हिंदुस्तान के पड़ोसी देश भी जुटे है सैन्य ताकत बढ़ाने में

हिंदुस्तान के पड़ोसी देश भी जुटे है सैन्य ताकत बढ़ाने में

दुनियाभर में हथियारों की होड़ तेजी से बढ़ रही है. चाइना व पाक जैसे हिंदुस्तान के पड़ोसी देश भी अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर सैन्य ताकत बढ़ाने में जुटे हैं. इसी कारण इंडियन आर्मी को आधुनिक हथियारों से सुसज्जित करना समय की बड़ी मांग है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाक के साथ लगातार बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के बाद हिंदुस्तान संसार के दूसरे सबसे बड़े हथियार आयातक देश के रूप में उभरा है. पिछले कुछ समय में अमेरिका के अतिरिक्त रूस, इजरायल, फ्रांस आदि के साथ हिंदुस्तान ने अत्याधुनिक हथियारों व अन्य साजो-सामान की खरीद के लिए कई बड़े सौदे किए हैं. भविष्य की रणनीतियों व युद्ध के खतरों को ध्यान में रखते हुए सेना के सभी अंगों को अत्याधुनिक हथियारों से परिपूर्ण बनाना बेहद महत्वपूर्ण भी है, लेकिन इसके साथ ही इस बात की भी आवश्यकता महसूस की जाती रही है कि अत्याधुनिक हथियारों की खरीद के लिए हम पूरी तरह से विदेशी हथियारों पर आश्रित न रह कर उन्नत स्वदेशी तकनीक वाले हथियारों से भी सेना को सुसज्जित किया जाए.

पिछले दिनों रक्षा मंत्री ने बोला था कि केवल हथियारों का आयातक बने रह कर कोई भी देश महाशक्ति नहीं बन सकता. पिछले कुछ वर्षों में हिंदुस्तान ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित हाइपरसोनिक हथियारों व मिसाइलों से सेना की ताकत बढ़ाई है, जिनकी मारक क्षमता का लोहा पूरी संसार मान रही है. हिंदुस्तान व रूस ने 2015 में पांच अरब डॉलर का हथियारों का करार किया था. इसके तहत अक्तूबर, 2020 तक सेना के बेड़े में संसार की सबसे आधुनिक व लंबी दूरी की एस-400 बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली शामिल होने वाली है. यह मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों व हर प्रकार के ड्रोन को निशाना बनाने व शत्रु की तरफ से होने वाले किसी भी हवाई हमले को चार सौ किलोमीटर की दूरी पर ही समाप्त करने में सक्षम है. इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान में ही तैयार हो रही विभिन्न मिसाइलें हिंदुस्तान को मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो रही हैं. सीमित क्षमताओं के बावजूद रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इंडियन आर्मी की ताकत बढ़ाने के लिए कई रक्षा प्रणालियां, उत्पाद व प्रौद्योगिकियां विकसित करने में बड़ी कामयाबी हासिल की हैं.

डीआरडीओ द्वारा विकसित अग्नि-2 बैलिस्टिक मिसाइल का पिछले दिनों पहली बार रात के समय पास परीक्षण करते हुए हिंदुस्तान ने अपनी स्वदेशी मिसाइल ताकत का स्पष्ट अहसास कराया था. अब हिंदुस्तान रात में भी मिसाइल दागने व लक्ष्य भेदने की क्षमता हासिल कर लेने वाला देश बन गया है. अग्नि-2 मिसाइल 21 मीटर लंबी, 1.3 मीटर चौड़ी व सोलह टन वजनी है जो तीन हजार किलोमीटर तक के दायरे में लक्ष्य को भेद सकती है व यह परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है. सतह से सतह पर प्रहार करने की क्षमता से लैस इस मिसाइल को साल 2004 में ही सेना में शामिल कर लिया गया था, लेकिन रात के समय इसका पास परीक्षण अब किया गया. अग्नि-2 के अतिरिक्त इसी शृंखला की सात सौ किलोमीटर तक मार कर सकने वाली अग्नि-1, तीन हजार किलोमीटर तक जाने वाली अग्नि-3, लंबी दूरी तक मार करने वाली अग्नि-4 व पांच हजार किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल अग्नि-5 भी हिंदुस्तान की मिसाइल परियोजनाओं की बड़ी देन रही हैं. अब अग्नि-6 पर भी तेजी से कार्य चल रहा है.

