छह प्‍वाइंट में समझे ताइवान में चीन के सबसे बड़े सैन्‍य अभ्‍यास के पीछे का पूरा सच

छह प्‍वाइंट में समझे ताइवान में चीन के सबसे बड़े सैन्‍य अभ्‍यास के पीछे का पूरा सच

चीन ने ताइवान की सीमा पर अब तक की सबसे बड़ी घुसपैठ की है। शुक्रवार को ताइवान की सरहद पर चीन के चार परमाणु बॉम्‍बर समेत 20 लड़ाकू विमानों की गर्जना दक्षिण चीन सागर में तैनात अमेरिकी सैनिकों को जरूर सुनाई पड़ी होगी। ताइवान की सरहद पर यह चीन की सबसे बड़ी घुसपैठ है। दक्षिण चीन सागर पर यह उसका सबसे बड़ा सैन्‍य अभियान है। खास बात यह है कि चीन ने अपने इस सैन्‍य अभियान को तब अंजाम दिया है, जब अभी हाल में क्वाड की बैठक में अमेरिका ने चीन को सख्‍त चेतावनी दी थी। जापान, ऑस्‍ट्रेलिया, भारत और अमेरिका का गठबंधन क्वाड की बैठक में चीन की दक्षिण चीन सागर और हिंद प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्‍पी पर गहरी चिंता व्‍यक्‍त की गई थी। हालांकि, उस वक्‍त चीन ने इस बैठक पर सख्‍त ऐतराज जताया था। इसके बाद चीन ने इस अभियान को अंजाम दिया। आखिर चीन के इस सैन्‍य अभियान के पीछ क्‍या है उसका बड़ा मकसद। क्‍या वह सच में अमेरिका को युद्ध के लिए उकसा रहा है।


युद्ध नहीं दुनिया में एक नए शीत युद्ध की दस्‍तक


प्रो. हर्ष पंत का मानना है कि चीन के बड़े सैन्‍य अभ्‍यास का मकसद अमेरिका को युद्ध के लिए उकसाना नहीं है। इस अभियान का मकसद अमेरिका को इस बात का एहसास करना है कि वह अपने टारगेट से विचलित नहीं हुआ है। ताइवान को लेकर वह अपने रुख पर कायम है। चीन ने अमेरिका और उसके सहयोगी राष्‍ट्रों को संकेत दिया है कि ताइवान के मुद्दे पर वह किसी की भी सुनने वाला नहीं है। वह किसी महाशक्ति के दबाव में आने वाला नहीं है। वह अपने इस रुख पर कायम है कि ताइवान उसका हिस्‍सा है। ताइवान उसकी संप्रभुता के अध‍ीन है। वह उसके भू-भाग का हिस्‍सा है।
प्रो. पंत का मानना है कि इतने बड़े सैन्‍य अभियान के पीछे उसकी मंशा साफ है कि वह किसी सैन्‍य कार्रवाई के आगे झुकने वाला नहीं है। डरने वाला नहीं है। फ‍िर चाहे वह अमेरिका ही क्‍यों न हो। उसने बिना युद्ध किए अमेरिका को अपनी सैन्‍य शक्ति का प्रदर्शन किया है। यह धमकी ताइवान के साथ अमेरिका और उस क्षेत्र में उसके सहयोगी राष्‍ट्रों के लिए है। उसने यह स्‍पष्‍ट कर दिया है कि ताइवान के लिए अगर युद्ध की भी जरूरत पड़ी तो वह पीछे हटने वाला नहीं है। चीन का यह सैन्‍य अभ्‍यास दक्षिण चीन सागर और ताइवान में तैनात अमेरिकी सैनिकों के लिए यह एक सबक जरूर हो सकता है।


उन्‍होंने कहा कि चीन जानता है कि ताइवान की राह में उसकी सबसे बड़ी बाधा अमेरिका है। इसलिए वह अपने अभ्‍यास में अमेरिकी नौसेना बेड़े को टारगेट रखता है। अब अमेरिका का इस पर क्‍या स्‍टैंड होता है, यह देखना दिलचस्‍प होगा। क्‍या अमेरिका वाकई इस क्षेत्र में चीन के प्रभुत्‍व को कम करने के लिए कोई सख्‍त सैन्‍य रणनीति अपनाता है। अभी तो इस क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच लुकाछिपी का खेल चल रहा है।
पंत का मानना है कि दुनिया में एक बार फ‍िर कोरोना वायरस की लहर चल रही है। दुनिया के मुल्‍क कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में जुटे हैं। ऐसे में चीन के लिए यह उपयुक्‍त समय है कि वह ताइवान के मुद्दे पर तेजी दिखाए। इसलिए उसने ताइवान और दक्ष‍िण सागर चीन पर अपने सैन्‍य अभ्‍यास तेज कर दिए हैं। अमेरिका में ट्रंप के बाद बाइडन का प्रशासन है। राष्‍ट्रपति चुनाव जीतने के बाद  देश के आंतरिक हालत से निपटना उनके लिए एक बड़ी चुनौती है, ऐसे में ताइवान और सहयोगी राष्‍ट्रों का कितना साथ देते हैं यह देखना दिलचस्‍प होगा। चीन भी अमेरिका की परीक्षा लेने में जुटा है कि वह ताइवान का कितना साथ देता है।
 

