पाकिस्तान में रोक के बावजूद पेशावर में रैली करेंगे विपक्षी दल, इमरान सरकार ने नहीं दी इजाजत

पाकिस्तान में रोक के बावजूद पेशावर में रैली करेंगे विपक्षी दल, इमरान सरकार ने नहीं दी इजाजत

पाकिस्तान में सरकार और विपक्षी दलों के बीच का टकराव बढ़ रहा है। पाकिस्तान में 11 विपक्षी पार्टियों के गठबंधन पीडीएम(PDM) की पेशावर में होने वाली रैली पर रोक के बावजूद विपक्षी दलों ने कहा है कि वे रैली आयोजित करेंगे। पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने कहा है कि वो रविवार को पेशावर में चौथे शक्ति प्रदर्शन का मंचन करेगा। इमरान खान सरकार ने पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) की रैली के आयोजन को इजाजत नहीं दी है। इमरान सरकार ने कोरोना के नए मामलों में उछाल के कारण सार्वजनिक रैली आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, इस रैली को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) के उपाध्यक्ष मरियम नवाज़, जमीयत उलेमा इस्लाम-फज़ल (जेयूआई-एफ) और पीडीएम प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर रहमान, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) केचिरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी साथ ही अन्य विपक्षी नेताओं संबोधित करेंगे। मरयम नवाज ने पुष्टि की है कि उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पेशावर की रैली को संबोधित नहीं करेंगे।

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़(पीएमएल-एन) के खैबर पख्तूनख्वा प्रवक्ता इख्तियार वली ने कथित तौर पर आयोजन स्थल के रास्ते में आने वाली बाधाओं का खंडन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार पीडीएम की रैलियों से डर गई है। उन्होंने कहा कि रविवार की रैली होगी सरकार के खिलाफ एक जनमत संग्रह, जो हिंसा भड़काने के लिए नहीं चेतावनी देता है या यह एक जिम्मेदार होगा।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, शुक्रवार को पेशावर के डिप्टी कमिश्नर ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था, उन्होंने कहा था कि प्रांतीय राजधानी में कोरोना पॉजिटिव दर वर्तमान में खतरनाक रूप से उच्च है। आयुक्त ने कहा कि किसी भी बड़ी जनसभा में जानलेवा वायरस फैलने की आशंका बढ़ जाती है। प्रधान मंत्री इमरान खान द्वारा राष्ट्र को दिए गए एक संबोधन के बाद सोमवार को यह घोषणा की गई कि वह एक कोरोना पुनरुत्थान के मद्देनजर सार्वजनिक समारोहों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा रहे हैं, जिसमें राजनीतिक रैलियों और समारोहों का आयोजन शामिल था।


भारतीय सीमा पर निर्माण काम को लेकर अमरीकी सांसद ने चिंता जताई

भारतीय सीमा पर निर्माण काम को लेकर अमरीकी सांसद ने चिंता जताई

वाशिंगटन: अमरीका ( America ) में सत्ता बदलाव होने के बाद भी चाइना के साथ तनाव बरकरार है. कोविड-19 महामारी ( Corona Epidemic ) और आर्थिक संकट समेत कई अन्य वैश्विक मुद्दों पर अमरका-चीन में विवाद ( America China Tension ) की स्थिति बनी है और अब यह विवाद और भी गहराता जा रहा है.

दूसरी तरफ वास्तिव नियंत्रण रेखा ( LAC ) पर हिंदुस्तान और चाइना के बीच तनाव का माहौल है. चाइना भारतीय सीमा के करीब गैर कानूनी ढंग से निर्माण काम कर रहा है. वहीं भारतीय सीमा में घुसपैठ को लेकर लागातार नापाक प्रयास में भी जुटा है.

इन सबके बीच अमरीका ने चाइना को एक बार फिर से कड़ी फटकार लगाई है. अमरीका ने लद्दाख ( Ladakh ) में भारतीय सीमा के करीब चाइना के गैर कानूनी निर्माण काम को लेकर चिंता जाहिर की है. अमरीका के एक प्रभावशाली सांसद ने बोला है कि अमरीका हिंदुस्तान के साथ खड़ा था, है और रहेगा. यदि चाइना या कोई देश सीमा पर किसी तरह के परिवर्तन की प्रयास करता है, जो कि क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए चुनौती हो, तो अमरीका उसका पुरजोर विरोध करेगा.

अमरीका के डेमोक्रेटिक पार्टी से कांग्रेस पार्टी के मेम्बर राजा कृष्णमूर्ति ने मंगलवार को एक बड़ा बयान देते हुए बोला कि LAC के करीब चीनी सेना की ओर से किए जा रहे निर्माण काम को लेकर जानकारी मिली है और इससे मैं बहुत ज्यादा चिंतित हूं. बता दें कि इस वर्ष मई से पूर्वी लद्दाख में LAC पर भारत-चीन के बीच गतिरोध जारी है.

भारत के साथ खड़ा रहेगा अमरीका

भारतीय अमरीकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने बोला कि यदि यह रिपोर्ट हकीकत है तो चाइना के सैन्य उकसावे की वजह से क्षेत्र में तनाव बढ़ता ही रहेगा. उन्होंने बोला कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपने भारतीय सहयोगी के साथ अमरीका हमेशा खड़ा रहेगा और यदि चाइना ने सीमा पर किसी तरह से परिवर्तन करने की प्रयास की तो उसका विरोध करेगा.

राजा कृष्णमूर्ति ने उपग्रह से ली गई तस्वीरों के आधार पर बयान देते हुए बोला कि इस तरह की तस्वीरों से साफ पता चल रहा है कि चाइना पूर्वी लद्दाख में निर्माण काम कर रहा है. बता दें कि इससे पहले इसी वर्ष जुलाई में अमरीकी प्रतिनिधि सभा ने अपना वार्षिक ‘नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन’ अधिनियम पारित किया था. जिसमें LAC पर चाइना की आक्रमकता को समाप्त करने की मांग की गई थी. इस अधिनियम में कृष्णामूर्ति की ओर से दिए गए द्विदलीय संशोधन को भी शामिल किया गया था.


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