उत्तराखंड के ब्लड बैंकों का भगवान ही है मालिक, जानकर आप हो जायेंगे हैरान

उत्तराखंड के ब्लड बैंकों का भगवान ही है मालिक, जानकर आप हो जायेंगे हैरान

उत्तराखंड के ब्लड बैंकों का भगवान ही मालिक है. वे महान रक्तदाताओं के खून की मूल्य को समझ नहीं पा रहे हैं. आए दिन रक्तदान के लिए शिविर लगाने वाले ब्लड बैंक कहीं सुविधाओं की कमी तो कहीं अव्यवस्थाओं के मकड़जाल में फंसकर रक्तदाताओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं. ये तथ्य हिंदुस्तान के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में उजागार हुआ.

खास बातें

  • महान रक्तदाताओं के खून की मूल्य को नहीं समझ पा रहे
  • कैग ने उजागर की अव्यवस्थाओं की दास्तान, खून के क्रास मिलान के लिए एक्सपायर्ड किट का इस्तेमाल
  • रक्त संचारित बीमारियों के लिए अलग से प्रयोगशालाएं नहीं
  • एक्सपायर्ड लाइसेंस के साथ संचालित होते रहे 13 ब्लड बैंक
  • ब्लड बैंकों का निरीक्षण करने तक में हुई हीलाहवाली, 96 में से सिर्फ 22 निरीक्षण हुए

ब्लड बैंकों में खून के क्रास मिलान के लिए एक्सपायर्ड किट का प्रयोग हो रहा है. रक्त की थैलियां बंद करने के लिए टयूब सीलर तक उपलब्ध नहीं है व मोमबत्ती की लौ से थैलियां बंद की जा रही हैं. हेपेटाइटिस, सीफिलिस, मलेरिया और एचआईवी सरीखे रक्त संचारित रोगों के लिए व ब्लड ग्रुप सेरोलॉजी के लिए एक ही लैब का प्रयोग हो रहा है. जबकि मानकों के हिसाब से अलग लैब होनी चाहिए.

उचित जल निकासी का आभवा था. डिस्पोजेबल आइटम ब्लड बैंक की गैलरी में रखे गए थे. अपशिष्ट रक्त व रक्त नलियाें के परीक्षण की मेज पर रखे गए कूड़ेदान में डाला गया था. गंभीर बात यह है कि इन ब्लड बैंकों की इन कमियों को पकड़ने में भी सिस्टम की कोई खास रुचि नजर नहीं आ रही है. यह तथ्य सामने आया है कि 2015-18 के दौरान ब्लड बैंकों के 96 निरीक्षण होने चाहिए थे, लेकिन चार वर्ष में केवल 22 निरीक्षण ही हो पाए.

कार्ययोजना तक नहीं

स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) के प्रावधान के हिसाब से उसे एक चरणबद्ध तरीका से रिप्लेसमेंट डोनर्स को कम करने व स्वैच्छिक रक्त दाताओं से सुरक्षित व गुणवत्ता वाले रक्त के संग्रह का 100 फीसदी लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एक काम योजना तैयार करनी थी. लेकिन एसबीटीसी ने ऐसी कोई कार्ययोजना नहीं बनाई.

इतना नहीं उसकी पर्याप्त बैठकें तक नहीं हुईं. वह सूचना, एजुकेशन व संचार के मुद्दे में भी खास सक्रियता नहीं दिखा सका. कैग ने पांच ब्लड बैंकों की नमूना जाँच में पाया कि वे 40 फीसदी भी लक्ष्य नहीं प्राप्त कर सके. 2015-18 के दौरान सात ब्लड बैंकों में स्वैच्छिक रक्तदान की प्रतिशतता बहुत कम थी. हरिद्वार ब्लड बैंक के मुद्दे में शून्य फीसदी था.

1998 से बगैर वैध लाइसेंस के चल रहा ब्लड बैंक

कैग ने पाया कि जिला अस्पताल पिथौरागढ़ में ब्लड बैंक 1998 से बगैर वैध लाइसेंस के संचालित हो रहा है. संयुक्त निरीक्षण टीम ने 2002, 2007 और 2018 में कमियों दूर करने को जो बोला था, उसे भी पूरा नहीं किया गया. लाइसेंस प्राधिकारी ने बेकार कार्यपद्धति के बावजूद डोनर व प्राप्तकर्ता दोनों के ज़िंदगी को खतरे में डालते हुए कोई सख्त कार्रवाई नहीं की.

35 में से 13 के पास एक्सपार्यड लाइसेंस

एसडीसी के अभिलेखों की जाँच में कैग ने पाया कि जून 2018 तक प्रदेश में संचालित 35 में से 13 ब्लड बैंक जिनमें 12 सरकारी हैं, एक्सपायर्ड लाइसेंस के साथ संचालित हो रहे थे. इन 13 ब्लड बैंकों में से दून ब्लड बैंक का मुद्दा अनुमोदन के लिए सीडीएससीओ को भेजा गया था व छह ब्लड बैंक लाइसेंस अधिकारियों के निरीक्षण न किए जाने के कारण छह से दो वर्ष तक की अवधि तक बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे थे.

छह मामलों में निरीक्षण अधिकारियों ने निरीक्षण किया था व विभिन्न कमियों के उजागर किया था. मसलन लैब व रक्त के भंडारण के लिए पर्याप्त जगह नहीं था. साफ सफाई नहीं थी. ब्लड बैंकों से इन कमियों को दूर नहीं किया व पिथौरागढ़, उत्तरकाशी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक 20 वर्ष व 10 से अधिक सालों से बिना लाइसेंस के संचालित होते रहे.

डोनर रजिस्टर न मास्टर रजिस्टर

औषधि व प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत ब्लड बैंकों को डोनर रजिस्टर रखना चाहिए जिसमें क्रम संख्या, दान की दिनांक, नाम, पता व डोनर के हस्ताक्षर के साथ आयु का विवरण, वजन, हिमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप, ब्लड प्रेशर, चिकित्सकीय जांच, बैग संख्या, रोगी का विवरण, चिकित्सा ऑफिसर के हस्ताक्षर होने चाहिए. जाँच में पाया कि एसएस जीना अस्पताल हल्द्वानी को छोड़कर सभी चयनित ब्लड बैंकों में इस रजिस्टर को मानकों के अनुसार नहीं बनाया गया.

जाँच में यह भी पाया गया कि एसटीएम मेडिकल कालेज हल्द्वानी, बीडी पांडे जिला अस्पताल पिथौरागढ़, एलडी भट्ट अस्पताल काशीपुर मास्टर रजिस्टर मानकों के अनुरूप नहीं बना रहे थे. इस रजिस्टर मं बैग का सीरियल नंबर, संग्रह की तारीख, समापन की तारीख, मात्रा एमएल में, आरएच समूह, एचआईवी, मलेरिया, हेपेटाइटिस, सीफिलिस के परीक्षण के परिणाम का विवरण के साथ डोनर का नाम, पता, उपयोग, जारी करने की संख्या, घटक तैयार या खारिज किया गया व प्रभारी चिकित्सा ऑफिसर के हस्ताक्षर का ब्योरा होना चाहिए.