जब सूर्यदेव घोड़ों की जगह गधों को जोड़ते हैं अपने रथ से, पढ़ें खरमास की पौराणिक कथा

जब सूर्यदेव घोड़ों की जगह गधों को जोड़ते हैं अपने रथ से, पढ़ें खरमास की पौराणिक कथा

आज से खरमास शुरू हो रहा है। खरमास को मलमास भी कहा जाता है। इस दौरान कई मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। खरमास को लेकर एक पौराणिक कथा बताई गई है जिसकी जानकारी हम आपको यहां दे रहे हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान सूर्यदेव ब्रह्मांड की परिक्रमा अपने 7 घोड़ों के रथ पर सवार होकर करते हैं। सूर्यदेव को कहीं भी रुकने की अनुमति नहीं है। अगर सूर्यदेव रुक जाते हैं तो माना जाता है कि जनजीवन भी रुक जाता है या ठहर जाता है। लेकिन उनके रथ के घोड़े लगातार चलते रहने से थक जाते हैं। वे भूख-प्यास से ग्रस्त और विश्राम न मिलने के चलते काफी थक जाते हैं। जब सूर्यदेव अपने घोड़ों की यह दयनीय स्थिति को देखते हैं तो उनका मन द्रवित हो उठता है।

तब सूर्यदेव उन्हें एक तालाब किनारे ले जाते हैं। जैसे ही वो किनारे पहुंचते हैं तो उन्हें यह आभास होता है कि अगर उनका रख रुका तो अनर्थ हो सकता है। लेकिन घोड़ों का सौभाग्य यह था कि तालाब के किनारे दो खर मौजूद थे।


तब सूर्यदेव घोड़ों को विश्राम करने के लिए वहीं छोड़ देते हैं और अपने साथ खर यानी गधों को रथ में जोड़कर परिक्रमा करने शुरू कर देते हैं। लेकिन गधे और घोड़े की गति में बहुत अंतर होता है। गधों को रथ के साथ बांधने के चलते रथ की गति धीमी हो जाती है। फिर भी जैसे-तैसे सूर्यदेव 1 मास का चक्र पूरा करते हैं। तब तक घोड़ों को भी विश्राम मिल चुका होता है। यह क्रम इसी तरह चलता है। हर सौरवर्ष में 11 सौरमास को खरमास कहा जाता है।  


कब है सोमवती अमावस्या, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

कब है सोमवती अमावस्या, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा व अमावस्या का महत्व बेहद विशेष माना गया है। हर माह के कृष्ण पक्ष की आखिरी तारीख को अमावस्या आती है। चैत्र माह की अमावस्या 12 अप्रैल को है। इस दिन सोमवार है इसलिए इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि वर्ष 2021 में केवल एक ही सोमवती अमावस्या पड़ रही है। इस दिन दान का महत्व भी अत्याधिक होता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से व्यक्ति के घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं क्या है सोमवती अमावस्या की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।

सोमवती अमावस्या शुभ मुहूर्त:

चैत्र मास, कृष्ण पक्ष, अमावस्या

12 अप्रैल 2021, सोमवार

अमावस्या तिथि प्रारम्भ- 11 अप्रैल 2021, रविवार, सुबह 06 बजकर 03 मिनट से

अमावस्या तिथि समाप्त- 12 अप्रैल 2021, सोमवार, सुबह 8 बजे तक


सोमवती अमावस्या का महत्व:

सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। साथ ही इस दिन पितरों का तर्पण भी किया जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन दान करने से घर में सुख-शांति व खुशहाली आती है। अमावस्या का दिन, हिंदू परंपरा में बहुत महत्व रखता है। अमावस्या का दिन सबसे शुभ माना जाता है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या के रूप में जाना जाता है और इसका एक विशेष महत्व है। माना जाता है कि अगर इस अमावस्या पर कोई उपवास करता है तो सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं।


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