उद्धव ठाकरे को एक और झटका देंगे शिंदे

उद्धव ठाकरे को एक और झटका देंगे शिंदे

शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका देने की तैयारी में हैं. शिंदे ने कम से कम 400 पूर्व पार्षदों और कुछ सांसदों की सूची बनाई है जो उनके साथ जा सकते हैं. कर्नाटक हाई कोर्ट ने बोला कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अनुसार जातिवादी दुर्व्यवहार सार्वजनिक जगह पर होना चाहिए. राष्ट्रपति चुनाव में इस समय रेस में मुर्मू काफी आगे चल रही हैं. हालांकि एनडीए के पास अभी बहुमत नहीं है. 

उद्धव को एक और झटका, 400 पूर्व पार्षदों और सांसदों को अपने पाले में ला सकते हैं एकनाथ शिंदे
शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका देने की तैयारी में हैं. बड़ी संख्या में शिवसेना के विधायकों को अपने पाले में लाने के बाद, शिंदे ने कम से कम 400 पूर्व पार्षदों और कुछ सांसदों की सूची बनाई है जो उनके साथ जा सकते हैं. खबरों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे के नयी गवर्नमेंट में शामिल होने के बाद ये पूर्व पार्षद और सांसद उनके साथ जा सकते हैं. पूरी समाचार पढ़ें.

सार्वजनिक जगह पर हो बदसलूकी तभी लागू होगा एससी-एसटी ऐक्ट: कर्नाटक हाई कोर्ट
कर्नाटक हाई कोर्ट ने बोला कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अनुसार जातिवादी दुर्व्यवहार सार्वजनिक जगह पर होना चाहिए. इसी के साथ ही न्यायालय ने  लंबित मुद्दे को रद्द कर दिया है. बता दें कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि बेसमेंट में उसे जातिसूचक शब्द कहे गए थे. इस दौरान उसके सहकर्मी भी उपस्थित थे. न्यायालय ने बोला कि बेसमेंट सार्वजनिक जगह नहीं हो सकता. पूरी समाचार पढ़ें.

राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू के नाम के घोषणा के साथ ही होने लगा खेल, कैसे यशंवत सिन्हा होंगे फेल
राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को झारखंड की पूर्व गवर्नर द्रौपदी मुर्मू और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के बीच चुनाव होना है. 24 जुलाई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल पूरा हो रहा है. उनके कार्यकाल पूरा होने से पहले ही राष्ट्र को नया महामहिम मिल जाएगा. बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए गवर्नमेंट ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है. उधर, विपक्षी दलों ने यशवंत सिन्हा का नाम फाइनल किया है. राष्ट्रपति चुनाव में इस समय रेस में मुर्मू काफी आगे चल रही हैं. हालांकि एनडीए के पास अभी बहुमत नहीं है. उधर, महाराष्ट्र में गड़बड़ाए सियासी गणित के चलते विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा की संभावनाएं लगातार कमजोर हो रही हैं. पूरी समाचार पढ़ें.

खुद अपना बजट भी नहीं बना सकता पाकिस्तान, IMF ही सब तैयार करा रहा; शहबाज शरीफ की मंत्री ने कबूला सच
पड़ोसी देश पाक की आर्थिक हालत बहुत खराब हो गई है और इसका असर उसकी संप्रभुता पर भी पड़ने लगा है. यहां तक कि अब वह अपना बजट तक अपनी मर्जी से तैयार नहीं कर सकता है. शहबाज शरीफ गवर्नमेंट की मंत्री शेरी रहमान ने यह बात कही है. उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान खान की गवर्नमेंट ने ऐसे निर्णय लिए थे कि पाक दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया. अब उसके उसके पास बजट तैयार करने में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की शर्तों को स्वीकार करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा है. पाक की नेशनल असेंबली में बजट को लेकर चर्चा के दौरान उन्होंने यह बात कही. पूरी समाचार पढ़ें.