उन्‍होंने कहा कि क्वाड की बैठक के बाद रूस और चीन के बीच हुए समझौते से दुनिया में एक नया शक्ति संतुलन स्‍थापित हुआ है। रूस से गठबंधन के बाद अमेरिका के ख‍िलाफ अब चीन अकेले नहीं रहा। इस गठबंधन के बाद चीन और मजबूत हुआ है। ऐसे में अमेरिका यहां किस तरह की रणनीति अपनता है यह देखना होगा।  लेकिन इतना तय है कि इस रूस-चीन के गठबंधन के बाद इस क्षेत्र में युद्ध के आसार कम हुए हैं। अलबत्‍ता एक नए शीत युद्ध ने दस्‍तक दिया है। 


चीन ने जैक मा की कंपनी अलीबाबा पर कसा शिकंजा, लगाया 20 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना

चीन ने जैक मा की कंपनी अलीबाबा पर कसा शिकंजा, लगाया 20 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना

कई तरह की पाबंदियां लगाने के बाद अब चीन सरकार ने जैक मा की कंपनी अलीबाबा के खिलाफ एकाधिकार विरोधी नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। बीजिंग ने अलीबाबा समूह पर 2.8 अरब डॉलर (20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) का जुर्माना लगाया है। दरअसल, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अलीबाबा सहित चीन की इंटरनेट कंपनियों के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर चिंतित है। उसकी चिंता इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि अब ये कंपनियां वित्त, स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरे संवेदनशील क्षेत्र में अपना व्यापार फैला रही हैं। पार्टी का कहना है कि उसकी इस वर्ष की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर तकनीकी कंपनियों के एकाधिकार को खत्म करना है।

चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर मार्केट रेगुलेशन के मुताबिक अलीबाबा समूह ने एकाधिकार विरोधी नियमों का उल्लंघन किया है। साथ ही बाजार में अपनी साख का भी दुरुपयोग किया है। इसलिए कंपनी के खिलाफ 2.8 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की यह राशि 2019 में अलीबाबा द्वारा कमाए गए राजस्व के लगभग चार फीसद के बराबर है। अलीबाबा पर लगाया गया जुर्माना वर्ष 2015 में क्वालकॉम इंक द्वारा दिए गए जुर्माने से दोगुना है।

उधर, कंपनी ने कहा है कि वह सोमवार सुबह जुर्माने पर चर्चा के लिए हांगकांग में एक कांफ्रेंस बुलाएगी। अलीबाबा ने इस फैसले के खिलाफ कोई नाराजगी नहीं जताई है। कंपनी ने कहा, 'अलीबाबा ईमानदारी के साथ जुर्माना स्वीकार करता है और दृढ़ संकल्प होकर इसका अनुपालन सुनिश्चित करेगा। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए, अलीबाबा कानून के अनुसार काम करेगा। शनिवार को सरकारी समाचार पत्र पीपुल्स डेली में लिखे एक विचार संपादकीय में कहा गया है कि सरकार आर्थिक और सामाजिक विकास में इंटरनेट कंपनियों की भूमिका से भलीभांति परिचित है। जुर्माने का मतलब यह कतई नहीं है कि तकनीकी कंपनियों को लेकर सरकार ने अपनी नीति में कोई बदलाव किया है। इंटरनेट कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल तैयार हो, इसीलिए यह जुर्माना लगाया गया है।


कुछ दिनों पहले किया था हांगकांग के सबसे पुराने अखबार का अधिग्रहण

अलीबाबा ने हांगकांग के 118 वर्ष पुराने समाचार पत्र साउथ चाइना मार्निग पोस्ट का अधिग्रहण करके मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने चीन की मीडिया कंपनियों जैसे न्यूज वेबसाइट 36केआर, सरकारी स्वामित्व वाले शंघाई मीडिया गु्रप, चीन का ट्विटर जैसा प्लेटफार्म वीबो और दूसरे डिजिटल और प्रिंट न्यूज आउटलेट में हिस्सेदारी खरीदी थी। इससे नाराज चीन सरकार ने पिछले महीने ही अलीबाबा से मीडिया कंपनियों में हिस्सेदारी खत्म करने को कहा था।


सरकार के साथ कुछ ऐसे बढ़ा विवाद

जैक मा ने गत वर्ष अक्टूबर में शंघाई में दिए एक भाषण में देश के वित्तीय नियामकों और सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों की आलोचना की थी। उन्होंने सिस्टम में सुधारों की मांग करते हुए वैश्विक बैंकिंग नियामक को 'बूढ़े लोगों का क्लब' बताया था। उनकी ये आलोचना चीन सरकार को नागवार गुजरी थी और उसने नवंबर में आने वाले एंट ग्रुप के 37 बिलियन डॉलर के आइपीओ पर रोक लगा दी थी। सरकार की आलोचना के बाद लगभग दो महीने तक जैक मा सार्वजनिक तौर पर दिखाई तक नहीं पड़े थे। उनके बारे में रहस्य तब गहरा गया था जब वे अपने टैलेंट शो अफ्रीका के बिजनेस हीरो के फाइनल एपिसोड में भी नहीं दिखाई दिए। मा की जगह इस एपिसोड में अलीबाबा के एक अधिकारी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके बाद दुनिया भर में जैक मा के लापता होने की चर्चा की गई। इसके बाद जैकमा एक वीडियो कार्यक्रम में नजर आए।


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