अमेरिका, रूस व चाइना के पास इस समय विभिन्न प्रकार की हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं. अमेरिका के पास एक साथ तीन परमाणु हथियार ले जाने व तीन भिन्न-भिन्न लक्ष्यों को भेदने में सक्षम तेरह हजार किलोमीटर की मारक क्षमता वाली एलजीएम-30 माइन्यूटमैन है तो रूस के पास एक साथ दस ठिकानों पर निशाना साधने में सक्षम सोलह हजार किलोमीटर की मारक क्षमता वाली आर-36 है. इसी तरह चाइना के पास एक साथ दस से भी ज्यादा ठिकानों पर निशाना साधने में सक्षम डोंगफेंग-41 मिसाइल है. पांचवीं पीढ़ी का हथियार मानी जा रही हाइपरसोनिक मिसाइल की गति कम से कम पांच मैक होती है व एक मैक गति ध्वनि की गति के बराबर मानी जाती है, यानी ध्वनि से पांच गुना तेज गति वाली मिसाइलें ही हाइपरसोनिक मिसाइलें कहलाती हैं, जो एक सेकेंड में एक मील से भी ज्यादा दूरी तय करती हैं. ध्वनि की गति से दो से तीन गुना अधिक गति वाली मिसाइलें सुपरसोनिक मिसाइल कहलाती हैं. हिंदुस्तान के पास वैसे ब्रह्मोस जैसी 2.8 मैक गति वाली सुपरसोनिक मिसाइलें तो हैं, जो तीन सौ किलोग्राम हथियार के साथ करीब दो सौ नब्बे किलोमीटर तक हवा से हवा में मार कर सकती हैं. अमेरिका, रूस व चाइना की बढ़ती मिसाइल ताकत की वजह से ही हिंदुस्तान को हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकास करना महत्वपूर्ण हो गया था.

अगर बात की जाए हिंदुस्तान व रूस के साझा प्रयासों से बनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल की तो नौसेना, थलसेना व वायुसेना की जरूरतों के आधार पर समुद्र, जमीन व आकाश से दागे जाने वाले इस मिसाइल के कई संस्करण पहले ही तैयार हो चुके हैं, लेकिन सितंबर 2019 में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के जिस विशेष संस्करण का पास परीक्षण किया गया, उस टू-इन-वन मिसाइल को जमीन के अतिरिक्त समुद्री पोतों व पनडुब्बियों से भी दागा जा सकता है. यह संसार की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है व साल 2020 तक सुखोई-30 लड़ाकू विमानों में भी ब्रह्मोस तैनात कर दिए जाने की योजना है. पिछले महीने डीआरडीओ द्वारा ही तैयार साढ़े तीन हजार किलोमीटर की मारक क्षमता वाली के-4 परमाणु मिसाइल का भी परीक्षण किया गया था. वैसे साल 2010 से अभी तक इसके कई परीक्षण किए जा चुके हैं व अब परीक्षण के दौरान यह शून्य त्रुटि के साथ लक्ष्य को भेदते हुए सभी मानकों पर खरी उतरी है. इन पास परीक्षणों के बाद हिंदुस्तान अब अमेरिका, रूस, फ्रांस व चाइना के बाद पानी के भीतर मिसाइल दागने की अभूतपूर्व ताकत व तकनीक रखने वाला संसार का पांचवां देश बन गया है.

इस वर्ष सितंबर में हिंदुस्तान पूर्णरूप से स्वदेशी ‘अस्त्र’ मिसाइल का भी पास परीक्षण कर चुका है. ‘अस्त्र’ मिसाइल हवा से हवा में मार करने वाली पहली पूर्ण स्वदेशी मिसाइल है, जिसमें भिन्न-भिन्न ऊंचाई पर उड़ान भर रहे कम और लंबी दूरी के हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता है. ठोस ईंधन से चलने वाली यह मिसाइल शत्रु राष्ट्रों के रडार की आंखों में धूल झोंकने की क्षमता से भी लैस है व पंद्रह किलोग्राम विस्फोटकों से लैस होकर यह साढ़े पांच हजार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से वार कर सकती है. चूंकि यह प्रक्षेपण के तुरंत बाद बड़ी तेजी से अपने लक्ष्य को भेदती है, इसीलिए इसे ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल’ भी बोला गया है. इस मिसाइल को विशेष रूप से मिराज, सुखोई एसयू-30, एलसीए तेजस, मिग-29 व मिग-21 बायसन जैसे लड़ाकू विमानों में लगाने के लिए विकसित किया गया है व अब इसका नया विकसित संस्करण बनाने की तैयारी भी प्रारम्भ हो गई है.

अगर हिंदुस्तान द्वारा विकसित की गई अन्य स्वदेशी मिसाइलों पर नजर दौड़ाएं तो सतह से सतह पर मार करने वाली, सतह से हवा में मार करने वाली, हवा से हवा में मार करने वाली व हवा से सतह पर मार करने वाली अनेक मिसाइलें इंडियन आर्मी की ताकत बनी हुई हैं. बहरहाल, हिंदुस्तान केवल विदेशी हथियारों व मिसाइलों पर निर्भर न रह कर अब जिस प्रकार अत्याधुनिक तकनीकों से लैस सुपरसोनिक व हाइपरसोनिक स्वदेशी हथियारों के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, उससे इंडियन आर्मी की ताकत दिनोंदिन बढ़ रही है व इसे देखते हुए अब पाक तो क्या, चाइना जैसे राष्ट्रों के भी पसीने छूटने लगे हैं.