इन कपल्स में हमेशा रहती है आपसी दुश्मनी, नहीं संभाल पाते प्यार

इन कपल्स में हमेशा रहती है आपसी दुश्मनी, नहीं संभाल पाते प्यार

शादी में वर वधु की कुंडली मिलाना बहुत जरूरी होता है। कुंडली मिलान के दौरान कुछ ऐसी बातों का ध्यान रखने से शादीशुदा जीवन को सुखी संपन्न होता है। कुंडली मिलान के दौरान गोत्र, मंगल दोष इत्यादि देखा जाता है। उसके साथ ही साथ यह भी देखा जाता है कि लड़के और लड़की की शादी के बाद पटेगी या नहीं जो कि उनकी राशि बयां कर देती है।

इन कपल्स में हमेशा रहती है दुश्मनी:

वृश्चिक और मीन राशि: वृश्चिक और मीन राशि के लोगों का भी शादीशुदा जीवन अच्छा नहीं रहता है। जहां एक ओर वृश्चिक राशि के जातक पजेसिव और कमांडिंग होते हैं , वहीं दूसरी ओर मीन राशि के लोग जनरस होते हैं। 

तुला और वृषभ राशि: तुला और वृषभ राशि के जातकों में प्यार तो बहुत होता है, लेकिन वो शुरुआत में। जब ये लोग शादी के बंधन में बंध जाते हैं तो रिश्तों को संभाल नहीं पाते हैं।

मकर और कुंभ राशि: इन दोनों ही राशियों के लोगों को आपस में शादी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि ये दोनों राशियां आपस समझ-बूझ के मामलों में मात खा जाती हैं। इन दोनों का स्वामी शनि है।

सिंह और कर्क राशि: सिंह और कर्क राशि के लोगों को भी आपस में शादी करने से बचना चाहिए। एक राशि का स्वामी सूर्य है और दूसरी राशि का स्वामी चंद्र है। ये राशियां आग और पानी की तरह होती हैं।

धनु और कर्क राशि: दोनों के पर्सनालिटी ट्रेट में काफी फर्क होता है। एक समय पर अगर एक इमोशनल है तो दूसरा प्रैक्टिकल होता है।

कन्या और मिथुन राशि: कन्या और मिथुन राशि के जातक दोनों ही रियलिस्टीक पर्सनालिटी वाले होते हैं। ये लोग इमोशनली काफी स्ट्रांग होते हैं। इन दोनों ही जातकों की शादीशुदा जिंदगी अच्छी नहीं रहती हैं।


बच्चे की कमजोर नजर का घर बैठे लगा सकेंगे पता, बस स्मार्ट फोन से लेनी होगी आंखों की तस्वीर

बच्चे की कमजोर नजर का घर बैठे लगा सकेंगे पता, बस स्मार्ट फोन से लेनी होगी आंखों की तस्वीर

अब नजर कमजोर होने पर बच्चों अस्पताल तक दौड़ लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्मार्ट फोन से आंखों की तस्वीर लेकर भी डॉक्टर आंखों की नजर संबंधी बीमारी का पता लगा सकेंगे। स्मार्ट फोन से आंखों की खींची गई फोटो कितनी कारगर है, इस पर केजीएमयू ने शोध शुरू किया है। शुरुआती जांच में करीब 20 फीसदी स्कूली बच्चों को आंखों से संबंधी परेशानी का पता चला है।

केजीएमयू नेत्र रोग विभाग काउंसिल ऑफ सांइस एंड टेक्नोलॉजी के प्रोजेक्ट के तहत शोध कर रहा है। स्मार्ट फोन फोटोग्राफी फॉर स्क्रीनिंग अक्यूलर मार्बिटी इन स्कूल चिल्ड्रन के नाम से प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। अब तक प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ के 50 सरकारी स्कूल के करीब 2500 बच्चों की आंखों की जांच की जा चुकी है। कक्षा तीन से आठ तक के छात्र-छात्राओं को शोध में शामिल किया गया है। इनकी उम्र छह से 12 साल है।

इलाज में देरी घातक
नेत्र रोग विभाग के डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल के मुताबिक कई बार छोटे बच्चे अक्षरों को पहचान नहीं पाते हैं। ऐसे में बीमारी की पहचान कठिन हो जाती है। नतीजतन समय पर नजर संबंधी बीमारी का पता नहीं चल पाता है। देरी से मर्ज की पहचान आंखों की सेहत के लिए घातक है। इससे बीमारी के गंभीर होने का खतरा बना रहता है।