ED ने सोनिया गांधी को जुलाई के अंतिम में पेश होने के लिए कहा
नेशनल हेराल्ड मुकदमा के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मुद्दे की जांच कर रहा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी जुलाई महीने के अंतिम में किसी भी समय पेश होकर अपना बयान दर्ज कराने को बोला है. सोनिया गांधी ने अपनी खराब स्वास्थ्य की वजह से प्रवर्तन निदेशालय से आग्रह किया था कि उनकी पेशी की तारीख कुछ हफ्ते के लिए आगे बढ़ा दी जाए. प्रवर्तन निदेशालय ने उनके इस आग्रह को स्वीकार कर लिया. कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को आज यानी 23 जून को पेश होना था.  पूरी समाचार पढ़ें.


भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन को देख क्या बोलेंगे आप

भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन को देख क्या बोलेंगे आप

Indias Last Railway Station: भारत का रेल इंफ्रास्ट्रक्चर अंग्रेजों के जमाने का है यहां आज भी कुछ नियम ऐसे हैं जो लंबे समय से चले आ रहे हैं ऐसे में ही यह रेलवे स्टेशन भी सबसे अनोखा है इसका नाम है सिंहाबाद रेलवे स्टेशन (Singhabad Railway Station), जो कि हिंदुस्तान का अंतिम रेलवे स्टेशन भी है 

आज भी अंग्रेजों के टाइम जैसा है ये स्टेशन

इस रेलवे स्टेशन की विशेषता यह है कि यह आज भी वैसा ही है, जैसा अंग्रेज छोड़कर गए थे यहां स्टेशन में हर चीज टिकट से लेकर गियर और रेलवे बैरियर तक अंग्रेजों के जमाने के हैं यहां पिछले कई वर्षों से कोई यात्री ट्रेन नहीं रुकती ये पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के हबीबपुर क्षेत्र में है सिंहाबाद से लोग पैदल भी कुछ किलोमीटर दूर बांग्लादेश में घूमते हुए चले जाते हैं इसके बाद हिंदुस्तान का कोई और रेलवे स्टेशन नहीं है ये बहुत छोटा स्टेशन है जहां कोई चहल पहल और भीड़भाड़ नहीं दिखती 

मालगाड़ियों के लिए होता है इस्तेमाल 

आपको बता दें कि इस रेलवे स्टेशन का उपयोग मालगाडियों के ट्रांजिट के लिए किया जाता है सिंहाबाद स्टेशन के नाम पर छोटा सा स्टेशन ऑफिस दिखता है, इसके पास एक-दो रेलवे के क्वॉर्टर हैं इस स्टेशन पर कर्मचारी भी नाम मात्र के ही हैं यहां के रेलवे बोर्डों में इसके नाम के साथ लिखा है- हिंदुस्तान का आखिरी स्टेशन

1978 में इस रूट पर प्रारम्भ हुईं मालगाड़ियां

गौरतलब है कि वर्ष 1971 की लड़ाई के बाद जब बांग्लादेश बना तो भारत- बांग्लादेश के बीच यातायात प्रारम्भ करने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी 1978 में हिंदुस्तान और बांग्लादेश में एक समझौता हुआ, जिससे इस रुट पर माल गाड़ियां चलने लगीं ये हिंदुस्तान से बांग्लादेश आती और जाती थीं नवंबर 2011 में पुराने समझौते में संशोधन किया गया अब समझौते में नेपाल को भी शामिल कर लिया गया है यानी सिंहाबाद होकर नेपाल की ओर जाने वाली मालगाड़ियां भी चलने लगीं

नेपाल की ट्रेनें भी यहीं से गुजरती हैं

2011 के बाद से यहां से केवल बांग्लादेश ही नहीं बल्कि नेपाल की ओर जाने वाली ट्रेनें भी गुजरने लगीं गौरतलब है कि बांग्लादेश से नेपाल को काफी बड़े पैमाने पर खाद निर्यात होता है इन्हें लेकर जाने वाली मालगाड़ियों की खेप रोहनपुर-सिंहाबाद ट्रांजिट प्वॉइंट से निकलती है 

गांधी और सुभाष चंद बोस ने भी किया इस रूट का इस्तेमाल

ये स्टेशन कोलकाता से ढाका के बीच ट्रेन संपर्क के लिए उपयोग होता था वैसे यह स्टेशन आजादी से पहले का है, इसलिए इस रूट का उपयोग कई बार महात्मा गांधी और सुभाष चंद बोस ने ढाका जाने के लिए भी किया