सीएम पुष्कर धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मुलाकात

सीएम पुष्कर धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मुलाकात

चंपावत उपचुनाव में मिली रिकॉर्ड जीत के बाद उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी पहली बार दिल्ली दौरे पर हैं यहां वे पार्टी के अनेक बड़े नेताओं मुलाकात कर रहे हैं दिल्ली में उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की और उपचुनाव में मिली जीत पर आशीर्वाद लिया उसके अतिरिक्त उत्तराखंड के GST प्रतिपूर्ति , पिथौरागढ़ एयरपोर्ट, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मा एंड रिसर्च आदि मुद्दो को लेकर चर्चा हुई इसके अतिरिक्त सीएम 24 जून को एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के नामांकन में भी शामिल होंगे इसके साथ-साथ सीएम गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात करेंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी दोपहर 1 बजे पीएम आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और तकरीबन 1 घंटे तक उनकी पीएम से मुलाकात हुई मुलाकात में सीएम ने पीएम से चंपावत उपचुनाव में मिली जीत पर आशीर्वाद लिया और उनका धन्यवाद दिया मुलाकात के बाद सीएम ने बताया पीएम के आशीर्वाद से उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत मिली है इसी के लिए पीएम से मिल उनका आशीर्वाद लिया है इसके साथ ही टीएसडीसी इण्डिया लिमिटेड हिंदुस्तान गवर्नमेंट का उपक्रम उत्तराखंड में है उसमें 75 फीसदी और 25 फीसदी की अंशधारिता है इसी आधार पर परसेंटेज राज्य को भी मिले इसको लेकर मांग की गई साथ ही GST कंपनसेशन के रूप में लगभग 5 हजार करोड़ उत्तराखंड को मिलता है उसे जारी रखा जाए

हरिद्वार के विस्तारीकरण को लेकर भी मांग
वहीं मुख्यमंत्री धामी ने पीएम से मांग की कि उत्तराखंड में बहुत सी फार्मा कंपनियां हैं इसलिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मा एजुकेशन और रिसर्च इंस्टीट्यूट बनना चाहिए साथ ही पिथौरागढ़ में शीघ्र से शीघ्र हवाई सेवाएं शीघ्र से प्रारम्भ करने के लिए पीएम से निवेदन किया कुंभ नगरी हरिद्वार का विस्तारीकरण मास्टर प्लान के अनुसार हो इसका निवेदन पीएम से किया वहीं चारधाम की तरह ही कुमाऊ मंडल मानस माला परियोजना बनाने को भी आग्रह किया गया साथ ही अलकनंदा पर बाबला नंदप्रयाग परियोजना को जल्द प्रारम्भ करने की भी मांग की गई इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने करप्ट ऑफिसरों को लेकर भी अपने कठोर रुख को साफ कर दिया उन्होंने आईएएस रामविलास यादव की गिरफ्तारी को लेकर बोला कि करप्शन पर गवर्नमेंट की जीरो टॉलरेंस नीति है और जो भी गलत करेगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा


भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन को देख क्या बोलेंगे आप

भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन को देख क्या बोलेंगे आप

Indias Last Railway Station: भारत का रेल इंफ्रास्ट्रक्चर अंग्रेजों के जमाने का है यहां आज भी कुछ नियम ऐसे हैं जो लंबे समय से चले आ रहे हैं ऐसे में ही यह रेलवे स्टेशन भी सबसे अनोखा है इसका नाम है सिंहाबाद रेलवे स्टेशन (Singhabad Railway Station), जो कि हिंदुस्तान का अंतिम रेलवे स्टेशन भी है 

आज भी अंग्रेजों के टाइम जैसा है ये स्टेशन

इस रेलवे स्टेशन की विशेषता यह है कि यह आज भी वैसा ही है, जैसा अंग्रेज छोड़कर गए थे यहां स्टेशन में हर चीज टिकट से लेकर गियर और रेलवे बैरियर तक अंग्रेजों के जमाने के हैं यहां पिछले कई वर्षों से कोई यात्री ट्रेन नहीं रुकती ये पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के हबीबपुर क्षेत्र में है सिंहाबाद से लोग पैदल भी कुछ किलोमीटर दूर बांग्लादेश में घूमते हुए चले जाते हैं इसके बाद हिंदुस्तान का कोई और रेलवे स्टेशन नहीं है ये बहुत छोटा स्टेशन है जहां कोई चहल पहल और भीड़भाड़ नहीं दिखती 

मालगाड़ियों के लिए होता है इस्तेमाल 

आपको बता दें कि इस रेलवे स्टेशन का उपयोग मालगाडियों के ट्रांजिट के लिए किया जाता है सिंहाबाद स्टेशन के नाम पर छोटा सा स्टेशन ऑफिस दिखता है, इसके पास एक-दो रेलवे के क्वॉर्टर हैं इस स्टेशन पर कर्मचारी भी नाम मात्र के ही हैं यहां के रेलवे बोर्डों में इसके नाम के साथ लिखा है- हिंदुस्तान का आखिरी स्टेशन

1978 में इस रूट पर प्रारम्भ हुईं मालगाड़ियां

गौरतलब है कि वर्ष 1971 की लड़ाई के बाद जब बांग्लादेश बना तो भारत- बांग्लादेश के बीच यातायात प्रारम्भ करने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी 1978 में हिंदुस्तान और बांग्लादेश में एक समझौता हुआ, जिससे इस रुट पर माल गाड़ियां चलने लगीं ये हिंदुस्तान से बांग्लादेश आती और जाती थीं नवंबर 2011 में पुराने समझौते में संशोधन किया गया अब समझौते में नेपाल को भी शामिल कर लिया गया है यानी सिंहाबाद होकर नेपाल की ओर जाने वाली मालगाड़ियां भी चलने लगीं

नेपाल की ट्रेनें भी यहीं से गुजरती हैं

2011 के बाद से यहां से केवल बांग्लादेश ही नहीं बल्कि नेपाल की ओर जाने वाली ट्रेनें भी गुजरने लगीं गौरतलब है कि बांग्लादेश से नेपाल को काफी बड़े पैमाने पर खाद निर्यात होता है इन्हें लेकर जाने वाली मालगाड़ियों की खेप रोहनपुर-सिंहाबाद ट्रांजिट प्वॉइंट से निकलती है 

गांधी और सुभाष चंद बोस ने भी किया इस रूट का इस्तेमाल

ये स्टेशन कोलकाता से ढाका के बीच ट्रेन संपर्क के लिए उपयोग होता था वैसे यह स्टेशन आजादी से पहले का है, इसलिए इस रूट का उपयोग कई बार महात्मा गांधी और सुभाष चंद बोस ने ढाका जाने के लिए भी किया