गंगा स्वच्छता का ये हाल! आचमन तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं है गंगाजल

गंगा स्वच्छता का ये हाल! आचमन तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं है गंगाजल

वाराणसी: गंगा स्वच्छता न सिर्फ बीजेपी सरकार बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है। केंद्र की मौजूदा सरकार गंगा सफाई को लेकर किस कदर गंभीर है, इसका पता इस बात से चलता है कि सरकार ने गंगा के लिए एक अलग विभाग ही बना दिया। साल 2014 से लेकर अब तक नमामि गंगे प्रोजेक्ट के ऊपर करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि पतित पावनी का पानी कितना निर्मल हुआ ? क्या गंगा का पानी स्वच्छता के मानक के करीब पहुंच चुका है ? इन सवालों का जवाब है नहीं !

आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा
बनारस के रहने वाले समाजसेवी और क्रांति फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल कुमार सिंह ने गंगा सफाई को लेकर एक आरटीआई दाखिल किया था। आरटीआई से मिली जानकारी हैरान करने वाली है। जानकारी के अनुसार 90 में से 73 जगहों पर गंगा का पानी तय मानकों से कहीं ज्यादा प्रदूषित है। गंगा सफाई पर नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के अंतर्गत 2014 से अभी तक 9259.92 करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये हैं, लेकिन गंगा की स्थिति मे कोई सुधार नहीं आया है।

इसमें उत्तर प्रदेश मे सबसे ज्यादा 2628.73 करोड़ रुपये, बिहार मे 2490.98 करोड़ रुपये तथा पश्चिम बंगाल मे 926.40 करोड़ रुपये गंगा सफाई पर खर्च कर दिये गये। राहुल कुमार सिंह के अनुसार गंगा सफाई पर इतने रूपये खर्च करने के बावजूद गंगा के रास्ते मे स्थापित 90 मानिटरिंग केंद्रों मे 73 स्थानों पर गंगा का पानी तय मानकों से कहीं ज्यादा प्रदूषित है।

आचमन तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं है गंगाजल
गंगा के पानी के प्रदूषण की जांच हेतु लाईव मानिटरिंग करने के लिए बनायी गयी वेबसाईट पर कोई भी व्यक्ति 125.19.52.219/wqi लिंक पर जाकर देख सकता है कि गंगा के पानी मे विभिन्न मानिटरिंग केंद्रों पर गंगा के पानी मे प्रदूषण की स्थिति कैसी है। राहुल कुमार सिंह के अनुसार लाईव मानिटरिंग वेबसाईट के अनुसार गंगोत्री से निकलने के पश्चात हरिद्वार के बाद गंगा मे प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर होती चली गयी है।

अगर कालीफार्म की स्थिति की बात की जाये तो भारत सरकार के तय मानकों के अनुसार पीने के पानी मे कालीफार्म की संख्या 50 एमपीएन प्रति 100 मिली से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा नहाने के लिए अधिकतम कालीफार्म 500 एमपीएन प्रति 100 मिली निर्धारित है। पीने के पानी मे अधिकतम कालीफार्म 5000 एमपीएन प्रति 100 मिली हो तो शुद्धिकरण करने के पश्चात पानी को पीया जा सकता है।

 घुली हुई आक्सीजन की मात्रा मानकों के अनुरूप नहीं
अब अगर गंगा के पानी पर नजर डाली जाये तो उत्तर प्रदेश के कानपुर के शुक्लागंज मे कालीफार्म 26000, मिर्जापुर मे 23000, वाराणसी मे 17000, गोलाघाट गाजीपुर मे 22000, सारण मे 92000, पटना मे 92000, भागलपुर मे 160000 तथा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद मे 23000 तथा हावड़ा मे बढ़कर 170000 एमपीएन प्रति 100 मिली हो गयी है जो कि तय मानकों से कहीं ज्यादा है। इनमे से ज्यादातर केंद्रों पर घुली हुई आक्सीजन की मात्रा तथा बी ओ डी(बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड) की मात्रा भी तय मानकों के अनुरूप नहीं है।


8 वर्ष के बच्चे के साथ सौतेली मां ने की बर्बरता, शरीर पर मिले गहरे घाव

8 वर्ष के बच्चे के साथ सौतेली मां ने की बर्बरता, शरीर पर मिले गहरे घाव

दिल्ली के हरिनगर इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. एक 8 वर्ष के बच्चे को उसकी सौतेली मां द्वारा बहुत बुरी तरह से मारा पीटा जा रहा था. बच्चे की चीखें सुन मंगलवार को पड़ोस के लोगों ने दिल्ली महिला आयोग (DCW) के हेल्पलाइन नंबर पर इसकी सूचना दी. अयोग ने मौके पर पहुंचकर बच्चे को बचाया.

