इमरान खान की शह पर बढ़ सकता है सेना कमांडर हमीद का कद, बन सकते हैं सेना प्रमुख

इमरान खान की शह पर बढ़ सकता है सेना कमांडर हमीद का कद, बन सकते हैं सेना प्रमुख

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के प्रमुख के पद से हटाए जा चुके फैज हमीद को अब पेशावर कार्प कमांडर के तौर पर नियुक्त किया गया है। लेकिन पीएम इमरान खान के विरोधी व तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ ने दावा किया है कि इमरान खान के समर्थन से अब उन्हें ही अगला सेना प्रमुख बनाया जाएगा। इस्लाम खबर नामक अखबार को नवाज शरीफ ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि सेना और कूटनीतिक भूमिकाओं में हमीद का ही दखल है। वह इमरान खान के राजनीतिक विरोधियों से भी लड़ाई लड़ रहे हैं।

पिछले महीने हमीद हाईप्रोफाइल दौरे पर काबुल गए थे, ताकि तालिबान और पाकिस्तान सरकार के बीच सुलह करा सकें। इन्होंने ही फरवरी के दोहा समझौते पर मध्यस्थता की थी। उन्होंने आइएसआइ के इशारे पर काम करने वाले हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख जलालुद्दीन हक्कानी के बेटे सिराजुद्दीन हक्कानी को गृह मंत्री बनवाना सुनिश्चित किया। साथ ही दो अन्य हक्कानियों को भी तालिबान की अंतरिम सरकार में अहम स्थिति दिलवाई है।


इस्लाम खबर के अनुसार मौजूदा सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने जब हमीद को बेहतरीन काम करते देखा तो उन्हें लगा कि उनका दर्जा सेना प्रमुख को टक्कर देने लगा है। हालांकि नए पेशावर कार्प कमांडर के तौर पर भी हमीद काबुल के घटनाक्रम को गहराई से देख रहे हैं। इस सबके चलते हमीद को बाजवा के बाद खाली होने वाले सेना के सर्वोच्च पद के काबिल समझा जाने लगा है। बाजवा को पहले ही सेवा विस्तार मिल चुका है और वह 2022 में रिटायर हो रहे हैं।

रिपोर्ट यह भी है कि बाजवा को और सेवा विस्तार की भी दरकार हो सकती है, लेकिन ऐसा होना मुश्किल है क्योंकि सेना प्रमुख और आइएसआइ प्रमुख का चयन करने वाले पैनल को अंत में मंजूरी प्रधानमंत्री इमरान खान से ही लेनी होगी। इमरान वर्ष 2023 के आम चुनाव से पहले इसमें अपनी ही मर्जी चलाना चाहेंगे।

हालांकि आधिकारिक रूप से सेना मुख्यालय की घोषणा के बावजूद हमीद की नियुक्ति को प्रधानमंत्री कार्यालय की नियुक्ति की दरकार है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के नए प्रमुख की नियुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल बाजवा के बीच गतिरोध के बीच सेना ने आइएसआइ प्रमुख के नामों की सूची पीएम खान को भेजी है।


कोयले के इस्तेमाल करने पर जी 20 देशों में मतभेद, पर्यावरण पर होने वाली रोम की बैठक पर संकट के बादल

कोयले के इस्तेमाल करने पर जी 20 देशों में मतभेद, पर्यावरण पर होने वाली रोम की बैठक पर संकट के बादल

बिजली के उत्पादन में कोयले का इस्तेमाल बंद करने के मुद्दे पर दुनिया के 20 सबसे संपन्न देशों में मतभेद पैदा हो गए हैं। धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए बड़े पैमाने पर कोयले का इस्तेमाल जरूरी माना गया है। इससे इटली की राजधानी रोम में 30-31 अक्टूबर को होने वाली जी 20 देशों के नेताओं की बैठक में पर्यावरण सुधार के मसले पर आमराय बनने की संभावना क्षीण हो गई है। यह बैठक स्काटलैंड के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले इसी साल पर्यावरण पर होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी बैठक के रूप में देखी जा रही है।

इसी साल जुलाई में नेपल्स में हुए दुनिया के ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रियों के सम्मेलन में कोयले का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे चीन और भारत ने पर्यावरण सुधार के लिए जिन कदमों का आश्वासन दिया था, वह उन्होंने पूरा नहीं किया है। यह बात नाम स्पष्ट न किए जाने की शर्त पर तीन सूत्रों ने कही है। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों विकासशील देश कोविड-19 महामारी से पैदा हुई मंदी से निपटने के लिए अपने ऊर्जा उत्पादन में कमी नहीं करना चाहते हैं। यही वजह कोयला इस्तेमाल में कमी नहीं होने दे रही। दोनों देशों का मानना है कि अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य विकसित देश 20 वीं सदी में कोयले का इस्तेमाल कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए लाभ अर्जित कर चुके हैं। अब जबकि भारत और चीन अपनी जरूरत के लिए कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं तब उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कहा जा रहा है। भारत पश्चिमी देशों से पर्यावरण सुधार के लिए प्रदूषण मुक्त नई तकनीक के साथ ही कोयले का इस्तेमाल कम करने के बदले आर्थिक सहायता चाहता है। पेरिस समझौते में विकासशील देशों के लिए ये प्रविधान हैं। लेकिन सहायता में व्यवधान पड़ने के कारण कोयले का इस्तेमाल तेज गति से कम नहीं हो पा रहा है।


संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले हुए पेरिस समझौते में धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से कम करने पर सहमति बनी थी। इस समझौते की ग्लासगो में समीक्षा होनी है और भविष्य के लिए रूपरेखा तय होनी है। लेकिन कोविड महामारी के चलते बने हालात ने इस प्रक्रिया के बाधित होने की आशंका पैदा कर दी है।