अमेरिका खिलाफ पर भारत और रूस आए इस मुद्दे पर चीन के साथ, ग्लोबल टाइम्स ने बांधे मोदी सरकार के तारीफों के पुल

अमेरिका खिलाफ पर भारत और रूस आए इस मुद्दे पर चीन के साथ, ग्लोबल टाइम्स ने बांधे मोदी सरकार के तारीफों के पुल

भारत-चीन तनावपूर्ण संबंधों के बीच 2022 में बीजिंग में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक और पैरा ओलंपिक में भारत ने समर्थन किया है। भारत की तरफ से विंटर ओलंपिक में चीन की मेजबानी का समर्थन किया है। जिसके बाद चीन के सरकारी भोंपू ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में भारत के समर्थन की खुलकर तारीफ की है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चीन से टेंशन के बावजूद भारत के समर्थन ने कई देशों को हैरान किया है। भले ही दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर टेंशन है लेकिन द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण नहीं हैं। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि भारत का व्यवहार इस बात का प्रतीक है कि वो अपनी मजबूत कूटनीतिक और रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार रखे हुए हैं। अमेरिका के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के बावजूज ऐसा नहीं है कि भारत सभी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में अमेरिका के प्रति ही झुकाव रखता है।

गौरतलब है कि चीन अगले साल होने वाले शीतकालीन ओलंपिक और पैरालंपिक्स की मेजबानी करने वाला है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लवरोफ और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ आभाषी बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ओलंपिक और पैरालंपिक्स खेलों के आयोजन में चीन का समर्थन किया है। इसको लेकर चीन काफी गदगद हो उठा है।

अमेरिका करेगा राजनयिक बहिष्कार

अमेरिका चीन के बीजिंग शहर में होने वाले ओलंपिक के राजनयिक बहिष्कार पर विचार कर रहा है। इससे पहले यूरोपियन संसद में बीजिंग ओलंपिक के बहिष्कार का ऐलान किया जा चुका है वहीं दूसरी तरफ कई खिलाड़ी भी मुखर होकर इसके बहिष्कार को लेकर आवाज उठा चुके हैं। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के जल्द ही अपने देश के अधिकारियों को खेलों में नहीं भेजने की सिफारिश को मंजूरी देनी की उम्मीद है। बता दें कि व्हाइट हाउस की तरफ से आमतौर पर ओलंपिक के उद्घाटन और समापन समारोह में एक प्रतिनिधिमंडल भेजता है। अमेरिका में शीर्ष सासंदों द्वारा राजनयिक बहिष्कार के आह्वान की गई है।

भारत को अपने पाले में करने की कोशिश में लगा चीन

कुछ दिन पहले रूस, भारत और चीन की मीटिंग हुई थी। जिसके बाद एक लेख लिखा गया जिसमें रूस के एंबेसडर जो अमेरिका में हैं और चीन के एंबेसडर दोनों के द्वारा मिलकर लिखा गया। जिसमें उन्होंने लिखा कि ये डेमोक्रेटिक मीटिंग होने वाली है उससे विश्व में विभाजन फैलेगा। ग्लोबल टाइम्स में भारत, रूस और चीन तीनों को मिलाकर कहां गया कि इन तीनों देशों का डेवलपमेंट और डेमोक्रेसी का मॉडल है। उसमें संकेत ऐसे दिए गए कि भारत को अमेरिका के साथ अलायंस नहीं करना चाहिए। रूस और चीन ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत अभी भी हमारे साथ है। बता दें कि भारत उन 100 से अधिक देशों में शामिल है, जिन्हें 9-10 दिसंबर को होने वाले वर्चुअल समिट के लिए आमंत्रित किया गया है। लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि अमेरिका ने ताइवान को 'समिट फॉर डेमोक्रेसी' के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, रूस-चीन आमंत्रितों की सूची में नहीं हैं। 


भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

इस्लामाबाद फिर दो दिलों को मिलाने का जरिया बना है। इस बार कॉरिडोर के कारण 74 साल बाद दो बिछड़े भाइयों की मुलाकात हुई है। ये दोनों भाई भारत-पाकिस्तान बंटवारे के कारण एक दूसरे से अलग हो गए थे। दोनों भाईयों को पहचान मुहम्मद सिद्दीक और भारत में रहने वाले उनके भाई हबीब उर्फ शेला के नाम से हुई है।

74 साल बाद भरी आंखों के साथ मिले दोनों भाई पाकिस्तानी मीडिया एआरवॉय न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 80 साल के मुहम्मद सिद्दीक पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में रहते हैं। वे बंटवारे के वक्त अपने परिवार से अलग हो गए थे। उनके भाई हबीब उर्फ शेला भारत के पंजाब में रहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर में इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई और वे भावुक होकर गले मिले।

सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर इन दोनों भाइयों के मुलाकात का एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। इसमें दोनों अपने-अपने रिश्तेदारों के साथ करतारपुर कॉरिडोर में दिखाई दे रहे हैं। मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक दूसरे को भावुक होकर गले लगाते नजर आए। इस वीडियो में परिवार के अलावा गुरुद्वारा प्रबंधन के अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।

पहले भी मिल चुके हैं दो दोस्त इससे पहले पिछले साल भी करतारपुर कॉरिडोर में दो बिछड़े दोस्त 74 साल बाद मिल पाए थे। भारत के सरदार गोपाल सिंह अपने बचपन के दोस्त अब 91 साल के मोहम्मद बशीर से 1947 में अलग हो गए थे। इस समय सरदार गोपाल सिंह की उम्र 94 साल जबकि मोहम्मद बशीर 91 साल के हो चुके हैं।

करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जानिए भारत में पंजाब के डेरा बाबा नानक से पाक सीमा तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और वहीं पाकिस्तान भी सीमा से नारोवाल जिले में गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। इसी को करतारपुर साहिब कॉरिडोर कहा गया है। करतारपुर साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर दूर है और करीब लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। यह सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था। ऐसे में सिख धर्म में इस गुरुद्वारे के दर्शन का का बहुत अधिक महत्व है।