इजराइल की भीषण बमबारी से कांपा गाजा शहर, अब तक 201 फलस्तीनियों की मौत

इजराइल की भीषण बमबारी से कांपा गाजा शहर, अब तक 201 फलस्तीनियों की मौत

इजरायल के लड़ाकू विमान सोमवार तड़के गाजा पट्टी इलाके में फिर गरजे और आतंकी संगठन हमास के ठिकानों को निशाना बनाया गया। हवाई हमले में टनल और हमास के ठिकानों पर जमकर बमबारी की गई। यह टनल आतंकियों के लिए पनाहगाह थी। इजरायली सेना ने बताया कि हमास की 15 किलोमीटर लंबी टनल और इसके नौ कमांडरों के घरों को उड़ा दिया गया। हमास के एक शीर्ष कमांडर को भी ढेर कर दिया गया।

दस मई से जारी है संघर्ष

गाजा पट्टी पर शासन करने वाले हमास और इजरायल के बीच दस मई से संघर्ष चल रहा है। इस इलाके में सोमवार को किया गया हवाई हमला सबसे भीषण बताया जा रहा है। एक दिन पहले गाजा सिटी में किए गए हवाई हमले में 42 लोगों की मौत हुई थी और तीन इमारतें ध्वस्त हुई थीं। हालांकि ताजा हवाई हमले में हताहतों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। 

नौ घरों को निशाना बनाया 

इजरायली सेना ने बताया कि उत्तरी गाजा के विभिन्न इलाकों में हमास के शीर्ष कमांडरों के नौ घरों को निशाना गया। इसके कमांडर हुसाम अबू हरबीद को मार गिराया गया। वह इजरायली नागरिकों के खिलाफ कई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार था।

...और बिगड़ सकते हैं हालात 


इजरायल के ताजा हवाई हमले में गाजा सिटी में एक तीन मंजिली इमारत ध्वस्त हो गई लेकिन इसमें रहने वाले लोगों ने बताया कि हमले से पहले ही इमारत को खाली कर दिया गया था। अलजजीरा टीवी ने गाजा के मेयर याहया सराज के हवाले से बताया कि हवाई हमले में सड़कों और दूसरे ढांचों को काफी नुकसान पहुंचा है। अगर संघर्ष इसी तरह चलता रहा तो स्थिति खराब हो सकती है।

हजारों की संख्या में दागे गए रॉकेट


इजरायल और हमास के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक हजारों की संख्या में एक-दूसरे पर रॉकेट दागे जा चुके हैं। इजरायली सेना ने बताया है कि वह हमास के ठिकानों को निशाना बना सैकड़ों हवाई हमले कर चुकी है। जबकि गाजा की ओर से इजरायल में 3,100 से अधिक रॉकेट दागे गए।

हमले में 201 लोगों की मौत

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक के हमले में 58 बच्चों और 35 महिलाओं समेत 201 फलस्तीनियों की मौत हुई है। इधर, इजरायल में एक पांच वर्षीय बच्चे और एक सैनिक समेत आठ लोगों की जान गई है।


संघर्ष विराम के भी चल रहे प्रयास

इजरायल और हमास के बीच छिड़े संघर्ष को बंद कराने के भी प्रयास चल रहे हैं। दोनों में संघर्ष विराम के लिए अमेरिका से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक प्रयास कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने हिंसा रोकने की मांग को लेकर बैठक की।

अमेरिका ने कही यह बात 


वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने कहा, 'हम संघर्ष खत्म कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं।' ब्लिंकन ने यह भी बताया कि उन्होंने गाजा में उस इमारत पर हमले के औचित्य को लेकर इजरायल से पूछा है, जिसमें समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस और अलजजीरा समेत कई मीडिया संस्थानों के दफ्तर थे। इजरायली हवाई हमले में इस इमारत को निशाना बनाया गया था। एसोसिएटेड प्रेस ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।


किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

 बीते कुछ दशकों में भारत ने स्पेस की दुनिया में अपनी बादशाहत साबित की है। अमेरिका और रुस से मुकाबला करते हुए भारत उस फेहरिस्त में आ खड़ा हुआ है जहां दुनिया के चंद मुल्क ही पहुंचे है। इस पूरे सफर में भारत के मिशन 'चंद्रयान-2' को अपेक्षाकृत सफलता हाथ नहीं लग सकी लेकिन विश्व पटल पर भारत का डंका बजा।

यूनियन ऑफ कंसर्नड साइंटिस्ट सेटेलाइट डाटाबेस ने एक सूची तैयार की है। इस सूची में दुनिया के उन देशों के नाम दर्ज है जिन्होंने अंतरिक्ष में सफलता के झंडे गाड़े है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के स्पेस में अब तक 1038 सेटेलाइट है। चीन के स्पेस में 356 सेटेलाइट है। रुस के स्पेस में 167 सेटेलाइट, अमेरिका के 130, जापान के 78 और भारत के 58 सेटेलाइल स्पेस में है। इनमें से 339 सेटेलाइट का प्रयोग मिलिट्री के लिए, 133 का सिविल के लिए, 1440 का कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए और 318 मिक्स्ड यूज के लिए है।

58 सालों का धमाकेदार सफर

भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 21 नवंबर 1963 को हुई थी जब भारत ने केरल में मछली पकड़ने वाले क्षेत्र थुंबा से अमेरिकी निर्मित दो-चरण वाला साउंडिंग रॉकेट ‘नाइक-अपाचे’ का प्रक्षेपण किया था। यह अंतरिक्ष की ओर भारत का पहला कदम था। उस वक्‍त भारत के पास न तो इस प्रक्षेपण के लिए जरूरी सुविधाएं थीं और न ही मूलभूत ढांचा उपलब्‍ध था। चूंकि थुंबा रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर कोई इमारत नहीं थी इसलिए वहां के स्‍थानीय बिशप के घर को निदेशक का ऑफिस बनाया गया। प्राचीन सेंट मैरी मेगडलीन चर्च की इमारत कंट्रोल रूम बनी और नंगी आंखों से धुआं देखा गया। यहां तक की रॉकेट के कलपुर्जों और अंतरिक्ष उपकरणों को प्रक्षेपण स्थल पर बैलगाड़ी और साइकिल से ले जाया गया था।

16 नवंबर 2013, को अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में भारत ने एक नया अध्याय लिखा। इस दिन 2:39 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से PSLV C-25 मार्स ऑर्बिटर (मंगलयान) का अंत‍रिक्ष का सफर शुरू हुआ। 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत इस तरह के अभियान में पहली ही बार में सफल होने वाला पहला देश गया। इसके साथ ही वह सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद इस तरह का मिशन भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है।