अगर आप भी जीवन में अकेलापन महसूस करते है तो अपनाए ये खास टिप्स

अगर आप भी जीवन में अकेलापन महसूस करते है तो अपनाए ये खास टिप्स

हर इंसान का हर समय कोई साथ नहीं होता है। दुनिया में हर इन्सान कभी न कभी जब अपने बारे में और अपनी खुशियों की वजह के बारे में सोचता है तब वह अक्सर खुद को अकेले महसूस करता है और तब आपको लगता है इन सब में अपने अपनी जीवन के कुछ पल और कुछ लम्हे हमेशा के लिए खो दिए है। अगर ऐसा है या किसी और वजह से भी अकेलापन आपको फील हो रहा है तो आप कुछ नीचे दिए गये टिप्स को फॉलो कर सकते है।

अकेलापन दूर करने के लिए फॉलो करें ये टिप्स

अगर अकेलापन महसूस कर रहे हैं तो आप अपनी आस-पास रहने वाले लोगो की मदद कर सकते हैं या कहें कि बड़े बुजूर्गो की मदद कर सकते हैं या उनकी सेवा करते हैं तो आपको आध्यात्मिक शांति मिलती है। 


अपनी जिंदगी में दोस्त बनाएं। यह अकेलापन दूर करने का सबसे आसान तरीका है कि हम अपने जीवन में कुछ दोस्त बनाएं क्योंकि फ्रेंड हमारी जिंदगी होते हैं। यह जीवन में हर मुसीबत के समय साथ होते है। 

अगर आप अकेलापन महसूस कर रहे हैं तो अपने मन की बात को अपनी डायरी में लिख सकते हैं क्योंकि कहते हैं कि इंसान खुद को सबसे बेहतर समझ सकता है। इसलिए लिखने की आदत डालें। 

जीवन में खुश रहने से भी अकेलापन दूर होता है। जैसे पकृति में समय बिताना हर इन्सान को अच्छा लगता है और छोटे बच्चो को हँसते हुए खेलते हुए देखना हमे हमारे बचपन की याद दिला देता है। 


जीवन में पाना चाहते हैं खुशी, तो इस प्रेरक कथा में है इसका मंत्र

जीवन में पाना चाहते हैं खुशी, तो इस प्रेरक कथा में है इसका मंत्र

हर व्यक्ति चाहता है कि उसका और उसके परिवार का जीवन खुशहाल रहे। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत करता है, रुपये, धन-दौलत कमाता है। जीवन में सबकुछ हासिल कर लेता है, कामयाब हो जाता है, लेकिन वह खुशहाल नहीं होता। उसके लिए अब भी वही सवाल रहता है कि वह खुशहाल कैसे हो? जीवन में खुशहाल होने का बहुत ही सीधा और सरल सा मंत्र है। आप भी जानना चाहते हैं उस मंत्र के बारे में, तो पढ़ें यह प्रेरक कथा।

एक गुरु ने अपने सभी शिष्यों के लिए फल मंगाए। हर एक के हिस्से के फल एक गत्ते के डिब्बे में रखे और हर डिब्बे पर एक शिष्य का नाम लिख दिया। सभी शिष्यों के फलों के डिब्बे तैयार हो गए। अब उन्होंने शिष्यों से कहा-तुम्हारे लिए फल कुटिया के अंदर रखे हैं। सभी लोग अंदर जाकर अपना नाम लिखा डिब्बा ले लो।

सभी शिष्य कुटिया के अंदर दौड़ पड़े। उत्साह में एक-दूसरे पर ही गिरने लगे। कोई अपने नाम का डिब्बा नहीं खोज पाया क्योंकि अव्यवस्था फैल गई थी। यह देखकर गुरु जी ने शिष्यों को वापस बुलाया और कहा- तुम लोग एक-एक करके कुटिया में जाओ और जो भी एक डिब्बा हाथ लगे, उठाकर ले आओ और उस पर जिस शिष्य का नाम लिखा हो, उसे दे दो।


ऐसा करने से दो मिनट में ही हर शिष्य के हाथ में उसका नाम लिखा फलों का डिब्बा था। अब गुरु जी ने समझाते हुए कहा, 'जैसे फलों का डिब्बा तुम लोग पहले खोज रहे थे, उसी तरह जीवन में लोग खुशियां खोज रहे होते हैं, लेकिन वह इस तरह नहीं मिलती। जब आप दूसरों को खुशियां देने लगेंगे, तो आपको अपनी खुशी अपने आप मिल जाएगी।

कथा का सार

असली खुशी कुछ पाने से नहीं, बल्कि देने से मिलती है। आप खुश होना चाहते हैं तो लोगों को खुशियां दीजिए, वहीं से आपको असली खुशी मिलेगी।