आयोग ने हेल्पलाइन नंबर 181 पर आई कॉल के तुरंत बाद टीम गठित की जो की मौके पर पहुंची. शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने कई बार इसकी कम्पलेन पुलिस को भी की थी, लेकिन पुलिस द्वारा इसे घर का केस बताकर कोई कार्रवाई नहीं की गई. शिकायतकर्ता ने अपने फोन में एक वीडियो भी दिखाई जिसमें बच्चा चीखता हुआ दिखाई और सुनाई दे रहा है और उसे पीटने की भी आवाजें सुनाई दे रही हैं. इतना ही नहीं, टीम जिस समय मौके पर पहुंची उस समय भी घर से बच्चे के रोने और चीखने की आवाजें सुनाई दे रही थीं. आयोग ने पुलिस को फोन कर पीसीआर वैन को बुलाया और बच्चे को घर से सुरक्षित बाहर निकाला. इसके बाद बच्चे और उसकी सौतेली मां को हरिनगर पुलिस थाने ले जाया गया.

बच्चे की काउंसलिंग की गई

पुलिस थाने ले जाकर बच्चे की काउंसलिंग की गई. बच्चा बहुत डरा हुआ था और कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं था, हालांकि काउंसलिंग के बाद बच्चे ने अपनी आपबीती बताई. बच्चे ने बताया कि उसके साथ रोज उसकी सौतेली मां द्वारा हाथापाई की जाती थी, कई बार उसे खाना नहीं दिया जाता था और ना ही उसे घर से बाहर निकलने दिया जाता था. बच्चे ने बताया कि जब मां बाहर जाती थी तो उसे रस्सी से बांधकर जाती थी. आयोग के बताया कि बच्चे के हाथ पर जख्मों के निशान उसके साथ हुई बर्बरता की कहानी साफ दर्शाते हैं. उसके हाथ पर कंघी से हमला करने के भी निशान हैं, जिसकी वजह से हाथ में छोटे गहरे घाव हो गए हैं. उसके पूरे हाथ सूजे हुए हैं. पीठ पर नोंचने के निशान हैं. सिर में अमानवीय चोटें हैं और पूरे शरीर पर गंभीर जख्म हैं. अच्छी तरह से खाना न मिलने के कारण बच्चा निर्बल भी हो गया है.

बच्चे को मेडिकल जाँच के बाद पिता को सौंपा गया

बच्चे के बयान के आधार पर इस मुद्दे में हरिनगर पुलिस थाने में कम्पलेन दर्ज कराई गई है. बच्चे को मेडिकल जाँच के लिए ले जाया गया. जाँच के बाद बच्चे को आश्रयगृह ले जाया गया और उसके बाद बुधवार को उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश किया गया. कमेटी ने बच्चे के पिता को बुलवाया, पिता ने बताया कि ये उसकी दूसरी विवाह है और लॉकडाउन के बाद से ही वो मुंबई में रह रहा था और उसका बच्चा दिल्ली में उसकी पत्नी के साथ रह रहा था. कमेटी के समक्ष बच्चे के पिता ने लिखित आश्वासन दिया कि वो बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखेगा और बच्चा मैंगलोर में अपने दादा दादी के पास रहेगा. इसके चलते कमेटी ने बच्चे को उसके पिता को सौंप दिया है.

स्वाति मालीवाल ने अफसोस जताया

इस मुद्दे का संज्ञान लेते हुए DCW अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को पत्र लिखकर अफसोस जताया है. उन्होंने बोला कि न तो अब तक सौतेली मां के विरूद्ध एफआईआर दर्ज हुई है और उल्टा बिना जांच-पड़ताल बच्चे को उसके पिता को सौंप दिया गया है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि बच्चा अपनी दादी के साथ रहना चाहता है पर उसे उसके पिता के साथ बिना किसी जांच-पड़ताल के जाने देना कितना ठीक होगा, जबकि पिता ने भी बच्चे की सुध नहीं ली. उन्होंने कमेटी से निवेदन करते हुए लिखा है कि मुद्दे में सौतेली मां के विरूद्ध एफआईआर कराएं और ये सुनिश्चित किया जाए की बच्चा सुरक्षित उसकी दादी के पास मैंगलोर पहुंच जाए.

स्वाति मालीवाल ने बोला कि ये मामला बहुत अधिक संगीन और डराने वाला है. आयोग ने अपने काम क्षेत्र से बाहर जाते हुए छोटे बच्चे को बचाया. नन्हें से मासूम के साथ इस प्रकार की हाथापाई और दुर्व्यवहार पूरी मानवता को शर्मसार करता है. इतने गंभीर मुद्दे में भी एफआईआर दर्ज न होना बहुत ही दुखद है. आयोग ने बोला कि पुलिस को नोटिस भेज रहे हैं.


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