रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सेल्फ आइसोलेट, कुछ करीबी पाए गए हैं कोरोना संक्रमित

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सेल्फ आइसोलेट, कुछ करीबी पाए गए हैं कोरोना संक्रमित

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने दल के कुछ सदस्यों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद एहतियात के तौर पर सेल्फ आइसोलेट हो गए हैं। हालांकि, वह संक्रमित नहीं हैं और बिल्कुल स्वस्थ हैं। वह पहले ही रूस की वैक्सीन स्पुतनिक v के दोनों शाट ले चुके हैं। क्रेमलिन ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। इस वजह से 68 वर्षीय पुतिन इस सप्ताह क्षेत्रीय सुरक्षा बैठकों के लिए ताजिकिस्तान की यात्रा नहीं करेंगे। अब वह इसमें वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लेंगे।  वह  डाक्टरों के परामर्श में हैं। उन्होंने सोमवार को क्रेमलिन में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद से मिलने के बाद सेल्फ-आइसोलेशन का निर्णय लिया। पुतिन ने रूसी पैरालिंपियन से भी मुलाकात की और बेलारूस के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास का निरीक्षण करने के लिए सोमवार को पश्चिमी रूस की यात्रा की थी।

अगले माह 69 साल के होने वाले पुतिन के सेल्फ आइसोलेट होने का मतलब है कि उन्हें स्वस्थ रखने और कोरोना से बचाने के लिए बनाए गए कठोर नियम में संभवत: उल्लंघन हुआ है। क्रेमलिन आने वाले लोगों को विशेष डीसइंफेक्शन टनल्स से गुजरना पड़ता है।  उनके कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले पत्रकारों को कई बार पीसीआर टेस्ट से गुजरना पड़ता है और जिन लोगों से वे मिलते हैं, उन्हें पहले से क्वारंटाइन होने और टेस्ट कराने के लिए कहा जाता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने संवाददाताओं से कहा कि पुतिन अपने दल में कई लोगों के संपर्क में थे जो कोरोना संक्रमण से बीमार पड़ गए हैं।

पेसकोव ने कहा, 'बेशक हम जानते हैं कि राष्ट्रपति के दल में कौन बीमार पड़ा और सेल्फ आइसोलेशन राष्ट्रपति के काम को सीधे प्रभावित नहीं करता है। व्यक्तिगत तौर पर बैठकें कुछ दिनों तक नहीं होंगी। राष्ट्रपति वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अपना काम जारी रखेंगे।' यह पूछे जाने पर कि क्या पुतिन  का कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया है, पेसकोव ने कहा, 'जी हां। राष्ट्रपति बिल्कुल स्वस्थ हैं।'


अफगानिस्तान में लौटेगा मौत की सजा का दौर, तालिबानी नेता मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी का बयान

अफगानिस्तान में लौटेगा मौत की सजा का दौर, तालिबानी नेता मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी का बयान

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद अब कट्टर इस्लामी कानूनों को लागू किया जाएगा। तालिबान के संस्थापकों में से एक और पूर्व कार्यकाल में इस्लामी कानूनों को कठोर व्याख्या के साथ लागू करने करने वाले एक प्रमुख प्रवर्तक ने कहा कि अफगानिस्तान में फिर से फांसी देने और हाथ काटने जैसी सजाएं देने का दौर लौटेगा। द एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक साक्षात्कार में, मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने अतीत में तालिबान के फांसी देने के तरीके पर दुनिया के ऐतराज को खारिज कर दिया है।

उल्लेखनीय है तालिबान के पिछले कार्यकाल में अक्सर चोरी करने वालों के हाथ काटने जैसी सजाएं स्टेडियम में भीड़ के सामने दी जाती थीं। तुराबी ने दुनिया को अफगानिस्तान के नए शासकों के मामले में हस्तक्षेप करने के खिलाफ चेतावनी दी।तुराबी ने कहा, स्टेडियम में दंड के लिए सभी ने हमारी आलोचना की। लेकिन हमने कभी उनके कानूनों और सजा देने के तरीके के बारे में कुछ नहीं कहा। हम नहीं चाहते कि कोई हमें बताए कि हमारे कानून क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और कुरान के मुताबिक अपने कानून बनाएंगे।


अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से अमेरिका को सताने लगा हमले का डर

फेडरल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआइ)के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने चेतावनी दी कि अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा अमेरिका स्थित चरमपंथियों को अमेरिकी जमीन पर हमले की साजिश रचने के लिए प्रेरित कर सकता है। रे ने मंगलवार को सीनेट होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंटल अफेयर कमेटी के समक्ष यह आशंका जाहिर की।दि हिल की रिपोर्ट के मुताबिक, रे ने कहा कि 2020 के मध्य से घरेलू आतंकवाद के मामले आसमान छू रहे हैं। मामले एक हजार से 2700 तक पहुंच गए हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। चरमपंथी संगठनों ने कभी भी अमेरिकी जमीन पर हमलों की साजिश रचना बंद नहीं किया है।


इतना ही नहीं, नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक क्रिस्टाइन अबीजेद ने भी कमेटी के समक्ष कहा कि दो दशक पूर्व की तुलना में अमेरिका में आतंकी हमलों की आशंका अधिक बढ़ गई है। अबीजेद ने यह भी कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को इस बात पर ध्यान देना होगा कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट किस प्रकार अपनी ताकत में इजाफा कर सकते हैं और अमेरिका में हमलों की साजिश रच सकते हैं।