OH NO! 78 वर्ष के बुजुर्ग ने किया कुत्ते के साथ दुष्कर्म

OH NO! 78 वर्ष के बुजुर्ग ने किया कुत्ते के साथ दुष्कर्म

महाराष्ट्र में एक तरफ कोविड-19 का आतंक बढ़ रहा है वही दूसरी तरफ क्राइम के मुद्दे बढ़ रहे हैं हाल ही में क्राइम का एक केस नालासोपारा जिले से सामने आया है जी दरअसल यहां एक शख्स ने मानवता को शर्मसार कर दिया है बताया जा रहा है उसने कुत्ते के साथ यौन उत्पीड़न किया है इस मुद्दे के सामने आने से सभी दंग है आरोपी का नाम अनंत पाटिल (78) बताया जा रहा है जिसने कुत्ते के साथ बलात्कार किया है

बताया जा रहा है इस घटना को किसी व्यक्ति ने अपने फोन पर शूट कर लिया और उसके बाद शख्स ने पशुओं के लिए कार्य करने वाले एक एनजीओ को फोन कर इस मुद्दे की जानकारी दी अब इस मुद्दे में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है खबरों के मुताबिक मुंबई के नालासोपारा जिले के तुलिंज पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र कांबले ने इस पूरी घटना के बारे में जानकारी दी है उनका बोलना है कि, ''घटनास्थल के पास एक इमारत के निवासी ने इस कृत्य को रिकॉर्ड है और एक एनजीओ को फोन कर सूचना दी जिसने इस मुद्दे में पुलिस को सूचित किया ''

इसी के साथ पुलिस ऑफिसर ने बताया है कि “हमने क्लिप देखी और भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) और पशु क्रूरता अधिनियम, 1960 की धारा 11 (1) (ए) के अनुसार केस दर्ज किया. हमने उसे अरैस्ट नहीं किया क्योंकि वह एक रोग से पीड़ित है यौन संचारित रोग (एसटीडी), मधुमेह और अन्य रोंगों सहित खतरनाक रोग  हम कोविड-19 संक्रमण का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट भी करेंगे लेकिन यह जोखिम भरा होगा यदि हम उसे उसकी संक्रामक रोग के कारण अरैस्ट करते हैं ''

जल्द ही पुलिस इस मुद्दे में वसई न्यायालय में चार्जशीट पेश करेगी और अनंत पाटिल को न्यायालय में पेश करेगी इस मुद्दे में पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र कांबले ने कहा, है कि “हम आगे जाँच कर रहे हैं कि कहीं वह आदतन यौन क्रिमिनल तो नहीं है ''


भारत बायोटेक की आज डब्ल्यूएचओ के साथ बैठक

भारत बायोटेक की आज डब्ल्यूएचओ के साथ बैठक

भारत के स्वदेशी कोरोनारोधी टीके कोवैक्सीन (Covaxin) को मान्यता दिए जाने के मुद्दे पर आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ भारत बायोटेक की बैठक होगी। इस बैठक में स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सिन के आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) के लिए मूल्यांकन किया जाएगा। डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिल जाने पर इस टीके को लगवाने वाले लोगों को विदेश जाने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही इस टीके के निर्यात का भी रास्ता खुलेगा।

कोवैक्सीन को भारत बायोटेक ने आइसीएमआर के साथ मिलकर विकसित किया है। यह भारत में बनी पहली स्वदेशी वैक्सीन है। भारत में अभी कोरोना के खिलाफ तीन वैक्सीनों का इस्तेमाल हो रहा है। भारत बायोटेक की कोवैक्सीन भी इनमें से एक है। दूसरी वैक्सीन कोविशील्ड लगाई जा रही है। इसको आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और एस्ट्राजेनेका ने बनाया है, जिसका उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया कर रहा है। इसके अलावा रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन भी लगाई जा रही है।

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन तीसरे चरण में 77.8 फीसद प्रभावी पाई गई है। कंपनी ने पिछले हफ्ते ही ट्रायल का डेटा ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया को सौंपा था। मंगलवार को सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने वैक्सीन के फेज तीन के ट्रायल के डेटा को मंजूरी दे दी। भारत बायोटेक की तरफ से केंद्र सरकार की कमेटी को यह रिपोर्ट सौंपी गई है। एसइसी की मंजूरी के बाद इस डेटा को अब डब्ल्यूएचओ को भी भेजा जा सकेगा।

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का डेटा अभी तक पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त, पीयर-रिव्यू जर्नल में प्रकाशित नहीं हुआ है। भारत बायोटेक ने इस महीने की शुरआत में कहा था कि दवा नियामक को प्रस्तुत करने के बाद और लगभग तीन महीने की समय सीमा के भीतर इस डेटा का प्रकाशन होगा।