कोरोना महामारी पर लोकसभा में आज होगी चर्चा, गुजरात के आठ प्रमुख शहरों में रात्रि कर्फ्यू बढ़ाया

कोरोना महामारी पर लोकसभा में आज होगी चर्चा, गुजरात के आठ प्रमुख शहरों में रात्रि कर्फ्यू बढ़ाया

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का खतरा देश पर मंडरा रहा है। हालांकि देश में नए वैरिएंट का कोई केस सामने नहीं आया है। लेकिन भारत की राज्य सरकारें खासा सतर्कता बरत रहीं हैं। नए कोरोना वायरस के मद्देनजर गुजरात सरकार ने मंगलवार को आठ प्रमुख शहरों में रात का कर्फ्यू (सुबह 1 बजे से सुबह 5 बजे तक) 10 दिसंबर तक बढ़ा दिया है।

लोकसभा में आज कोरोना पर होगी चर्चा
संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को बताया कि लोकसभा में बुधवार को कोरोना महामारी पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि यह चर्चा कम अवधि वाली होगी। यह चर्चा नियम 193 के तहत होगी, जिसके तहत सदस्य सार्स-कोव-2 के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के बारे में विवरण मांग सकते हैं।

हरियाणा स्कूल खोलने का फैसला टाला
हरियाणा सरकार ने कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के सामने आने पर पहली दिसंबर से स्कूलों को पूरी क्षमता के साथ खोलने का निर्णय टाल दिया है।

नागपुर में स्कूल 10 दिसंबर और पुणे में 15 दिसंबर तक बंद
नागपुर के नगर आयुक्त राधाकृष्णन बी ने मंगलवार को कहा कि कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रॉन को ध्यान में रखते हुए शहर में कक्षा एक से सात तक के स्कूल 10 दिसंबर तक नहीं खुलेंगे। उसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी और उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा। उधर, पुणे नगर निगम ने भी कक्षा 1 से 7 तक के स्कूलों को 15 दिसंबर के बाद खोलने की मंगलवार को घोषणा की है।

आरटी-पीसीआर और आरएटी जांच में ओमिक्रॉन वायरस की पहचान संभव
कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन से लड़ने के लिए सरकार ने मंगलवार को राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बैठक में जांच बढ़ाने, हॉटस्पाट की कड़ी निगरानी करने के निर्देश दिए। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने आईसीएमआर के डीजी डॉ बलराम भार्गव के हवाले से बताया कि आरटी-पीसीआर व आरएटी जांच से यह म्यूटेशन बच नहीं सकता, इसलिए बिना किसी शंका के राज्यों को जांच का दायरा बढ़ाना चाहिए।  इस बीच, गृहमंत्रालय ने कोरोना रोकथाम उपायों को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

स्वास्थ्य सचिव भूषण ने कहा, कोरोना से बचाव के नए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए राज्यों की जिम्मेदारी है कि वे निगरानी का स्तर घटने नहीं दें। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर कड़ी नजर रखी जाए। भूषण ने बताया, हर जिले में ज्यादा से ज्यादा जांच हो। आरटी-पीसीआर जांच का अनुपात बरकरार रखा जाए, ताकि संक्रमण से पूर्व शिकंजा कसा जा सके। टीके की दोनों खुराक देने का काम 31 दिसंबर से पहले पूरा करने का लक्ष्य दिया।

दो सप्ताह में बूस्टर डोज के निर्देश संभव
टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा, सरकार गंभीर मरीज व कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को टीके की बूस्टर डोज देने पर विचार कर रही है। अगले दो हफ्तों में दिशा-निर्देश जारी हो सकते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने भी राज्यसभा में बताया कि बूस्टर डोज की जरूरत को लेकर वैज्ञानिक साक्ष्यों पर अध्ययन जारी है, जिसके जल्द नतीजे मिल जाएंगे।
मंजूरी मिल गई तो बच्चों को भी लगेगी कोवाक्सिन
भारत बायोटेक के टीके कोवाक्सिन को 2 से 18 वर्ष आयुवर्ग पर आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए कोविड विशेषज्ञ समिति की सिफारिश की जांच की जा रही है।  केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने कंपनी से अतिरिक्त जानकारी मांगी है। इसकी मंजूरी के बाद ही टीकाकरण शुरू हो सकता है। राज्यसभा में डीएमके के सांसद तिरुचि शिवा ने सरकार से पूछा था कि क्या 12 साल से कम उम्र के बच्चों को कोवाक्सिन देने पर सरकार विचार कर रही है?

स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने कहा कि भारत बायोटेक द्वारा बच्चों और किशोरों पर किए टीके के क्लिनिकल परीक्षण के परिणामों पर विशेषज्ञ समिति की बैठकों में चर्चा हुई थी। कमेटी ने आपात स्थिति में कई शर्तों के साथ 2 से 18 वर्ष आयुवर्ग के लिए टीके को मंजूरी देने की सिफारिश की है, सरकार इसकी जांच कर रही है।

क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।