25 दरिंदो ने एक 23 वर्षीय लड़की के साथ बारी-बारी से किया बलात्कार

25 दरिंदो ने एक 23 वर्षीय लड़की के साथ बारी-बारी से किया बलात्कार

देश की राजधानी नयी दिल्ली से महज 100 कि मी दूर हरियाणा के होडल में 20 से अधिक दरिंदों ने एक घिनौने कृत्य को अंजाम दे चुके है. यहां तकरीबन 25 दरिंदो ने एक 23 वर्षीय लड़की के साथ बारी-बारी से बलात्कार किया और बाद में उसे दिल्ली के बदरपुर क्षेत्र में फेंक कर भाग निकले. दरअसल दोस्ती के नाम पर हुए धोखे से महिला बुरी तरह से टूट गई लेकिन किसी तरह उसने हौसला करके 9 दिन के उपरांत केस की सूचना पुलिस को दी.

पीड़ित महिला ने 12 मई को पलवल पुलिस में इस केस की कम्पलेन दर्ज कर ली गई है. लड़की ने कम्पलेन देते हुए इस वारदात में तकरीबन 20 से 22 आरोपियों के नाम भी पुलिसको इस बारें में जानकारी दे चुके है. एक पुलिस ऑफिसर ने बोला कि महिला का परिवार वर्तमान में उत्तर प्रदेश में रह रहा है. मूल रूप से ये उत्तराखंड के देहरादून के निवासी हैं.

पलवल में हसनपुर के थाना प्रभारी राजेश ने फोन पर बोला कि महिला पिछले कुछ वक़्त से दिल्ली के बदरपुर क्षेत्र में रह रही थी. थाना प्रभारी ने बोला कि मुख्य क्रिमिनल ने सोशल मीडिया के द्वारा महिला से दोस्ती की और उससे विवाह का वादा किया. 3 मई को महिला उससे होटल मिलने पहुंची. राजेश ने बोला कि आरोपी और पीड़िता ने साथ खाना-पीना किया जिसके उपरांत वह उसे लेकर गांव की एक ट्यूबवैल पर गया, जहां दूसरे क्रिमिनल उसे मिले.

पीड़िता ने इलज़ाम लगाया है कि वे उसका किडनैपिंग कर पास के जंगल में ले गए और वहां पूरी रात उन लोगों ने बारी-बारी से लड़की के साथ गैंग रेप किया. अगली प्रातः क्रिमिनल उसे लेकर बदरपुर पहुंचे और वहां छोड़कर भाग निकले. थाना प्रभारी के अनुसार महिला ने एक एडवोकेट से सम्पर्क कर इस घटना के 9 दिन के उपरांत पुलिस में कम्पलेन की है. राजेश ने कहा "हमने मुख्य आरोपी को अरैस्ट कर लिया है. वारदात में शामिल अन्य आरोपियों को पकड़ने के कोशिश जारी है. मुद्दे में प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है और आगे की जाँच जारी है.''


भारत बायोटेक की आज डब्ल्यूएचओ के साथ बैठक

भारत बायोटेक की आज डब्ल्यूएचओ के साथ बैठक

भारत के स्वदेशी कोरोनारोधी टीके कोवैक्सीन (Covaxin) को मान्यता दिए जाने के मुद्दे पर आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ भारत बायोटेक की बैठक होगी। इस बैठक में स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सिन के आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) के लिए मूल्यांकन किया जाएगा। डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिल जाने पर इस टीके को लगवाने वाले लोगों को विदेश जाने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही इस टीके के निर्यात का भी रास्ता खुलेगा।

कोवैक्सीन को भारत बायोटेक ने आइसीएमआर के साथ मिलकर विकसित किया है। यह भारत में बनी पहली स्वदेशी वैक्सीन है। भारत में अभी कोरोना के खिलाफ तीन वैक्सीनों का इस्तेमाल हो रहा है। भारत बायोटेक की कोवैक्सीन भी इनमें से एक है। दूसरी वैक्सीन कोविशील्ड लगाई जा रही है। इसको आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और एस्ट्राजेनेका ने बनाया है, जिसका उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया कर रहा है। इसके अलावा रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन भी लगाई जा रही है।

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन तीसरे चरण में 77.8 फीसद प्रभावी पाई गई है। कंपनी ने पिछले हफ्ते ही ट्रायल का डेटा ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया को सौंपा था। मंगलवार को सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने वैक्सीन के फेज तीन के ट्रायल के डेटा को मंजूरी दे दी। भारत बायोटेक की तरफ से केंद्र सरकार की कमेटी को यह रिपोर्ट सौंपी गई है। एसइसी की मंजूरी के बाद इस डेटा को अब डब्ल्यूएचओ को भी भेजा जा सकेगा।

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का डेटा अभी तक पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त, पीयर-रिव्यू जर्नल में प्रकाशित नहीं हुआ है। भारत बायोटेक ने इस महीने की शुरआत में कहा था कि दवा नियामक को प्रस्तुत करने के बाद और लगभग तीन महीने की समय सीमा के भीतर इस डेटा का प्रकाशन होगा।