कोरोना के खिलाफ भारत की मदद जारी रखेगा अमेरिका

कोरोना के खिलाफ भारत की मदद जारी रखेगा अमेरिका

अमेरिका ने भारत को अपना महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा है कि वह कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ उसकी मदद करना जारी रखेगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन भारत को 10 करोड़ डालर (लगभग 730 करोड़ रुपये) की मदद देने का एलान कर चुके हैं। इतना ही नहीं सहायता कार्यक्रम में वे व्यक्तिगत रूप से भी दिलचस्पी ले रहे हैं।

साकी ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि राष्ट्रपति महामारी की स्थिति पर लगातार नजरें बनाए हुए हैं। यह बात उनके ध्यान में है कि महामारी किस तरह अमेरिका के महत्वपूर्ण साझेदार भारत समेत दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। हम जो मदद मुहैया करा सकते हैं, उसको लेकर हम प्रतिबद्ध हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में साकी ने कहा कि हम यूएस एजेंसी फार इंटरनेशनल डेवलपमेंट द्वारा जुटाए गए फंड से सात खेप राहत सामग्री भारत भेज चुके हैं। जो मरीज कोरोना से लड़ाई लड़ रहे हैं, उनके लिए यह मदद काफी महत्वपूर्ण है।


आक्सीजन कंसंट्रेटर भेजने का अभियान शुरू किया

भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच न्यूयार्क स्थित एक सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम भंडारी ने देशभर के शहरों में आक्सीजन कंसंट्रेटर और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री भेजने का अभियान शुरू किया है। जयपुर फुट यूएसए के अध्यक्ष भंडारी ने अपने संगठन की ओर से ब्रेथ बैंक को 21 आक्सीजन कंसंट्रेटर मुहैया कराया है। ब्रेथ बैंक जयपुर का एक संगठन है, जो गंभीर मरीजों को चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराता है।

सेवा इंटरनेशनल, एएपीआइ के डाक्टर दे रहे मुफ्त सलाह

अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय के दो संगठनों ने भारत में कोरोना के मरीजों को मुफ्त चिकित्सा सलाह देने के लिए हाथ मिलाया है। इन संगठनों में अमेरिकन एसोसिएशन आफ फिजिशियन्स आफ इंडियन ओरिजिन (एएपीआइ) और गैर लाभकारी संस्था सेवा इंटरनेशनल शामिल हैं। इन दोनों संगठनों के डाक्टर ईग्लोबलडाक्टर्स आनलाइन प्लेटफार्म के जरिये भारत में कोरोना के मरीजों को मुफ्त परामर्श दे रहे हैं। ईग्लोबलडाक्टर्स के अध्यक्ष और सह-संस्थापक डा. श्रीनि गंगासनी ने बताया कि पिछले 10 दिनों में इन दोनों संगठनों के 100 से ज्यादा डाक्टर इस प्लेटफार्म से जुड़ चुके हैं। 


किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

 बीते कुछ दशकों में भारत ने स्पेस की दुनिया में अपनी बादशाहत साबित की है। अमेरिका और रुस से मुकाबला करते हुए भारत उस फेहरिस्त में आ खड़ा हुआ है जहां दुनिया के चंद मुल्क ही पहुंचे है। इस पूरे सफर में भारत के मिशन 'चंद्रयान-2' को अपेक्षाकृत सफलता हाथ नहीं लग सकी लेकिन विश्व पटल पर भारत का डंका बजा।

यूनियन ऑफ कंसर्नड साइंटिस्ट सेटेलाइट डाटाबेस ने एक सूची तैयार की है। इस सूची में दुनिया के उन देशों के नाम दर्ज है जिन्होंने अंतरिक्ष में सफलता के झंडे गाड़े है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के स्पेस में अब तक 1038 सेटेलाइट है। चीन के स्पेस में 356 सेटेलाइट है। रुस के स्पेस में 167 सेटेलाइट, अमेरिका के 130, जापान के 78 और भारत के 58 सेटेलाइल स्पेस में है। इनमें से 339 सेटेलाइट का प्रयोग मिलिट्री के लिए, 133 का सिविल के लिए, 1440 का कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए और 318 मिक्स्ड यूज के लिए है।

58 सालों का धमाकेदार सफर

भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 21 नवंबर 1963 को हुई थी जब भारत ने केरल में मछली पकड़ने वाले क्षेत्र थुंबा से अमेरिकी निर्मित दो-चरण वाला साउंडिंग रॉकेट ‘नाइक-अपाचे’ का प्रक्षेपण किया था। यह अंतरिक्ष की ओर भारत का पहला कदम था। उस वक्‍त भारत के पास न तो इस प्रक्षेपण के लिए जरूरी सुविधाएं थीं और न ही मूलभूत ढांचा उपलब्‍ध था। चूंकि थुंबा रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर कोई इमारत नहीं थी इसलिए वहां के स्‍थानीय बिशप के घर को निदेशक का ऑफिस बनाया गया। प्राचीन सेंट मैरी मेगडलीन चर्च की इमारत कंट्रोल रूम बनी और नंगी आंखों से धुआं देखा गया। यहां तक की रॉकेट के कलपुर्जों और अंतरिक्ष उपकरणों को प्रक्षेपण स्थल पर बैलगाड़ी और साइकिल से ले जाया गया था।

16 नवंबर 2013, को अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में भारत ने एक नया अध्याय लिखा। इस दिन 2:39 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से PSLV C-25 मार्स ऑर्बिटर (मंगलयान) का अंत‍रिक्ष का सफर शुरू हुआ। 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत इस तरह के अभियान में पहली ही बार में सफल होने वाला पहला देश गया। इसके साथ ही वह सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद इस तरह का मिशन भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है।