जम्मू कश्मीर नेशनल हाइवे पर मरम्मत का काम तेज,यातायात फिर प्रारम्भ होने की आशा

जम्मू कश्मीर नेशनल हाइवे पर मरम्मत का काम तेज,यातायात फिर प्रारम्भ होने की आशा

जम्मू कश्मीर राजमार्ग पर लैंडस्लाइड की घटना से यातायात अस्त व्यस्त हो गया है. यहां लैंडस्लाइड की कई घटनाएं हुई हैं. राजमार्ग पर हुई भूस्खलन की ऐसी 30 घटनाओं में से 25 के मलबे को हटा दिया गया है. मरम्मत कार्य के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भी बंद रहा. इस बीच, मौसम की स्थिति में सुधार होने और सड़क साफ करने के अभियान के पूरा होने के बाद राजमार्ग पर फंसे 600 से अधिक वाहनों को निकाल दिया गया. 

भारी बारिश के कारण जो भूस्खलन हुआ है, उसकी वजह से मंगलवार शाम से बंद राजमार्ग पर फंसे बाकी 1,400 वाहनों को भी निकालने का कोशिश किया जा रहा है. पर्सनल रूप से सड़क की मरम्मत एवं निकासी कार्यों की नज़र कर रहे रामबन के उपायुक्त मुसरत इस्लाम ने बोला कि राजमार्ग पर हुई लैंडस्लाइड की 30 घटनाओं में से 25 के मलबे को हटा दिया गया है.

भारी बारिश के चलते रामबन और उधमपुर जिलों में 33 स्थानों पर भूस्खलन और पत्थर टूटकर गिरने की घटनाओं के कारण राजमार्ग बंद हो गया था. इसके अलावा, सड़क का 150 फीट लंबा हिस्सा भी टूटकर पानी में बह गया था. यातायात ऑफिसरों ने कहा, “बनिहाल रामबन सेक्टर में राजमार्ग पर पांच से छह बंद स्थानों पर यातायात बहाली का काम चल रहा है. देर शाम तक इस सेक्टर में यातायात एक बार फिर प्रारम्भ हो जाने की आशा है.” 

वहीं जम्मू क्षेत्र के पुंछ और राजौरी जिलों को दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले से जोड़ने वाली जरूरी मुगल रोड को यातायात के लिए खोल दिया गया है. भारी बारिश के चलते हुए भूस्खलन के कारण मुगल रोड भी दो दिनों तक बंद रही थी. राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शब्बीर अहमद मलिक ने कहा, “जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात की जल्द बहाली हो जाए, इसकी कोशिशें तेज कर दी हैं. 


भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन को देख क्या बोलेंगे आप

भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन को देख क्या बोलेंगे आप

Indias Last Railway Station: भारत का रेल इंफ्रास्ट्रक्चर अंग्रेजों के जमाने का है यहां आज भी कुछ नियम ऐसे हैं जो लंबे समय से चले आ रहे हैं ऐसे में ही यह रेलवे स्टेशन भी सबसे अनोखा है इसका नाम है सिंहाबाद रेलवे स्टेशन (Singhabad Railway Station), जो कि हिंदुस्तान का अंतिम रेलवे स्टेशन भी है 

आज भी अंग्रेजों के टाइम जैसा है ये स्टेशन

इस रेलवे स्टेशन की विशेषता यह है कि यह आज भी वैसा ही है, जैसा अंग्रेज छोड़कर गए थे यहां स्टेशन में हर चीज टिकट से लेकर गियर और रेलवे बैरियर तक अंग्रेजों के जमाने के हैं यहां पिछले कई वर्षों से कोई यात्री ट्रेन नहीं रुकती ये पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के हबीबपुर क्षेत्र में है सिंहाबाद से लोग पैदल भी कुछ किलोमीटर दूर बांग्लादेश में घूमते हुए चले जाते हैं इसके बाद हिंदुस्तान का कोई और रेलवे स्टेशन नहीं है ये बहुत छोटा स्टेशन है जहां कोई चहल पहल और भीड़भाड़ नहीं दिखती 

मालगाड़ियों के लिए होता है इस्तेमाल 

आपको बता दें कि इस रेलवे स्टेशन का उपयोग मालगाडियों के ट्रांजिट के लिए किया जाता है सिंहाबाद स्टेशन के नाम पर छोटा सा स्टेशन ऑफिस दिखता है, इसके पास एक-दो रेलवे के क्वॉर्टर हैं इस स्टेशन पर कर्मचारी भी नाम मात्र के ही हैं यहां के रेलवे बोर्डों में इसके नाम के साथ लिखा है- हिंदुस्तान का आखिरी स्टेशन

1978 में इस रूट पर प्रारम्भ हुईं मालगाड़ियां

गौरतलब है कि वर्ष 1971 की लड़ाई के बाद जब बांग्लादेश बना तो भारत- बांग्लादेश के बीच यातायात प्रारम्भ करने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी 1978 में हिंदुस्तान और बांग्लादेश में एक समझौता हुआ, जिससे इस रुट पर माल गाड़ियां चलने लगीं ये हिंदुस्तान से बांग्लादेश आती और जाती थीं नवंबर 2011 में पुराने समझौते में संशोधन किया गया अब समझौते में नेपाल को भी शामिल कर लिया गया है यानी सिंहाबाद होकर नेपाल की ओर जाने वाली मालगाड़ियां भी चलने लगीं

नेपाल की ट्रेनें भी यहीं से गुजरती हैं

2011 के बाद से यहां से केवल बांग्लादेश ही नहीं बल्कि नेपाल की ओर जाने वाली ट्रेनें भी गुजरने लगीं गौरतलब है कि बांग्लादेश से नेपाल को काफी बड़े पैमाने पर खाद निर्यात होता है इन्हें लेकर जाने वाली मालगाड़ियों की खेप रोहनपुर-सिंहाबाद ट्रांजिट प्वॉइंट से निकलती है 

गांधी और सुभाष चंद बोस ने भी किया इस रूट का इस्तेमाल

ये स्टेशन कोलकाता से ढाका के बीच ट्रेन संपर्क के लिए उपयोग होता था वैसे यह स्टेशन आजादी से पहले का है, इसलिए इस रूट का उपयोग कई बार महात्मा गांधी और सुभाष चंद बोस ने ढाका जाने के लिए भी किया