बेरूत में जज को हटाने की मांग में हो रहे प्रदर्शन के दौरान हुए संघर्ष में चार लोगों की मौत

बेरूत में जज को हटाने की मांग में हो रहे प्रदर्शन के दौरान हुए संघर्ष में चार लोगों की मौत

लेबनान की राजधानी बेरूत में गुरुवार को शहर के एक बंदरगाह पर पिछले साल हुए बम धमाके की जांच कर रहे जज को हटाने की मांग कर रहे चरमपंथी संगठन हिज्बुल्लाह के समर्थकों व सैनिकों में संघर्ष हो गया। दोनों ओर से पिस्तौल व राइफल आदि घातक हथियारों से हुई गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए। संघर्ष में ग्रेनेड का भी इस्तेमाल हुआ।

बम धमाके की जांच करने वाले जज को हटाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों व सेना में गोलीबारी

एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि स्नाइपर इमारतों में छिपकर गोलियां दाग रहे थे। एक फ्रेंच स्कूल के पास चार गोले आ गिरे। इससे भयभीत छात्र स्कूल के केंद्रीय हाल में छिप गए और अपनी खिड़कियों खुला छोड़ दिया, ताकि कम से कम नुकसान हो। इस घटना ने वर्ष 1975-90 के दौरान चले गृहयुद्ध की याद दिला दी। प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पूरे इलाके में बड़ी संख्या में लेबनानी सैनिकों को तैनात कर दिया गया है।


उल्लेखनीय है कि चार अगस्त, 2020 को बेरूत के एक बंदरगाह के गोदाम में हुए धमाके में कम से कम 215 लोग मारे गए थे। घटना की जांच जज तारीक बिटार कर रहे हैं। हिज्बुल्लाह के समर्थक जज पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग कर रहे हैं।


कोयले के इस्तेमाल करने पर जी 20 देशों में मतभेद, पर्यावरण पर होने वाली रोम की बैठक पर संकट के बादल

कोयले के इस्तेमाल करने पर जी 20 देशों में मतभेद, पर्यावरण पर होने वाली रोम की बैठक पर संकट के बादल

बिजली के उत्पादन में कोयले का इस्तेमाल बंद करने के मुद्दे पर दुनिया के 20 सबसे संपन्न देशों में मतभेद पैदा हो गए हैं। धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए बड़े पैमाने पर कोयले का इस्तेमाल जरूरी माना गया है। इससे इटली की राजधानी रोम में 30-31 अक्टूबर को होने वाली जी 20 देशों के नेताओं की बैठक में पर्यावरण सुधार के मसले पर आमराय बनने की संभावना क्षीण हो गई है। यह बैठक स्काटलैंड के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले इसी साल पर्यावरण पर होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी बैठक के रूप में देखी जा रही है।

इसी साल जुलाई में नेपल्स में हुए दुनिया के ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रियों के सम्मेलन में कोयले का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे चीन और भारत ने पर्यावरण सुधार के लिए जिन कदमों का आश्वासन दिया था, वह उन्होंने पूरा नहीं किया है। यह बात नाम स्पष्ट न किए जाने की शर्त पर तीन सूत्रों ने कही है। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों विकासशील देश कोविड-19 महामारी से पैदा हुई मंदी से निपटने के लिए अपने ऊर्जा उत्पादन में कमी नहीं करना चाहते हैं। यही वजह कोयला इस्तेमाल में कमी नहीं होने दे रही। दोनों देशों का मानना है कि अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य विकसित देश 20 वीं सदी में कोयले का इस्तेमाल कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए लाभ अर्जित कर चुके हैं। अब जबकि भारत और चीन अपनी जरूरत के लिए कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं तब उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कहा जा रहा है। भारत पश्चिमी देशों से पर्यावरण सुधार के लिए प्रदूषण मुक्त नई तकनीक के साथ ही कोयले का इस्तेमाल कम करने के बदले आर्थिक सहायता चाहता है। पेरिस समझौते में विकासशील देशों के लिए ये प्रविधान हैं। लेकिन सहायता में व्यवधान पड़ने के कारण कोयले का इस्तेमाल तेज गति से कम नहीं हो पा रहा है।


संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले हुए पेरिस समझौते में धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से कम करने पर सहमति बनी थी। इस समझौते की ग्लासगो में समीक्षा होनी है और भविष्य के लिए रूपरेखा तय होनी है। लेकिन कोविड महामारी के चलते बने हालात ने इस प्रक्रिया के बाधित होने की आशंका पैदा कर दी है।