अगर काम के दौरान थक गयी हैं आपकी आँखें तो ऐसे करें रिलैक्स

अगर काम के दौरान थक गयी हैं आपकी आँखें तो ऐसे करें रिलैक्स

अक्सर जब आंखों से ज्यादा काम लिया जाता है तो उसे अराम की जरूरत होती है। यह अक्सर नींद न पूरी होना या काम का प्रशेर अधिक होने से हमारी आंखे थकी-थकी लगने लगती है जिससे हमारे चेहरे की भी खुबशूरती पर भी असर अपड़ता है। तो चलिए आज हम आपसे कुछ ऐसे ही टिप्स के बारे में बता रहे हैं जिससे आप अपनी आंखों में चमक ला सकती हैं। 

अपनाएं ये टिप्स:

अगर आंखों में थकान महसूस हो रही है या फिर आंखे थकी-थकी सी लग रही है तो इसे छुपाने के लिए आप आईब्रो पेंसिल का इस्तेमाल कर सकती हैं इसके लिए आप अपनी आईब्रो को पेंसिल के साथ भरें।

खीरा भी ऐसे समय में काफी फायदेमंद होता है इसके इस्तेमाल के लिए आप खीरे को स्लाइस के रूप में काट लें इससे आंखों की थकान दूर की जा सकती हैं।

टी बैग्स का इस्तेमाल करके ठन्डे भी आँखों की थकान को कम किया जा सकता है। पानी से धोने से भी आँखों को आराम मिलता है और रिलैक्स महसूस करती है। 


जीवन में पाना चाहते हैं खुशी, तो इस प्रेरक कथा में है इसका मंत्र

जीवन में पाना चाहते हैं खुशी, तो इस प्रेरक कथा में है इसका मंत्र

हर व्यक्ति चाहता है कि उसका और उसके परिवार का जीवन खुशहाल रहे। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत करता है, रुपये, धन-दौलत कमाता है। जीवन में सबकुछ हासिल कर लेता है, कामयाब हो जाता है, लेकिन वह खुशहाल नहीं होता। उसके लिए अब भी वही सवाल रहता है कि वह खुशहाल कैसे हो? जीवन में खुशहाल होने का बहुत ही सीधा और सरल सा मंत्र है। आप भी जानना चाहते हैं उस मंत्र के बारे में, तो पढ़ें यह प्रेरक कथा।

एक गुरु ने अपने सभी शिष्यों के लिए फल मंगाए। हर एक के हिस्से के फल एक गत्ते के डिब्बे में रखे और हर डिब्बे पर एक शिष्य का नाम लिख दिया। सभी शिष्यों के फलों के डिब्बे तैयार हो गए। अब उन्होंने शिष्यों से कहा-तुम्हारे लिए फल कुटिया के अंदर रखे हैं। सभी लोग अंदर जाकर अपना नाम लिखा डिब्बा ले लो।

सभी शिष्य कुटिया के अंदर दौड़ पड़े। उत्साह में एक-दूसरे पर ही गिरने लगे। कोई अपने नाम का डिब्बा नहीं खोज पाया क्योंकि अव्यवस्था फैल गई थी। यह देखकर गुरु जी ने शिष्यों को वापस बुलाया और कहा- तुम लोग एक-एक करके कुटिया में जाओ और जो भी एक डिब्बा हाथ लगे, उठाकर ले आओ और उस पर जिस शिष्य का नाम लिखा हो, उसे दे दो।


ऐसा करने से दो मिनट में ही हर शिष्य के हाथ में उसका नाम लिखा फलों का डिब्बा था। अब गुरु जी ने समझाते हुए कहा, 'जैसे फलों का डिब्बा तुम लोग पहले खोज रहे थे, उसी तरह जीवन में लोग खुशियां खोज रहे होते हैं, लेकिन वह इस तरह नहीं मिलती। जब आप दूसरों को खुशियां देने लगेंगे, तो आपको अपनी खुशी अपने आप मिल जाएगी।

कथा का सार

असली खुशी कुछ पाने से नहीं, बल्कि देने से मिलती है। आप खुश होना चाहते हैं तो लोगों को खुशियां दीजिए, वहीं से आपको असली खुशी मिलेगी।