आपकी तरक्की में बाधक हैं ये पौधे, घरों में कभी न लगाएं

आपकी तरक्की में बाधक हैं ये पौधे, घरों में कभी न लगाएं

सभी अपने घरों में भी पेड़-पौधे लगाना पसंद करते हैं ताकि घर का माहौल अच्छा रहें। हिंदू धर्म में पेड़-पौधों का विशेष महत्व हैं और इनका पूजन किया जाता हैं। लेकिन आप कौनसा पौधा लगा रहे हैं इसका भी ध्यान करना चाहिए क्योंकि कुछ पौधे ऐसे हैं जो अवनति का कारण बन सकते हैं। कुछ पौधे ऐसे हैं जिनपर श्रापित होने का कलंक हैं और इन्हें घर में लगाने से मां लक्ष्मी रुष्ठ जाती हैं। जानते हैं उन पौधों के बारे में जिन्हें घर में लगाने से बचना चाहिए।

तरक्की में बाधक

*घर में लोग साज सजावट के लिए बौनजाई पौधे लगाते हैं लेकिन इन्हें घर में रखना मतलब घर में नकारात्मकता का वास करवाना है क्योंकि इससे घर के किसी भी सदस्य की तरक्की नहीं होती। जैसे इस पौधों को बढ़ने से पहले ही काट कर बोना कर दिया जाता है वैसे ही यह घर के लोगों की तरक्की भी रोक देता है।

 शुभ होते हुए घर में लगाना अशुभ

*बांस का प्लांट घर में लगाना भले ही शुभ माना जाता है लेकिन यह पेड़ आपके घर के सामने नहीं होना चाहिए। घर में इसे उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है।

पैसा नहीं टिकता

*खजूर खाने में भले ही मीठी स्वादिष्ट हो, लेकिन इसका पेड़ जिनके घरों में होता हैं वह परेशानियों से घिरे रहते हैं। उस घर में पैसा नहीं टिकता और फिजूलखर्ची बढ़ी रहती है।

झगड़ा और विवाद

*धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो घर में कांटेदार पौधा लड़ाई झगड़ा और विवाद लेकर आता है। सदस्यों में अनबन रहती है। अगर आप कांटेदार पौधे लगाते भी हैं तो इन्हें घर के अंदर नहीं बाहर रखें क्योंकि इसका संबंध माता अलक्ष्मी से है।

*कुछ ऐसे पौधे जिनके फूलों व तनों से दूध निकलता है। ऐसे पौधों को घर में लगाने से बचे क्योंकि शास्त्रों व मान्यताओं के अनुसार इन पौधों पर श्रापित अप्सराएं वास करती हैं जो अपने साथ नकारात्मकता लेकर आती हैं ऐसे में ये पौधे घर में लगाने से घर की शांति भंग हो जाती हैं पति-पत्नी की आपस में नहीं बनती बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता। दूसरा कारण कुछ दूध वाले पौधे जहरीले होते हैं जो आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। घर में छोटे बच्चे हैं तो उनके लिए भी यह काफी नुकसान देह साबित हो सकता है।

विघ्नकारी पौधा

*घर के बाहर बेर का पौधा है तो इसे तुरंत हटवा लें क्योंकि वास्तुशास्त्र के अनुसार, इस पौधे पर सबसे ज्यादा नाकारत्मकता शक्तियां वास करती हैं। ऐसे पौधा पैसे की किल्लत , काम में विघ्न, सेहत की परेशानी साथ लेकर आता है।

मां लक्ष्मी को नहीं पसंद

*बबूल का पौधा भी कांटेदार हैं भले ही इस पौधे के बहुत सारे आयुर्वेदिक गुण होते हैं लेकिन इसका वास घर में नहीं होना चाहिए। दूसरा इसके कांटे बहुत बड़े होते हैं यह वृक्ष जल्दी फैल जाता है जो घर ना होकर बाहर खुले जगल में ही होना चाहिए। मां लक्ष्मी को सुगंधित फूलों वाले पौधे प्रिय हैं।

बीमारियों की वजह

*घर के सामने या घर में इमली का पौधा नहीं लगा होना चाहिए। माना जाता है कि यह भी घर की तरक्की रोकने व परिवारिक सदस्यों की बीमारियों की वजह बनते हैं।


आज है अंगारकी संकष्टी चतुर्थी, जानें तिथि, मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

आज है अंगारकी संकष्टी चतुर्थी, जानें तिथि, मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

हिन्दू कैलेंडर के अंतिम मास फाल्गुन मास का प्रारंभ हो गया है। इस माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को फाल्गुन संकष्टी गणेश चतुर्थी कहते हैं। फाल्गुन गणेश संकष्टी चतुर्थी इस वर्ष आज 02 मार्च दिन मंगलवार को है। इस दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा विधि विधान से की जाती है।  इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। पूजा में उनको दूर्वा अर्पित किया जाता है तथा मोदक का भोग लगाते हैं। पूजा के दौरान गणेश चतुर्थी व्रत की कथा भी सुनी जाती है। जागरण अध्यात्म में आज ​हम बता रहे हैं फाल्गुन गणेश चतुर्थी की तिथि, चंद्रोदय का समय और महत्व के बारे में बता रहे हैं।

फाल्गुन गणेश चतुर्थी 2021 मुहूर्त

हिन्दू कैलेंडर के फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 02 मार्च दिन मंगलवार को प्रात: 05 बजकर 46 मिनट पर हो रहा है। इसका समापन 03 मार्च दिन बुधवार को तड़के 02 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में चतुर्थी की पूजा और व्रत 02 मार्च को की जाएगी।


चंद्रोदय का समय

संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्र देव रात में 09 बजकर 41 मिनट पर उदित होंगे। गणेश चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन का महत्व होता है, इसलिए महिलाएं चंद्रमा के उदित होने की प्रतीक्षा करती हैं।

राहुकाल

संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा में राहुकाल का ध्यान रखा जाता है। इस दिन राहुकाल दोपहर 03 बजकर 27 मिनट से शाम को 04 बजकर 55 मिनट तक है।


गणेश चतुर्थी का महत्व

संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत संतान की सुरक्षा, उनकी लंबी आयु और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता है।

गणेश चतुर्थी का पंचांग

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:57 बजे तक।

अमृत काल: रात 09:38 बजे से देर रात 11:06 बजे तक।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:29 मिनट से दोपहर 03:16 बजे तक।

सूर्योदय: सुबह 06:45 बजे।


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