ट्रिब्यूनल में नियुक्ति से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सरकार के रुख पर जताई नाराजगी

ट्रिब्यूनल में नियुक्ति से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सरकार के रुख पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को पीठासीन अधिकारियों के साथ-साथ न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की भारी कमी का सामना कर रहे ट्रिब्यूनल्स में नियुक्तियां करने के लिए दो और सप्ताह का समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने ट्रिब्यूनल रिफाम्स ऐक्ट 2021 की संवैधानिक वैधता और ट्रिब्यूनल में रिक्तियों से संबंधित मामले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के रुख से नाराजगी जताई है।


अटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ को आश्वासन दिया कि केंद्र दो सप्ताह में ट्रिब्यूनल में खोज और चयन समिति द्वारा अनुशंसित व्यक्तियों की सूची से नियुक्तियां करेगा। बता दें कि देश भर में विभिन्न प्रमुख ट्रिब्यूनल्स और अपीलीय ट्रिब्यूनल्स में लगभग 250 पद खाली पड़े हैं। इनमें एनसीएलटी, डीआरटी, टीडीसेट आदि शामिल हैं। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफार्म एक्ट को चुनौती देने वाले कांग्रेस नेता जयराम रमेश की याचिका पर सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।


पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर भी विचार कर सकती है। इस दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि हम सरकार से किसी तरह का टकराव नहीं चाहते। हम खुश हैं जिस तरह सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति की है पूरी कानूनी बिरादरी इसकी सराहना करती है लेकिन इन ट्रिब्यूनल्स का क्या।


अदालतों में सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, केंद्र व राज्यों को कदम उठाने का दिया जाए निर्देश

अदालतों में सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, केंद्र व राज्यों को कदम उठाने का दिया जाए निर्देश

दिल्ली की एक जिला अदालत के भीतर शुक्रवार को गोलीबारी की घटना के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर केंद्र और राज्यों को अधीनस्थ अदालतों में सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि गैंगस्टर और कुख्यात अपराधियों को प्रत्यक्ष रूप से पेश करने के बजाय निचली अदालत के समक्ष जेलों से वीडियो कांफ्रेंस के जरिये पेश किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में वकील विशाल तिवारी ने यह याचिका दायर की है। एक अन्य वकील दीपा जोसेफ ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने अधिकारियों को राष्ट्रीय राजधानी में जिला अदालतों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने का निर्देश देने का आग्रह किया। दिल्ली की रोहिणी अदालत में गैंगस्टर जितेंद्र मान उर्फ गोगी की दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावर वकील के वेश में आए थे। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों हमलावर भी मारे गए।


आवेदन एक लंबित याचिका में शीर्ष अदालत में दायर किया गया

शीर्ष अदालत के एक अधिकारी ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने शुक्रवार को यहां भीड़भाड़ वाले अदालत कक्ष के अंदर गोलीबारी पर गहरी चिंता व्यक्त की और इस सिलसिले में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल से बात की थी। तिवारी का आवेदन एक लंबित याचिका में शीर्ष अदालत में दायर किया गया है।

न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया

इस याचिका में झारखंड में 28 जुलाई को धनबाद के जिला और सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की वाहन से कुचलकर हत्या के मामले का हवाला देते हुए न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया। दिल्ली में हुई गोलीबारी का जिक्र करते हुए अर्जी में कहा गया है कि ऐसी घटनाएं न केवल न्यायिक अधिकारियों, वकीलों और अदालत परिसर में मौजूद अन्य लोगों के लिए बल्कि न्याय प्रणाली के लिए भी खतरा हैं।