वर्षाजनित बीमारियों के लिए योगी सरकार ने कसी कमर

वर्षाजनित बीमारियों के लिए योगी सरकार ने कसी कमर

इंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और कालाजार (काला ज्वर) जैसी संक्रामक रोंगों के विरूद्ध यूपी में 1 जुलाई से बड़ा अभियान प्रारम्भ होने वाला है. इसमें स्‍वास्‍थ्‍य महकमे के साथ ही कई अन्‍य सम्‍बन्धित विभाग अपना सहयोग देंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने गुरुवार को टीम-9 के साथ मीटिंग के बाद इस संबंध में विस्‍तृत रूप से कार्ययोजना सामने रखी. उन्‍होंने बोला कि सभी विभागों को मिलकर इस अभियान को सफल बनाना होगा. 

सीएम योगी ने बताया कि पहले राज्य के 38 जिलों तक अभियान सीमित था, मगर राज्य के विभिन्न हिस्‍सों में भिन्न-भिन्न रोंगों के कहर के मद्देनज़र पूरे राज्य को इसमें शामिल कर लिया गया है. उन्‍होंने बोला है कि इंसेफेलाइटिस के लिहाज से कुशीनगर से सहारनपुर तक, डेंगू के लिहाज से मथुरा-फिरोजाबाद-आगरा-कानपुर-लखनऊ, मलेरिया के लिहाज से बरेली और आसपास, कालाजार के लिहाज से वाराणसी और आसपास के जनपद और चिकन गुनिया के लिहाज से बुंदेलखंड संवेदनशील क्षेत्र है.

किसी न किसी रूप में पूरा राज्य कम या अधिक रूप में इन रोंगों से प्रभावित है. रोग बढ़ती तब है जब हम कम की अनदेखी और ढिलाई करते हैं. इसीलिए हमने निर्णय लिया है कि पूरे राज्य में अभियान चलना चाहिए. उन्‍होंने बोला कि पहली जुलाई से प्रत्येक जिला, तहसील, ब्‍लॉक मुख्‍यालय पर, हर नगर निकाय, हर सार्वजनिक स्थल जैसे हॉस्पिटल आदि पर सूचना विभाग, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के साथ मिलकर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाएगा.


भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन को देख क्या बोलेंगे आप

भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन को देख क्या बोलेंगे आप

Indias Last Railway Station: भारत का रेल इंफ्रास्ट्रक्चर अंग्रेजों के जमाने का है यहां आज भी कुछ नियम ऐसे हैं जो लंबे समय से चले आ रहे हैं ऐसे में ही यह रेलवे स्टेशन भी सबसे अनोखा है इसका नाम है सिंहाबाद रेलवे स्टेशन (Singhabad Railway Station), जो कि हिंदुस्तान का अंतिम रेलवे स्टेशन भी है 

आज भी अंग्रेजों के टाइम जैसा है ये स्टेशन

इस रेलवे स्टेशन की विशेषता यह है कि यह आज भी वैसा ही है, जैसा अंग्रेज छोड़कर गए थे यहां स्टेशन में हर चीज टिकट से लेकर गियर और रेलवे बैरियर तक अंग्रेजों के जमाने के हैं यहां पिछले कई वर्षों से कोई यात्री ट्रेन नहीं रुकती ये पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के हबीबपुर क्षेत्र में है सिंहाबाद से लोग पैदल भी कुछ किलोमीटर दूर बांग्लादेश में घूमते हुए चले जाते हैं इसके बाद हिंदुस्तान का कोई और रेलवे स्टेशन नहीं है ये बहुत छोटा स्टेशन है जहां कोई चहल पहल और भीड़भाड़ नहीं दिखती 

मालगाड़ियों के लिए होता है इस्तेमाल 

आपको बता दें कि इस रेलवे स्टेशन का उपयोग मालगाडियों के ट्रांजिट के लिए किया जाता है सिंहाबाद स्टेशन के नाम पर छोटा सा स्टेशन ऑफिस दिखता है, इसके पास एक-दो रेलवे के क्वॉर्टर हैं इस स्टेशन पर कर्मचारी भी नाम मात्र के ही हैं यहां के रेलवे बोर्डों में इसके नाम के साथ लिखा है- हिंदुस्तान का आखिरी स्टेशन

1978 में इस रूट पर प्रारम्भ हुईं मालगाड़ियां

गौरतलब है कि वर्ष 1971 की लड़ाई के बाद जब बांग्लादेश बना तो भारत- बांग्लादेश के बीच यातायात प्रारम्भ करने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी 1978 में हिंदुस्तान और बांग्लादेश में एक समझौता हुआ, जिससे इस रुट पर माल गाड़ियां चलने लगीं ये हिंदुस्तान से बांग्लादेश आती और जाती थीं नवंबर 2011 में पुराने समझौते में संशोधन किया गया अब समझौते में नेपाल को भी शामिल कर लिया गया है यानी सिंहाबाद होकर नेपाल की ओर जाने वाली मालगाड़ियां भी चलने लगीं

नेपाल की ट्रेनें भी यहीं से गुजरती हैं

2011 के बाद से यहां से केवल बांग्लादेश ही नहीं बल्कि नेपाल की ओर जाने वाली ट्रेनें भी गुजरने लगीं गौरतलब है कि बांग्लादेश से नेपाल को काफी बड़े पैमाने पर खाद निर्यात होता है इन्हें लेकर जाने वाली मालगाड़ियों की खेप रोहनपुर-सिंहाबाद ट्रांजिट प्वॉइंट से निकलती है 

गांधी और सुभाष चंद बोस ने भी किया इस रूट का इस्तेमाल

ये स्टेशन कोलकाता से ढाका के बीच ट्रेन संपर्क के लिए उपयोग होता था वैसे यह स्टेशन आजादी से पहले का है, इसलिए इस रूट का उपयोग कई बार महात्मा गांधी और सुभाष चंद बोस ने ढाका जाने के लिए भी किया