही स्त्रियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए थे।