आतंकवाद की वित्तीय मदद रोकने में विफल को लगा करारा झटका, जाने क्यों

आतंकवाद की वित्तीय मदद रोकने में विफल को लगा करारा झटका, जाने क्यों

आतंकवाद के मामले पर पाक को करारा झटका लगा है. एफएटीएफ के सब-ग्रुप ने आतंकवाद की वित्तीय मदद रोकने में विफल रहने पर पाक को 'ग्रे लिस्ट' में बने रहने देने की सिफारिश की है. हालांकि, आखिरी निर्णय शुक्रवार को किया जाएगा.

 बताते चलें कि यूएन सेक्योरिटी काउंसिल 1267 कमिटी ने भले ही वर्ष 2003 में माफिया डॉन दाउद इब्राहिम कस्कर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित किया हो व उसकी आखिरी लोकेशन कराची व आखिरी पासपोर्ट पाक का बताया है. लेकिन पाक के एफएटीएफ को जवाब में 1993 मुंबई हमले के मुख्य आरोपी दाउद को लेकर कुछ भी नहीं था.

पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही रखने को लेकर किया गया फैसला एफएटीएफ के इंटरनेशनल को-ऑपरेशन रिव्यू ग्रुप (आईसीआरजी) की मीटिंग में लिया गया. पीटीआई सूत्रों ने बताया कि आईसीआरजी मीटिंग में एफएटीएफ के सब ग्रुप ने पाकिस्तान को 'ग्रे सूची' में ही रखने को बोला है. शुक्रवार को जब एफएटीएफ में यह मामला आएगा, तब इसपर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. पाक ने मंगलवार को एफएटीएफ को जवाब देते हुए बोला कि उसने एफएटीएफ द्वारा कहे गए कार्रवाई के 27 में से 14 बिंदुओं पर कार्य किया है. जबकि 11 अन्य पर आंशिक रूप से कार्य किया है. रिपोर्ट में दाउद को लेकर कोई जिक्र नहीं था जिसका यूएन के अनुसार अल-कायदा से संबंध है. 

नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक सूत्र ने बताया कि पाक की रिपोर्ट में दाउद का कहीं जिक्र नहीं था व वह चाइना की मदद से ग्रे लिस्ट से बाहर आना चाहता है. एफएटीएफ इसपर शुक्रवार तक निर्णय ले सकता है. हालांकि हिंदुस्तान व अमेरिका ने इस्लामाबाद में एशिया पेसिफिक ज्वाइंट ग्रुप बैठक में दाउद का मामला उठाया था. इस्लामाबाद बार बार दाउद के पाकिस्तान में न होने की बात कहता रहा.