बंगलूरू : कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बनेगा प्रशिक्षण केन्द्र, मिलेगी इसपर काबू करने में मदद

बंगलूरू : कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बनेगा प्रशिक्षण केन्द्र,  मिलेगी इसपर काबू करने में मदद

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच जेएनसीएएसआर के बंगलूरू स्थित जक्कुर परिसर में कोरोना संक्रमण के इलाज को लेकर एक प्रशिक्षण केन्द्र प्रारम्भ किया है. इससे कोरोना संक्रमण के इलाज व विस्तार को काबू करने में मदद मिलेगी.

इसकी आरंभ जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च- जेएनसीएएसआर बंगलूरू जो कि साइंस व तकनीकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है द्वारा की गई है. एक हफ्ते के क्रैश कोर्स का मकसद संक्रमण की पहचान से लेकर इलाज तक की ट्रेनिंग देकर कुशल संक्रमण उपचारकों की खेप को तैयार करना है. 
 

पहला बैच ले चुका प्रशिक्षण

पहला बैच 16 जून से 22 जून तक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका है. कोरोना संक्रमण के लिए कार्य करने वालों को समूहों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिसमें एक बैच में छह से 10 प्रशिक्षु रखे गए हैं. इन्हें कोरोना संक्रमण की पहचान, जाँच व इलाज तथा इसमें बरती जाने वाली सावधानियों के बावत ट्रेंड किया गया है.

देश में प्रशिक्षित स्टाफ की कमी 

इस प्रशिक्षण में असली समय में पीसीआर जैसी मॉलीक्यूलर आधारित डॉयगनोस्टिक टेक्निक अपनाई जाती है, जो कि खासी जरूरी है. इसके अतिरिक्त महामारी के फैलाव को रोकने के लिए इसकी असली रूप से ट्रैकिंग भी जरूरी है. क्योंकि हिंदुस्तान में अभी तक संक्रमण की लड़ाई लड़ने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है. ऐसे में देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए जेएनसीएएसआर की पहल खासी सार्थक कही जा सकती है.

एक हफ्ते का प्रशिक्षण
एक हफ्ते तक चलने वाले प्रशिक्षण को कक्षा की पढ़ाई व असली स्थितियों में इलाज दोनों शामिल है. इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में लैब में संक्रमण की जाँच से लेकर इलाज तक में बरती जाने वाली सावधानियों तक तो शामिल किया गया है.

ताकि पाठ्यक्रम को पूरी तरह के प्रैक्टिकल रखा जाए जिससे ट्रेनिंग लेने वाले प्रशिक्षुओं के लिए असली समय में इसकी उपयोगिता साबित हो सके. इसके लिए प्रसंस्करण की एजुकेशन भी दी जा रही है. इसके लिए संक्रमण के इलाज के दौरान डेटा विश्लेषण व ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल को भी इसमें शामिल किया गया है. 

डीएसटी के सचिव आशुतोष शर्मा ने बोला कि कुल मिलाकर यह क्रैश कोर्स देश में कोरोना संक्रमण की जंग लड़ने वालों के लिए उपयोगी सत्र के साथ पूरी तरह से असली स्थितियों के अनुरूप है. जिससे इसमें ट्रेनिंग लेने वालों को इसके इस्तेमाल में सरलता होगी. 

साइंस व तकनीकी विभाग के अनुसार इस कोर्स के लिए मेडिकल में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री करने वाले युवा आवदेन कर सकते हैं. लैब परीक्षण एमएलटी डिग्री हिंदुस्तान में किसी भी चिकित्सा संस्थान द्वारा ली गई हो, इसके अतिरिक्त वर्तमान में कोरोना संक्रमण के इलाज में लगे व प्रयोगशालाओं में जाँच करने वालों को इसके लिए विशेष रूप से आवेदन के लिए आमंत्रित किया जाता है. पंजीकरण कराने वालों को रहने-खाने के साथ उपयुक्त पारिश्रमिक भी दिया जाएगा.