दिल्‍ली-एनसीआर से अधिक जहरीली है अहमदाबाद की हवा, फरीदाबाद, आनंद विहार और लोनी में भी हालत खराब

दिल्‍ली-एनसीआर से अधिक जहरीली है अहमदाबाद की हवा, फरीदाबाद, आनंद विहार और लोनी में भी हालत खराब

दिल्‍ली और इसके आसपास सटे दूसरे राज्‍यों के कई इलाकों में हवा में प्रदूषण का स्‍तर काफी बढ़ा हुआ है। दिवाली के बाद से इसमें जबरदस्‍त तेजी देखी जा रही है। इतना ही नहीं दिन चढ़ने के साथ ही हवा का स्‍तर और अधिक खराब रिकार्ड किया जा रहा है। इसकी एक वजह समय के साथ सड़कों पर बढ़ती गाडि़यों की संख्‍या और इससे निकलने वाला जहरीला धुंआ भी है। साथ ही दूसरी बड़ी वजह हवा की रफ्तार भी है। हवा न चलने की वजह से हमारे वातावरण में बेहद निचले स्‍तर पर जहरीले धुंए की जो मोटी परत बन जाती है वो उड़ नहीं पाती है। इसकी वजह से भी समस्‍या बनी रहती है। गुजरात के अहमदाबाद में रविवार सुबह 8 बजे एक्‍यूआई का स्‍तर 834 रिकार्ड किया गया है।

दिल्‍ली के इलाकोंं हाल

बहरहाल, आपको बता दें कि aqicn.org के ताजा आंकड़ों के मुताबिक रविवार सुबह आठ बजे दिल्‍ली-एनसीआर के राज्‍यों के इलाकों के वायु प्रदूषण का स्‍तर गंभीर रिकार्ड किया गया है। इस तरह के एक नहीं बल्कि करीब दर्जन भर इलाके हैं। इनके अलावा दूसरी जगहों पर भी हवा साफ नहीं है, बल्कि बेहद खराब स्‍तर पर रिकार्ड की गई है। सुबह आठ बजे दिल्‍ली के नरेला में एक्‍यूआई का स्‍तर 341, बवाना में 404, मुंडका में 387, रोहिणी में 350, पंजाबी बाग में 306,जहांगीरपुरी में 371, झिलमिल में 333, आनंद विहार में 395, द्वारका में 340, आरकेपुरम में 356, शूटिंग रेंज में 327, ओखला में 328, मेजर ध्‍यान चंद नेशनल स्‍टेडियम के पास 338, अमेरिकी दूतावास के पास 348, नजफगढ़ में 283 रिकार्ड किया गया है।

यूपी और हरियाणा का हाल

इसी तरह से उत्‍तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी इलाके में 302, वसुंधरा में 458, मुजफ्फरनगर में 260, बुलंदशहर में 239, बागपत में 278, ग्रेटर नोयडा में 226, संजय नगर गाजियाबाद में 203, गंगा नगर, मेरठ में 260, आनंद विहार, हापुड़ में 218, हरियाणा के फरीदाबाद में 506, गुरुग्राम में 290, मानेसर में 255, बहादुरगढ़ में 249, चरखी दादरी में 280 रिकार्ड किया गया है।


बिहार-पंजाब में वायु प्रदूषण

बिहार के गया में सुबह 8 बजे 203, पटना में 271, मुजफ्फरपुर में 271 रिकार्ड किया गया है। पंजाब के अमृतसर में 164 रिकार्ड किया गया है।


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।