Corona की दूसरी लहर डॉक्टरों पर भी बरपा रही कहर, एक दिन में गई 50 की जान

Corona की दूसरी लहर डॉक्टरों पर भी बरपा रही कहर, एक दिन में गई 50 की जान

कोविड-19 वायरस की दूसरी लहर ( Covid-19 2nd Wave) में मरने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और प्रतिदिन करीब 4 हजार लोगों की मृत्यु हो रही है अब Covid-19 (Covid-19) का कहर आम लोगों के साथ-साथ डॉक्टरों (Doctor) पर भी कहर बनकर बरस रहा है और एक दिन में देशभर में 50 डॉक्टरों की जान गई है

द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के अनुसार,  भारतीय मेडिकल एसोसिएशन ( Indian Medical Association) ने बताया कि Covid-19 की दूसरी लहर में अब तक 244 डॉक्टरों की मृत्यु संक्रमण के बाद हो चुकी है, जिसमें से 50 मौतें रविवार (17 मई) को दर्ज की गई थीं जबकि पिछले वर्ष कोविड-19 वायरस की वजह से 736 डॉक्टरों ने अपनी जान गंवाई थी

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के मुताबिक, कोविड-19 वायरस की दूसरी लहर के दौरान सबसे अधिक डॉक्टरों की मौतें बिहार (69) में हुई हैं इसके बाद यूपी (34) और दिल्ली (27) हैं इनमें से केवल 3 प्रतिशत डॉक्टरों को ही पूरी तरह से टीका लगाया गया था

26 वर्ष के डॉक्टर अनस मुजाहिद की कोविड-19 वायरस से पॉजिटिव पाए जाने के कुछ ही घंटे में मृत्यु हो गई, जो दिल्ली के डेडिकेटेड कोविड स्पेशियलिटी सेंटर गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल (Guru Teg Bahadur Hospital) में रेजीडेंट डॉक्टर थे वह इस महामारी से अपनी जान गंवाने वाले सबसे कम आयु के डॉक्टर हैं मुजाहिद को गले में खराश जैसे कोविड-19 के हल्की लक्षण थे और एंटीजन टेस्ट में उन्हें पॉजिटिव पाया गया था


भारत बायोटेक की आज डब्ल्यूएचओ के साथ बैठक

भारत बायोटेक की आज डब्ल्यूएचओ के साथ बैठक

भारत के स्वदेशी कोरोनारोधी टीके कोवैक्सीन (Covaxin) को मान्यता दिए जाने के मुद्दे पर आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ भारत बायोटेक की बैठक होगी। इस बैठक में स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सिन के आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) के लिए मूल्यांकन किया जाएगा। डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिल जाने पर इस टीके को लगवाने वाले लोगों को विदेश जाने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही इस टीके के निर्यात का भी रास्ता खुलेगा।

कोवैक्सीन को भारत बायोटेक ने आइसीएमआर के साथ मिलकर विकसित किया है। यह भारत में बनी पहली स्वदेशी वैक्सीन है। भारत में अभी कोरोना के खिलाफ तीन वैक्सीनों का इस्तेमाल हो रहा है। भारत बायोटेक की कोवैक्सीन भी इनमें से एक है। दूसरी वैक्सीन कोविशील्ड लगाई जा रही है। इसको आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और एस्ट्राजेनेका ने बनाया है, जिसका उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया कर रहा है। इसके अलावा रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन भी लगाई जा रही है।

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन तीसरे चरण में 77.8 फीसद प्रभावी पाई गई है। कंपनी ने पिछले हफ्ते ही ट्रायल का डेटा ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया को सौंपा था। मंगलवार को सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने वैक्सीन के फेज तीन के ट्रायल के डेटा को मंजूरी दे दी। भारत बायोटेक की तरफ से केंद्र सरकार की कमेटी को यह रिपोर्ट सौंपी गई है। एसइसी की मंजूरी के बाद इस डेटा को अब डब्ल्यूएचओ को भी भेजा जा सकेगा।

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का डेटा अभी तक पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त, पीयर-रिव्यू जर्नल में प्रकाशित नहीं हुआ है। भारत बायोटेक ने इस महीने की शुरआत में कहा था कि दवा नियामक को प्रस्तुत करने के बाद और लगभग तीन महीने की समय सीमा के भीतर इस डेटा का प्रकाशन होगा।