पाकिस्तान में ईश निंदा आरोपी को मारने के लिए थाने में घुसी भिड़

पाकिस्तान में ईश निंदा आरोपी को मारने के लिए थाने में घुसी भिड़

पाकिस्तान में ईश निंदा के एक मामले में आरोपी को मारने के लिए भीड़ ने थाने पर ही हमला कर दिया। वहां जमकर तोड़फोड़ की गई। पुलिस और आरोपी को जान बचाना मुश्किल हो गया। भीड़ के हाथों में लाठी, डंडों और लोहे की सरिया के साथ हथियार भी थे। ये सभी आरोपी की हत्या कर दंड देना चाहते थे।

बाद में भारी संख्या में पुलिसबल आने के बाद ही थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों और आरोपी की जान बचाई गई। पूरे क्षेत्र में तनाव हो गया है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पैदल मार्च भी किया। ईश निंदा में गिरफ्तार व्यक्ति की जानकारी नहीं दी गई है। पुलिस के अनुसार हमला इस्लामाबाद के गोलरा पुलिस स्टेशन पर किया गया है।

ज्ञात हो कि ईश निंदा कानून में पाक ने कड़े प्रावधान किए हुए हैं। इस अपराध के आरोपियों की मॉब लिंचिंग की घटनाएं पाकिस्तान में आम हैं। आरोपियों को कट्टरपंथी खुद ही दंड देने पर आमादा हो जाते हैं। पाक में मौजूदा हालात में इस कानून का अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के लिए हथियार के रूप इस्तेमाल किया जा रहा है। ईश निंदा कानून औपनिवेशिक काल का कानून हैं। तानाशाह जिया उल हक के कार्यकाल में इस कानून में कड़े प्रावधान किए गए थे। 


किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

 बीते कुछ दशकों में भारत ने स्पेस की दुनिया में अपनी बादशाहत साबित की है। अमेरिका और रुस से मुकाबला करते हुए भारत उस फेहरिस्त में आ खड़ा हुआ है जहां दुनिया के चंद मुल्क ही पहुंचे है। इस पूरे सफर में भारत के मिशन 'चंद्रयान-2' को अपेक्षाकृत सफलता हाथ नहीं लग सकी लेकिन विश्व पटल पर भारत का डंका बजा।

यूनियन ऑफ कंसर्नड साइंटिस्ट सेटेलाइट डाटाबेस ने एक सूची तैयार की है। इस सूची में दुनिया के उन देशों के नाम दर्ज है जिन्होंने अंतरिक्ष में सफलता के झंडे गाड़े है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के स्पेस में अब तक 1038 सेटेलाइट है। चीन के स्पेस में 356 सेटेलाइट है। रुस के स्पेस में 167 सेटेलाइट, अमेरिका के 130, जापान के 78 और भारत के 58 सेटेलाइल स्पेस में है। इनमें से 339 सेटेलाइट का प्रयोग मिलिट्री के लिए, 133 का सिविल के लिए, 1440 का कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए और 318 मिक्स्ड यूज के लिए है।

58 सालों का धमाकेदार सफर

भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 21 नवंबर 1963 को हुई थी जब भारत ने केरल में मछली पकड़ने वाले क्षेत्र थुंबा से अमेरिकी निर्मित दो-चरण वाला साउंडिंग रॉकेट ‘नाइक-अपाचे’ का प्रक्षेपण किया था। यह अंतरिक्ष की ओर भारत का पहला कदम था। उस वक्‍त भारत के पास न तो इस प्रक्षेपण के लिए जरूरी सुविधाएं थीं और न ही मूलभूत ढांचा उपलब्‍ध था। चूंकि थुंबा रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर कोई इमारत नहीं थी इसलिए वहां के स्‍थानीय बिशप के घर को निदेशक का ऑफिस बनाया गया। प्राचीन सेंट मैरी मेगडलीन चर्च की इमारत कंट्रोल रूम बनी और नंगी आंखों से धुआं देखा गया। यहां तक की रॉकेट के कलपुर्जों और अंतरिक्ष उपकरणों को प्रक्षेपण स्थल पर बैलगाड़ी और साइकिल से ले जाया गया था।

16 नवंबर 2013, को अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में भारत ने एक नया अध्याय लिखा। इस दिन 2:39 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से PSLV C-25 मार्स ऑर्बिटर (मंगलयान) का अंत‍रिक्ष का सफर शुरू हुआ। 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत इस तरह के अभियान में पहली ही बार में सफल होने वाला पहला देश गया। इसके साथ ही वह सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद इस तरह का मिशन भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है।