इजरायल-फिलीस्‍तीन के बीच सीजफायर कराने के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन पर बढ़ा दबाव

इजरायल-फिलीस्‍तीन के बीच सीजफायर कराने के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन पर बढ़ा दबाव

इजरायल और फिलीस्‍तीन के बीच छिड़ी जंग को रुकवाने के लिए इस वक्‍त अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन पर जबरदस्‍त दबाव है। इसकी सबसे बड़ी वजह गाजा स्थित मीडिया हाउस पर हुआ हमला है। इस हमले में एसोसिएटेड प्रेस समेत अलजजीरा का ऑफिस तबाह हो गया था। इस इमारत में कुछ दूसरे मीडिया हाउस भी काम कर रहे थे।

इजरायली राष्‍ट्रपति बेंजामेन नेतन्‍याहू ने टीवी पर जारी एक संदेश में कहा था कि इस इमारत में जो मीडिया हाउस था उसका इस्‍तेमाल हमास के लोग अपने खुफिया ऑफिस के तौर पर कर रहे थे। उनके मुताबिक हमले में इस इमारत को सटीक तौर पर निशाना बनाया गया था। इस हमले के बाद बाइडन प्रशासन ने भी इजरायल से इसको लेकर जवाब तलब किया है। आपको बता दें कि दोनों और से हो रहे हमलों में अब तक 200 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 1200 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

रविवार को इस संबंध में संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक के बाद बाइडन की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ही उन पर सीजफायर को लेकर दबाव बढ़ाने में लग गए हैं। बाइडन प्रशासन का कहना है कि वो इस संबंध में इजरायली प्रधानमंत्री से संपर्क में है। पिछले दिनों अरब जगत समेत संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव ने भी हमलों को तुरंत रोकने की अपील की थी। यूएन प्रमुख ने कहा था कि यदि ये नहीं रुका तो इसके विनाशकारी परिणाम होंगे। सीजफायर के सवाल पर व्‍हाइट हाउस के प्रवक्‍ता ने कहा कि उनके विचार के मुताबिक पर्दे के पीछे कुछ वार्ता चल रही है।

दोनों तरफ से हमलों की शुरुआत के बाद से अब तक राष्‍ट्रपति बाइडन करीब तीन बार प्रधानमंत्री नेतन्‍याहू से बात कर चुके हैं। व्‍हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि बाइडन ने फिलीस्‍तीनी हमले से बचाव के तौर पर इजरायली कार्रवाई का समर्थन किया है। बाइडन का कहना है कि इजरायल को अपने नागरिकों की सुरक्षा करने का पूरा अधिकार है। हाल ही में हुई वार्ता में भी दोनों नेताओं के बीच हमास समेत दूसरे आतंकी गुटों पर हुई कार्रवाई को लेकर विचार विमर्श हुआ था।


व्‍हाइट हाउस के प्रवक्‍ता का कहना है कि अमेरिका भी चाहता है कि दोनों देशों के बीच चल रहा तनाव कम हो और सीजफायर किया जाए। इस बारे में अमेरिका की मिस्र समेत अन्‍य देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों से भी बात हुई है। एक लिबरल प्रो-इजरायल लोबिंग ग्रुप जेस्‍ट्रीट के प्रवक्‍ता लोगेन बेरॉफ का कहना है कि वो इस बात से काफी दुखी हैं कि बाइडन प्रशासन इसकी नजाकत को समझते हुए तेजी से फैसला नहीं ले रहा है।

इस बीच कॉकस के करीब आधे से ज्‍यादा सीनेटर्स ने एक बयान जारी कर कहा है कि लोगों के जान और माल को बचाने के लिए दोनों देशों के बीच तुरंत हमले रुकवाने की पहल करनी चाहिए। ये भी ध्‍यान रखना चाहिए कि आगे भी इस तरह की कार्रवाई किसी की भी तरफ से न होने पाए। सीनेट मेजोरिटी लीडर चक स्‍कमर का कहना है कि इस पर तुरंत अमल किया जाना चाहिए। आपको बता दें कि हमास की तरफ से इजरायल पर वर्ष 2014 के बाद से इस बार किया गया पहला सबसे बड़ा हमला है।


किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

 बीते कुछ दशकों में भारत ने स्पेस की दुनिया में अपनी बादशाहत साबित की है। अमेरिका और रुस से मुकाबला करते हुए भारत उस फेहरिस्त में आ खड़ा हुआ है जहां दुनिया के चंद मुल्क ही पहुंचे है। इस पूरे सफर में भारत के मिशन 'चंद्रयान-2' को अपेक्षाकृत सफलता हाथ नहीं लग सकी लेकिन विश्व पटल पर भारत का डंका बजा।

यूनियन ऑफ कंसर्नड साइंटिस्ट सेटेलाइट डाटाबेस ने एक सूची तैयार की है। इस सूची में दुनिया के उन देशों के नाम दर्ज है जिन्होंने अंतरिक्ष में सफलता के झंडे गाड़े है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के स्पेस में अब तक 1038 सेटेलाइट है। चीन के स्पेस में 356 सेटेलाइट है। रुस के स्पेस में 167 सेटेलाइट, अमेरिका के 130, जापान के 78 और भारत के 58 सेटेलाइल स्पेस में है। इनमें से 339 सेटेलाइट का प्रयोग मिलिट्री के लिए, 133 का सिविल के लिए, 1440 का कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए और 318 मिक्स्ड यूज के लिए है।

58 सालों का धमाकेदार सफर

भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 21 नवंबर 1963 को हुई थी जब भारत ने केरल में मछली पकड़ने वाले क्षेत्र थुंबा से अमेरिकी निर्मित दो-चरण वाला साउंडिंग रॉकेट ‘नाइक-अपाचे’ का प्रक्षेपण किया था। यह अंतरिक्ष की ओर भारत का पहला कदम था। उस वक्‍त भारत के पास न तो इस प्रक्षेपण के लिए जरूरी सुविधाएं थीं और न ही मूलभूत ढांचा उपलब्‍ध था। चूंकि थुंबा रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर कोई इमारत नहीं थी इसलिए वहां के स्‍थानीय बिशप के घर को निदेशक का ऑफिस बनाया गया। प्राचीन सेंट मैरी मेगडलीन चर्च की इमारत कंट्रोल रूम बनी और नंगी आंखों से धुआं देखा गया। यहां तक की रॉकेट के कलपुर्जों और अंतरिक्ष उपकरणों को प्रक्षेपण स्थल पर बैलगाड़ी और साइकिल से ले जाया गया था।

16 नवंबर 2013, को अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में भारत ने एक नया अध्याय लिखा। इस दिन 2:39 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से PSLV C-25 मार्स ऑर्बिटर (मंगलयान) का अंत‍रिक्ष का सफर शुरू हुआ। 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत इस तरह के अभियान में पहली ही बार में सफल होने वाला पहला देश गया। इसके साथ ही वह सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद इस तरह का मिशन भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है।