बांग्लादेश : मंदिरों के दान में मदद का ट्रांसजेंडर को मिला 'प्रसाद', लोगों ने चुनाव जिताकर शहर का मेयर बनाया

बांग्लादेश : मंदिरों के दान में मदद का ट्रांसजेंडर को मिला 'प्रसाद', लोगों ने चुनाव जिताकर शहर का मेयर बनाया

बांग्लादेश में एक छोटे से शहर त्रिलोचनपुर में लोगों ने देश के इतिहास में पहली बार किसी ट्रांसजेंडर (किन्नर) को मेयर बनाकर शहर की कमान संभालने के लिए चुना है। 45 वर्षीय इस निर्दलीय उम्मीदवार का नाम है नजरुल इस्लाम रितु और उसे कई हिंदू मंदिरों को दान करने में मदद करने वाले शख्स के रूप में प्रसिद्धि मिली है। रितु ने त्रिलोचनपुर में दो मस्जिदों का भी निर्माण कराया है।

9,557 मतों से निकटतम प्रतिद्वंद्वी को नसरुल इस्लाम ने हराया
नजरुल इस्लाम की जीत की औपचारिक घोषणा सोमवार की शाम को की गई। उसने कहा, मेरी जीत ने हिजड़ा समुदाय की समाज में बढ़ती स्वीकृति को दिखाया है, जो जन्म लेने वाले पुरुषों के लिए एक अपशब्द माना जाता है। दरअसल, बांग्लादेश के इस छोटे शहर में पैदा हुई नजरूल बचपन में ही अपने गृहनगर से भागकर में ढाका चली गई और उसने ट्रांसजेंडरों के एक केंद्र में शरण ली।

20 साल बाद वह अपने शहर वापस लौटी और स्थानीय हिंदू मंदिरों के लिए उसने चंदा जुटाने में लोगों की काफी मदद की। इससे उसकी लोकप्रियता बढ़ती गई। उसने मेयर पद के चुनाव में किस्मत आजमाई और रविवार को हुए चुनाव में उसने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 9,557 मतों से हरा दिया। वह अब शहर की मेयर के तौर पर काम करेंगी।

कांच की छत दरक रही है
एक बड़े मुस्लिम परिवार में पैदा हुई नजरुल इस्लाम ने चुनाव जीतने पर कहा, कांच की छत दरक रही है। यह एक अच्छा संकेत है। उसने कहा, इस जीत का मतलब है कि लोग उन्हें प्यार करते हैं और उन्हें अपना मानते हैं. मैं अपना जीवन सार्वजनिक सेवा के लिए समर्पित करूंगी। उसे 2018 में थर्ड जेंडर के रूप में मतदाता के बतौर पंजीकरण कराने की देश में अनुमति दी गई थी।


भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

इस्लामाबाद फिर दो दिलों को मिलाने का जरिया बना है। इस बार कॉरिडोर के कारण 74 साल बाद दो बिछड़े भाइयों की मुलाकात हुई है। ये दोनों भाई भारत-पाकिस्तान बंटवारे के कारण एक दूसरे से अलग हो गए थे। दोनों भाईयों को पहचान मुहम्मद सिद्दीक और भारत में रहने वाले उनके भाई हबीब उर्फ शेला के नाम से हुई है।

74 साल बाद भरी आंखों के साथ मिले दोनों भाई पाकिस्तानी मीडिया एआरवॉय न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 80 साल के मुहम्मद सिद्दीक पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में रहते हैं। वे बंटवारे के वक्त अपने परिवार से अलग हो गए थे। उनके भाई हबीब उर्फ शेला भारत के पंजाब में रहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर में इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई और वे भावुक होकर गले मिले।

सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर इन दोनों भाइयों के मुलाकात का एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। इसमें दोनों अपने-अपने रिश्तेदारों के साथ करतारपुर कॉरिडोर में दिखाई दे रहे हैं। मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक दूसरे को भावुक होकर गले लगाते नजर आए। इस वीडियो में परिवार के अलावा गुरुद्वारा प्रबंधन के अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।

पहले भी मिल चुके हैं दो दोस्त इससे पहले पिछले साल भी करतारपुर कॉरिडोर में दो बिछड़े दोस्त 74 साल बाद मिल पाए थे। भारत के सरदार गोपाल सिंह अपने बचपन के दोस्त अब 91 साल के मोहम्मद बशीर से 1947 में अलग हो गए थे। इस समय सरदार गोपाल सिंह की उम्र 94 साल जबकि मोहम्मद बशीर 91 साल के हो चुके हैं।

करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जानिए भारत में पंजाब के डेरा बाबा नानक से पाक सीमा तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और वहीं पाकिस्तान भी सीमा से नारोवाल जिले में गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। इसी को करतारपुर साहिब कॉरिडोर कहा गया है। करतारपुर साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर दूर है और करीब लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। यह सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था। ऐसे में सिख धर्म में इस गुरुद्वारे के दर्शन का का बहुत अधिक महत्व है।