ओमिक्रोन वैरिएंट ने बढ़ाई चिंता, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए आज से कड़े नियम लागू; जानें

ओमिक्रोन वैरिएंट ने बढ़ाई चिंता, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए आज से कड़े नियम लागू; जानें

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, खासकर अत्यधिक जोखिम वाले देशों से आने वालों के लिए मंगलवार मध्य रात्रि से कड़े नियम लागू होंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को राज्यों को ढिलाई नहीं करने और विभिन्न हवाई अड्डों, बंदरगाहों तथा भू-सीमा से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कड़ी निगरानी करने की सलाह दी। नए नियमों के तहत जोखिम ग्रस्त देशों से आने वाले यात्रियों के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट अनिवार्य हैं और जांच के नतीजे आने पर ही उन्हें हवाई अड्डे से बाहर जाने की अनुमति मिलेगी।

साथ ही, अन्य देशों से उड़ानों से आने वाले यात्रियों में से पांच प्रतिशत की कोरोना की जांच की जाएगी। इसके मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सलाह दी है कि जोखिम वाले देशों से आने वाले यात्री आरटी-पीसीआर जांच के नतीजे आने तक हवाई अड्डे पर ही इंतजार करने के लिए तैयार रहें। वहां से अन्य स्थान के लिए पहले से संपर्क उड़ान बुक नहीं करें।

राष्ट्रीय राजधानी और देश के अन्य हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों ने नए नियमों को लागू करने के लिए कमर कस ली है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ने एक बार में 1,500 तक यात्रियों को रखने की व्यवस्था की है। इनमें जोखिम वाले देशों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्री भी होंगे, जो जांच रिपोर्ट आने तक रोके जाएंगे।

जांच और रुकने के लिए हर यात्री से लिए जाएंगे 1700 रुपये

अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक यात्री को आरटी-पीसीआर जांच करानी होगी, जिसके लिए करीब 1,700 रुपये लिए जाएंगे। जांच रिपोर्ट आने तक उनके रुकने के दौरान भोजन-पानी भी इस राशि में शामिल है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) के प्रवक्ता ने कहा कि सभी एएआइ हवाई अड्डे केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का राज्य प्राधिकारों के साथ समन्वय कर लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। एएआइ का शीर्ष प्रबंधन भी स्थिति की निगरानी कर रहा है। एएआइ 34 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का संचालन करता है।

जोखिम ग्रस्त सूची में 12 देश

सरकार द्वारा 26 नवंबर को अपडेट की गई सूची के मुताबिक 12 देशों को जोखिम ग्रस्त सूची में रखा गया है। इनमें ब्रिटेन व यूरोपीय संघ के देश, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मारीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे, सिंगापुर, इजरायल और हांगकांग शामिल हैं।


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

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नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।