पढ़ें दलदल में फंसे हाथी की कथा, जो देती है मनोबल मजबूत करने की प्रेरणा

पढ़ें दलदल में फंसे हाथी की कथा, जो देती है मनोबल मजबूत करने की प्रेरणा

हम सब चुनौतियों से पार पा लेने की क्षमता अपने अंदर चाहते हैं। कई लोग शारीरिक तौर पर बेहद कमजोर होते हैं, लेकिन वे अपने मजबूत मनोबल के दम पर कठिन से कठिन परिस्थितियों का मुकाबला सफलतापूर्वक करते हैं। कई लोग शारीरिक तौर पर मजबूत होते हुए भी परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं। परिस्थितियों से पार नहीं पाते, परिस्थितियां उन पर हावी हो जाती हैं। उनका मनोबल दुर्बल होता है। जागरण अध्यात्म में आज आप पढ़ें दलदल में फंसे एक हाथी की प्रेरक कथा।

मनोबल का परिणाम

एक राज्य के राजा के पास एक बड़ा ही पराक्रमी हाथी था। युद्धों में उस पर ही बैठकर राजा ने तमाम राज्यों पर विजय पाई थी और अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार किया था। उस हाथी को इस तरह प्रशिक्षण दिया गया था कि युद्ध में शत्रु पक्ष के सैनिकों को देखते ही वह उन पर टूट पड़ता और शत्रु अवाक रह जाते और पीछे हट जाते। एक तरह से कहें तो वह हाथी उस राजा के लिए युद्ध में तुरूप का इक्का था।


एक ऐसा भी समय आया, जब हाथी बूढ़ा हो गया। राजा ने युद्ध के लिए नए युवा हाथियों को प्रशिक्षण देकर तैयार कर लिया। वह उपेक्षित होकर रह गया। अब उस पर पहले की तरह ध्यान नहीं दिया जा रहा था। उसके पौष्टिक भोजन में भी कमी कर दी गई। वह अशक्त और दुर्बल दिखने लगा था। कई बार उसे अपनी इस हालत पर तरस भी आती थी, लेकिन वह बेचारा करे भी तो क्या करे, उसका शरीर अब साथ नहीं देता था।

एक बार वह हाथी पानी पीने तालाब में गया। वहां की दलदल में उसका पैर धंस गया। उसने निकलने की लाख कोशिश की, तो उसके शरीर ने साथ नहीं दिया। वह गरदन तक कीचड़ में समा गया। इतने बड़े हाथी को आखिर निकाला कैसे जाए? हाथी के बच जाने की संभावना किसी को नहीं थी। राजा को जब घटना की बात पता चली, तो वे दुखी हो गए।


उन्होंने एक चतुर सैनिक से सलाह मांगी, तो उसने कहा कि महाराज, इस हाथी को निकालने का एक ही तरीका है कि इसके पास युद्ध का माहौल तैयार किया जाए। युद्ध के वाद्ययंत्र मंगवाए गए, नगाड़े बजवाये गए और ऐसा माहौल बनाया गया कि शत्रुओं के सैनिक राज्य की ओर बढ़ रहे हैं। यह देखकर हाथी में अचानक फुर्ती और साहस आ गया। उसने जोर से चिंघाड़ लगाई और सैनिकों की ओर दौड़ने लगा। इसी प्रयास में वह बाहर आ गया। बड़ी मुश्किल से उस पर काबू किया जा सका।


कथा का सार: शारीरिक ताकत भी उसी का साथ देती है, जिसके पास मनोबल होता है। कई बार हम मानसिक तौर पर कुछ परिस्थितियां स्वयं बना लेते हैं। उससे बचना चाहिए।


कब है सोमवती अमावस्या, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

कब है सोमवती अमावस्या, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा व अमावस्या का महत्व बेहद विशेष माना गया है। हर माह के कृष्ण पक्ष की आखिरी तारीख को अमावस्या आती है। चैत्र माह की अमावस्या 12 अप्रैल को है। इस दिन सोमवार है इसलिए इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि वर्ष 2021 में केवल एक ही सोमवती अमावस्या पड़ रही है। इस दिन दान का महत्व भी अत्याधिक होता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से व्यक्ति के घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं क्या है सोमवती अमावस्या की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।

सोमवती अमावस्या शुभ मुहूर्त:

चैत्र मास, कृष्ण पक्ष, अमावस्या

12 अप्रैल 2021, सोमवार

अमावस्या तिथि प्रारम्भ- 11 अप्रैल 2021, रविवार, सुबह 06 बजकर 03 मिनट से

अमावस्या तिथि समाप्त- 12 अप्रैल 2021, सोमवार, सुबह 8 बजे तक


सोमवती अमावस्या का महत्व:

सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। साथ ही इस दिन पितरों का तर्पण भी किया जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन दान करने से घर में सुख-शांति व खुशहाली आती है। अमावस्या का दिन, हिंदू परंपरा में बहुत महत्व रखता है। अमावस्या का दिन सबसे शुभ माना जाता है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या के रूप में जाना जाता है और इसका एक विशेष महत्व है। माना जाता है कि अगर इस अमावस्या पर कोई उपवास करता है तो सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं।


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