कोरोना वायरस का उपचार करा रही एमिलिया गिउसेपिना एंटोनिएटी ने डॉक्टरों पर जताया आभार

कोरोना वायरस का उपचार करा रही एमिलिया गिउसेपिना एंटोनिएटी ने डॉक्टरों पर जताया आभार

कोरोना वायरस का उपचार करा रही इटली की 70 वर्षीय एमिलिया गिउसेपिना एंटोनिएटी ने जाने से पहले मेदांता अस्पताल के सभी कर्मचारियों व डॉक्टरों का आभार जताया.

पिछले 20 दिन एमिलिया व उनके साथ 13 अन्य इटली के पर्यटकों के लिए चुनौतीपूर्ण थे. इन सभी का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में कोविड -19 का उपचार चल रहा था.

डाक्टर यतिन मेहता (गहन देखभाल विशेषज्ञ) व डाक्टर सुशीला कटारिया (फिजीशियन) के नेतृत्व में सभी का उपचार चल रहा था. सोमवार को एमिलिया सहित 10 पर्यटकों को दो पुष्टिकरण परीक्षणों में निगेटिव परीक्षण के बाद छुट्टी दे दी गई. एमिलिया ने जाने से पहले डॉक्टरों का आभार जाहीर किया.

मेहता ने बोला कि इन सभी का उपचार तबीयत बिगड़ने से पहले ही किया जाना था. उन्होंने बोला कि चार मार्च को दिल्ली के आईटीबीपी क्वारंटीन केन्द्र में डॉक्टरों के साथ वार्ता के बाद जिस 14 पर्यटकों को अस्पताल लाया गया उनके उपचार के लिए सब कुछ व्यवस्थित करना कठिन था. उस समय वे बहुत बीमार नहीं थे, हालांकि उनका कोविड -19 के लिए परीक्षण किया गया था.

उन्होंने बोला कि हमारी टीम ने व्हाट्सएप पर हर डायग्नोस्टिक व रेडियोलॉजी रिपोर्ट का आदान-प्रदान किया. फर्श पर बीमार रोगियों का प्रबंधन करना सरल नहीं होता. हमने हर मिनट विस्तार से नजर रखने के लिए आइसोलेशन वार्ड में कैमरे लगाए. दोनों डॉक्टरों के लिए  यह भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण काम था. हर परिवार की तरह जो सदस्यों के बारे में चिंतित है, मैं भी था.

मैंने अपनी पत्नी को दूसरे कमरे में सोने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया. मेरी बहू गर्भवती है व गुजरात में है. मैं किसी को भी कठिनाई में नहीं डलाना चाहता था. रेवाड़ी में व्याख्यान देने के बाद मैंने अपनी आवाज लगभग खो सी दी थी.

पर्यटकों को अस्पताल लाए जाने दो दिन बाद मुझे बुखार आ गया. मुझे खुद की जाँच करवानी पड़ी व शुक्र है कि परिणाम निगेटिव थे. इसी तरह डाक्टर कटारिया के पति शहर में एक फार्महाउस में शिफ्ट हो गए, क्योंकि वह गठिया से पीड़ित हैं. कटारिया के बच्चे उसी घर में भिन्न-भिन्न कमरों में उनके साथ रह रहे हैं.

डाक्टर कटारिया ने बताया कि मुझे लगता है कि यह मरीजों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण था. एक मरीज का अभी भी उपचार चल रहा है, उसने मुझसे पूछा कि क्या वह जीवित है. वह बहुत आशंकित था.

मेहता ने सहमति जताते हुए बोला कि एक ऐसे देश में होना जहां आप अपने परिवार के साथ नहीं हो सकते हैं. यहां तक कि कहीं आना जाना भी निराशाजनक है. मरीजों के लिए यह बहुत ज्यादा कठिन रहा. फिर भी हमारी टीम ने भाषा अलग होने के बावजूद उन्हें प्रेरित करने का कोशिश किया.

कटारिया ने बोला कि हमारे बीच 90 फीसदी गैर-मौखिक वार्ता थी. जाँच के हर दौर के बाद हम अंगूठे का उपयोग करते थे. इसके अतिरिक्त एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जहां दैनिक अपडेट के लिए इटली के दूतावास के अधिकारियों को शामिल किया गया था. जिन मरीजों का बेहतर स्वास्थ्य था, उन्होंने फोन का उपयोग किया व टेलीविजन देखा. इटली दूतावास ने उनके लिए किताबें भेजी थीं.