बारबाडोस : 400 वर्ष बाद ब्रिटेन की महारानी को राष्ट्राध्यक्ष पद से हटाकर बना गणतंत्र देश, सांद्रा मसोन बनीं पहली राष्ट्रपति

बारबाडोस : 400 वर्ष बाद ब्रिटेन की महारानी को राष्ट्राध्यक्ष पद से हटाकर बना गणतंत्र देश, सांद्रा मसोन बनीं पहली राष्ट्रपति

कैरेबियाई देश बारबाडोस ने करीब 400 साल तक अंग्रेजों से औपनिवेशिक रिश्ते खत्म कर ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को राष्ट्राध्यक्ष पद से हटा दिया है। अब यह देश एक गणतंत्र बन गया है और सांद्रा मसोन को देश की पहली राष्ट्रपति बना दिया है। देश को पहला गणतंत्र मिलने पर बारबाडोस के लोग आधी रात को सड़कों पर आए और आजादी का जश्न मनाया।

प्रिंस चार्ल्स के सामने उतारा गया ब्रिटिश महारानी का ध्वज, सांद्रा मसोन बनी पहली राष्ट्रपति
गणराज्य बनने के बाद राजधानी के हीरोज स्क्वायर पर देश का राष्ट्रगान बजाया गया और 21 तोपों की सलामी दी गई। इस मौके पर ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स मौजूद थे। उनके सामने महारानी एलिजाबेथ का ध्वज उतारा गया। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने इस मौके पर बधाई भेजी हैं। उन्होंने कहा, इस गणतंत्र की स्थापना एक नई शुरुआत है।

हमारे अंधियारे भूतकाल से, इतिहास पर धब्बे के रूप में मौजूद गुलामी  की दर्दनाक यातनाओं से निकलकर देश के लोगों ने बेमिसाल ताकत के साथ अपना रास्ता बनाया है। उनके एलान के बाद देश के लोगों ने परंपरागत नृत्य किया और संगीत बजाया। इस दौरान देश की नई और पहली राष्ट्रपति बनी सांद्रा मसोन ने कहा, औपनिवेशिक भूतकाल पीछे छोड़ देने का वक्त आ गया है। लोग चाहते हैं कि उनके देश का आदमी देश का मुखिया बने।

ऐतिहासिक शुरुआत
ब्रिटेन की महारानी एलिजेबेथ द्वितीय अब भी 15 देशों की राष्ट्राध्यक्ष हैं। इनमें यूनाइटेड किंग्डम के अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जमैका शामिल हैं। बारबाडोस ने महारानी को राष्ट्राध्यक्ष के पद से हटाकर नई शुरुआत की है। उनकी जगह अब सैंड्रा मसोन देश की राष्ट्रपति होंगी।


भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

इस्लामाबाद फिर दो दिलों को मिलाने का जरिया बना है। इस बार कॉरिडोर के कारण 74 साल बाद दो बिछड़े भाइयों की मुलाकात हुई है। ये दोनों भाई भारत-पाकिस्तान बंटवारे के कारण एक दूसरे से अलग हो गए थे। दोनों भाईयों को पहचान मुहम्मद सिद्दीक और भारत में रहने वाले उनके भाई हबीब उर्फ शेला के नाम से हुई है।

74 साल बाद भरी आंखों के साथ मिले दोनों भाई पाकिस्तानी मीडिया एआरवॉय न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 80 साल के मुहम्मद सिद्दीक पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में रहते हैं। वे बंटवारे के वक्त अपने परिवार से अलग हो गए थे। उनके भाई हबीब उर्फ शेला भारत के पंजाब में रहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर में इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई और वे भावुक होकर गले मिले।

सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर इन दोनों भाइयों के मुलाकात का एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। इसमें दोनों अपने-अपने रिश्तेदारों के साथ करतारपुर कॉरिडोर में दिखाई दे रहे हैं। मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक दूसरे को भावुक होकर गले लगाते नजर आए। इस वीडियो में परिवार के अलावा गुरुद्वारा प्रबंधन के अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।

पहले भी मिल चुके हैं दो दोस्त इससे पहले पिछले साल भी करतारपुर कॉरिडोर में दो बिछड़े दोस्त 74 साल बाद मिल पाए थे। भारत के सरदार गोपाल सिंह अपने बचपन के दोस्त अब 91 साल के मोहम्मद बशीर से 1947 में अलग हो गए थे। इस समय सरदार गोपाल सिंह की उम्र 94 साल जबकि मोहम्मद बशीर 91 साल के हो चुके हैं।

करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जानिए भारत में पंजाब के डेरा बाबा नानक से पाक सीमा तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और वहीं पाकिस्तान भी सीमा से नारोवाल जिले में गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। इसी को करतारपुर साहिब कॉरिडोर कहा गया है। करतारपुर साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर दूर है और करीब लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। यह सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था। ऐसे में सिख धर्म में इस गुरुद्वारे के दर्शन का का बहुत अधिक महत्व है।