कहीं खतरनाक रूप न ले ले इजरायल-फलस्‍तीन के बीच छिड़ी लड़ाई! तुर्की का कड़ा रुख

कहीं खतरनाक रूप न ले ले इजरायल-फलस्‍तीन के बीच छिड़ी लड़ाई! तुर्की का कड़ा रुख

इजरायल-फलस्‍तीन के बीच छिड़ी लड़ाई के बढ़ने की आशंका गहरा गई है। तुर्की ने फिलीस्‍तीन के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा है कि इजरायल के खिलाफ सभी मुस्लिम देश एकजुट होकर जवाब दें। इस बीच अमेरिका ने एक बार फिर से इजरायल के हवाई हमलों को जायज करार देते हुए कहा है कि उन्‍हें अपनी रक्षा करने का अधिकार है। इन दोनों देशों के बीच छिड़ी लड़ाई में अब अलग-अलग खेमे बंटते जा रहे हैं। रूस ने भी तुर्की का साथ देते हुए फलस्‍तीन का समर्थन किया है। जबकि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस इजरायल के समर्थन में आ खड़े हुए हैं।

रॉयटर्स के मुताबिक दुनिया के 57 इस्‍लामिक देशों के संगठन इस्‍लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने इजरायल से तत्‍काल गाजा पर हमले रोकने की अपील की है। इस संगठन की एक आपात बैठक रविवार को बुलाई गई थी जिसमें कई देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्‍सा लिया था। इस बैठक में पूर्वी येरुशलम को फलस्‍तीन का हिस्‍सा बताते हुए उसकी राजधानी भी बताया गया। तुर्की ने इजरायली हमलों को देखते हुए सभी इस्‍लामिक देशों से एकजुट होने का आह्वान किया है। साथ ही उन्‍होंने कहा कि वो अंतरराष्‍ट्रीय कानूनों पर जरा भी विश्‍वास न करें, क्‍योंकि ये उनका साथ नहीं देने वाले हैं।

दोनों देशों के बीच छिड़ी इस लड़ाई ने आठवें दिन (दूसरे सप्‍ताह) में प्रवेश कर लिया है। इस बीच दोनों ही तरफ से किए जा रहे हमलों में कई नागरिकों की मौत हो चुकी है। पीटीआई के अनुसार रविवार को इजरायल द्वारा किए गए हमलों में गाजा में अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया समूह के ऑफिस समेत हमास के एक शीर्ष नेता के घर को भी उड़ा दिया गया। एएफपी के मुताबिक इस हमले में 44 से अधिक लोगों की जान गई है। ओआईसी ने इजरायल के इन हमलों को क्रूरतापूर्ण कार्रवाई बताया है। वर्चुअल रूप में हुई ओआईसी की बैठक में इजरायल द्वारा पवित्र शहर येरुशलम से फलस्‍तीनियों को भगाने की कार्रवाई की भी कड़े शब्‍दों में निंदा की गई है।


बैठक में शिरकत करते हुए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सउद ने पूरी दुनिया से इस लड़ाई को बंद करवाने के लिए पहल करने की अपील की है। उन्‍होंने कहा है कि दोनों के बीच मसलों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जानी चाहिए। हालांकि संगठन द्वारा जारी बयान से इतर मलेशिया, ब्रुनेई और इंडोनेशिया ने इस मसले पर अपने बयान अलग से जारी किए हैं। मलेशिया के शासक ने इस संबंध में तत्‍काल यूएन जनरल असेंबली की बैठक बुलाने का आह्वान किया है। वहीं सऊदी अरब, बहरीन और यूएई ने तुरंत सीजफायर करने की बात कही है। ओआईसी के मुताबिक इन हमलों में अब तक गाजा में 1200 से अधिक लोग हताहत हुए हैं जबकि करीब 200 लोगों की जान चली गई है।


किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

 बीते कुछ दशकों में भारत ने स्पेस की दुनिया में अपनी बादशाहत साबित की है। अमेरिका और रुस से मुकाबला करते हुए भारत उस फेहरिस्त में आ खड़ा हुआ है जहां दुनिया के चंद मुल्क ही पहुंचे है। इस पूरे सफर में भारत के मिशन 'चंद्रयान-2' को अपेक्षाकृत सफलता हाथ नहीं लग सकी लेकिन विश्व पटल पर भारत का डंका बजा।

यूनियन ऑफ कंसर्नड साइंटिस्ट सेटेलाइट डाटाबेस ने एक सूची तैयार की है। इस सूची में दुनिया के उन देशों के नाम दर्ज है जिन्होंने अंतरिक्ष में सफलता के झंडे गाड़े है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के स्पेस में अब तक 1038 सेटेलाइट है। चीन के स्पेस में 356 सेटेलाइट है। रुस के स्पेस में 167 सेटेलाइट, अमेरिका के 130, जापान के 78 और भारत के 58 सेटेलाइल स्पेस में है। इनमें से 339 सेटेलाइट का प्रयोग मिलिट्री के लिए, 133 का सिविल के लिए, 1440 का कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए और 318 मिक्स्ड यूज के लिए है।

58 सालों का धमाकेदार सफर

भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 21 नवंबर 1963 को हुई थी जब भारत ने केरल में मछली पकड़ने वाले क्षेत्र थुंबा से अमेरिकी निर्मित दो-चरण वाला साउंडिंग रॉकेट ‘नाइक-अपाचे’ का प्रक्षेपण किया था। यह अंतरिक्ष की ओर भारत का पहला कदम था। उस वक्‍त भारत के पास न तो इस प्रक्षेपण के लिए जरूरी सुविधाएं थीं और न ही मूलभूत ढांचा उपलब्‍ध था। चूंकि थुंबा रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर कोई इमारत नहीं थी इसलिए वहां के स्‍थानीय बिशप के घर को निदेशक का ऑफिस बनाया गया। प्राचीन सेंट मैरी मेगडलीन चर्च की इमारत कंट्रोल रूम बनी और नंगी आंखों से धुआं देखा गया। यहां तक की रॉकेट के कलपुर्जों और अंतरिक्ष उपकरणों को प्रक्षेपण स्थल पर बैलगाड़ी और साइकिल से ले जाया गया था।

16 नवंबर 2013, को अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में भारत ने एक नया अध्याय लिखा। इस दिन 2:39 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से PSLV C-25 मार्स ऑर्बिटर (मंगलयान) का अंत‍रिक्ष का सफर शुरू हुआ। 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत इस तरह के अभियान में पहली ही बार में सफल होने वाला पहला देश गया। इसके साथ ही वह सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद इस तरह का मिशन भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है।