कहीं आप तो ज्यादा समय तक नहीं रोकती हैं पेशाब, हो सकती है ये खतरनाक दिक्कत

कहीं आप तो ज्यादा समय तक नहीं रोकती हैं पेशाब, हो सकती है ये खतरनाक दिक्कत

आजकल गर्मी का मौसम चल रहा है ऐसे प्यास ज्यादा लगती है और हम पानी भी अधिक मात्रा में पीते है। जिसकी वजह से यूरिन भी अधिक मात्रा में आता है। ऑफिस में काम-काज करते समय कई लोग इतने व्यस्त हो जाते हैं कि वे घंटों तक यूरिन को रोक कर रखने लगते हैं। इससे गंभीर समस्या हो सकती है।

पेशाब रोकने से होने वाली परेशानी:

यूरिन में यूरिया और अमिनो एसिड जैसे पदार्थ होते हैं जो शरीर से बाहर निकलने जरूरी होते हैं। जब अधिक देर तक पेशाब को रोक कर रखते हैं तो ये विषैले पदार्थ किडनी में पहुंच कर पत्थरी की समस्या पैदा कर देते हैं।

लंबे समय तक यूरिन रोकने से ब्लैडर में बैक्टीरिया इकट्ठे हो जाते हैं जिससे इंफैक्शन की समस्या हो जाती है। जो एक बड़ी मुसीबत बन सकती है। 

इस वजह से ब्लैडर में सूजन आ जाती है तो ऐसे में हर बार पेशाब करते समय तेज दर्द होने लगता है। यह कोई बीमारी का कारण भी बन सकता है। 

पेशाब को ज्यादा देर तक रोकने की वजह से किडनी पर दबाव पड़ता है जिससे किडनी खराब होने का खतरा रहता है।


जीवन में पाना चाहते हैं खुशी, तो इस प्रेरक कथा में है इसका मंत्र

जीवन में पाना चाहते हैं खुशी, तो इस प्रेरक कथा में है इसका मंत्र

हर व्यक्ति चाहता है कि उसका और उसके परिवार का जीवन खुशहाल रहे। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत करता है, रुपये, धन-दौलत कमाता है। जीवन में सबकुछ हासिल कर लेता है, कामयाब हो जाता है, लेकिन वह खुशहाल नहीं होता। उसके लिए अब भी वही सवाल रहता है कि वह खुशहाल कैसे हो? जीवन में खुशहाल होने का बहुत ही सीधा और सरल सा मंत्र है। आप भी जानना चाहते हैं उस मंत्र के बारे में, तो पढ़ें यह प्रेरक कथा।

एक गुरु ने अपने सभी शिष्यों के लिए फल मंगाए। हर एक के हिस्से के फल एक गत्ते के डिब्बे में रखे और हर डिब्बे पर एक शिष्य का नाम लिख दिया। सभी शिष्यों के फलों के डिब्बे तैयार हो गए। अब उन्होंने शिष्यों से कहा-तुम्हारे लिए फल कुटिया के अंदर रखे हैं। सभी लोग अंदर जाकर अपना नाम लिखा डिब्बा ले लो।

सभी शिष्य कुटिया के अंदर दौड़ पड़े। उत्साह में एक-दूसरे पर ही गिरने लगे। कोई अपने नाम का डिब्बा नहीं खोज पाया क्योंकि अव्यवस्था फैल गई थी। यह देखकर गुरु जी ने शिष्यों को वापस बुलाया और कहा- तुम लोग एक-एक करके कुटिया में जाओ और जो भी एक डिब्बा हाथ लगे, उठाकर ले आओ और उस पर जिस शिष्य का नाम लिखा हो, उसे दे दो।


ऐसा करने से दो मिनट में ही हर शिष्य के हाथ में उसका नाम लिखा फलों का डिब्बा था। अब गुरु जी ने समझाते हुए कहा, 'जैसे फलों का डिब्बा तुम लोग पहले खोज रहे थे, उसी तरह जीवन में लोग खुशियां खोज रहे होते हैं, लेकिन वह इस तरह नहीं मिलती। जब आप दूसरों को खुशियां देने लगेंगे, तो आपको अपनी खुशी अपने आप मिल जाएगी।

कथा का सार

असली खुशी कुछ पाने से नहीं, बल्कि देने से मिलती है। आप खुश होना चाहते हैं तो लोगों को खुशियां दीजिए, वहीं से आपको असली खुशी मिलेगी।