दुनिया में एक दिन में मिले 5.70 लाख नए केस, दस हजार संक्रमितों की गई जान

दुनिया में एक दिन में मिले 5.70 लाख नए केस, दस हजार संक्रमितों की गई जान

दुनिया में कोरोना महामारी के थमने के संकेत मिलने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से नए मामलों में गिरावट दर्ज की जा रही है। विश्वभर में 24 घंटे में पांच लाख 70 हजार से ज्यादा नए मामले पाए गए। इस दौरान करीब दस हजार पीडि़तों की मौत हो गई। महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत और ब्राजील जैसे देशों में नए मामलों में कमी आने से वैश्विक स्तर पर संक्रमण में गिरावट देखी जा रही है।

वैश्विक आंकड़ा 16 करोड़ 27 लाख के पार

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के डाटा के अनुसार, सोमवार सुबह कोरोना पीडि़तों का वैश्विक आंकड़ा 16 करोड़ 27 लाख 68 हजार 855 हो गया जबकि मरने वालों की कुल संख्या 33 लाख 74 हजार 593 हो गई।

एक नजर इन देशों पर

श्रीलंका : तीन दिन के लिए लगाया गया लाकडाउन सोमवार को खत्म कर दिया गया। देश में इस वक्त रोजाना दो हजार से ज्यादा नए केस मिल रहे हैं।


बांग्लादेश : कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लगाए गए लाकडाउन को 23 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। यहां 12 अप्रैल से लाकडाउन है।

अर्जेटीना : 16 हजार 350 नए संक्रमित मिलने से पीडि़तों की संख्या 33 लाख के पार पहुंच गई। यहां कुल 70 हजार से अधिक की जान गई है।

ब्राजील में बड़ी गिरावट


ब्राजील में दैनिक मामलों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। देशभर में 24 घंटे के दौरान करीब 37 हजार नए संक्रमित पाए गए। इससे पीडि़तों की कुल संख्या एक करोड़ 56 लाख 25 हजार से ज्यादा हो गई। इस दौरान करीब एक हजार पीडि़तों के दम तोड़ने से मरने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर चार लाख 35 हजार से अधिक हो गया।


किस देश के स्पेस में कितने हैं सेटेलाइट, जानें भारत की दमदार स्थिति के बारे में

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 बीते कुछ दशकों में भारत ने स्पेस की दुनिया में अपनी बादशाहत साबित की है। अमेरिका और रुस से मुकाबला करते हुए भारत उस फेहरिस्त में आ खड़ा हुआ है जहां दुनिया के चंद मुल्क ही पहुंचे है। इस पूरे सफर में भारत के मिशन 'चंद्रयान-2' को अपेक्षाकृत सफलता हाथ नहीं लग सकी लेकिन विश्व पटल पर भारत का डंका बजा।

यूनियन ऑफ कंसर्नड साइंटिस्ट सेटेलाइट डाटाबेस ने एक सूची तैयार की है। इस सूची में दुनिया के उन देशों के नाम दर्ज है जिन्होंने अंतरिक्ष में सफलता के झंडे गाड़े है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के स्पेस में अब तक 1038 सेटेलाइट है। चीन के स्पेस में 356 सेटेलाइट है। रुस के स्पेस में 167 सेटेलाइट, अमेरिका के 130, जापान के 78 और भारत के 58 सेटेलाइल स्पेस में है। इनमें से 339 सेटेलाइट का प्रयोग मिलिट्री के लिए, 133 का सिविल के लिए, 1440 का कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए और 318 मिक्स्ड यूज के लिए है।

58 सालों का धमाकेदार सफर

भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 21 नवंबर 1963 को हुई थी जब भारत ने केरल में मछली पकड़ने वाले क्षेत्र थुंबा से अमेरिकी निर्मित दो-चरण वाला साउंडिंग रॉकेट ‘नाइक-अपाचे’ का प्रक्षेपण किया था। यह अंतरिक्ष की ओर भारत का पहला कदम था। उस वक्‍त भारत के पास न तो इस प्रक्षेपण के लिए जरूरी सुविधाएं थीं और न ही मूलभूत ढांचा उपलब्‍ध था। चूंकि थुंबा रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर कोई इमारत नहीं थी इसलिए वहां के स्‍थानीय बिशप के घर को निदेशक का ऑफिस बनाया गया। प्राचीन सेंट मैरी मेगडलीन चर्च की इमारत कंट्रोल रूम बनी और नंगी आंखों से धुआं देखा गया। यहां तक की रॉकेट के कलपुर्जों और अंतरिक्ष उपकरणों को प्रक्षेपण स्थल पर बैलगाड़ी और साइकिल से ले जाया गया था।

16 नवंबर 2013, को अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में भारत ने एक नया अध्याय लिखा। इस दिन 2:39 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से PSLV C-25 मार्स ऑर्बिटर (मंगलयान) का अंत‍रिक्ष का सफर शुरू हुआ। 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत इस तरह के अभियान में पहली ही बार में सफल होने वाला पहला देश गया। इसके साथ ही वह सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद इस तरह का मिशन भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है।