सैन्‍य कमांडर स्‍तर की वार्ता से ठीक पहले चीन की नापाक हरकत, गलवन झड़प पर जारी किया

सैन्‍य कमांडर स्‍तर की वार्ता से ठीक पहले चीन की नापाक हरकत, गलवन झड़प पर जारी किया

पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर टकराव के बिंदुओं से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया के बीच शनिवार को सुबह 10 बजे से भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडर स्तर की 10वें दौर की बातचीत होगी। लेकिन चीन ने शनिवार को होने वाली इस वार्ता से पहले बीजिंग ने गलवन घाटी में हुए संघर्ष का एक वीडियो जारी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है। हालांकि भारतीय सेना ने संयम का परिचय देते हुए उस पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। यह वीडियो चीन में एक निजी समाचार संगठन को जारी किया गया जो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया है। 

भारतीय सेना पर लगाया आरोप 

चीन ने इस प्रोपेगेंडा वीडियो को जारी करते हुए भारतीय सेना पर आक्रामक रुख अपनाने का आरोप लगाया है। चीन का कहना है कि भारतीय सेना के आक्रमक रुख के चलते ही गलवन घाटी में झड़प की घटना हुई थी। समाचार एजेंसी आइएएनएस के मुताबिक चीन ने सोशल मीडिया पर जारी इस वीडियो में आरोप लगाया है कि भारतीय सेना के आक्रामक रुख के चलते ही गलवन में झड़प हुई थी। 


भारतीय सेना ने दिखाया सौहार्द 

भारतीय सेना ने सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता की गंभीरता को देखते हुए अभी इस वीडियो पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस वीडियो को चीन के एक निजी समाचार संस्‍थान की ओर से जारी किया गया। वीडियो जारी होते ही यह तेजी से वायरस होने लगा है। 

चीनी सैनिकों ने ले रखे थे हथियार 

सनद रहे कि गलवन घाटी में 15 जून को भारतीय सेना के बिहार रेजिमेंट के बहादुर सैनिकों ने कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व में बिना किसी हथियार के भारतीय इलाके में अवैध रूप से घुस आए चीनी सैनिकों से जमकर लोहा लिया था। भारतीय सैनिकों से तीन गुने से भी ज्यादा संख्या में आए चीनी सैनिकों के हाथ में लोहे की राड, नुकीली लाठियां-डंडे से लेकर पत्थर और धारदार हथियार थे। 

चीनी सेना के मंसूबों पर फ‍िरा था पानी 

गलवन में अवैध पोस्ट बनाने के चीनी सेना के मंसूबों पर पानी फेरते हुए बहादुर भारतीय सैनिकों ने बिना हथियारों के ही घंटों संघर्ष करते हुए चीनी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था और इसी दौरान कर्नल बाबू समेत 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। 

सैनिकों की संख्या को लेकर चुप्पी

भारत ने घटना के अगले ही दिन अपने इन बहादुर सैनिकों की कुर्बानी की बात स्वीकार करते हुए उन्हें सर्वोच्च श्रद्धांजलि दी थी जबकि चीन ने अपने मारे गए सैनिकों की संख्या को लेकर चुप्पी साधे रखी थी। अब आठ महीने बाद जाकर उसने अपने सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है।


चीन ने माना- मारे गए थे उसके सैनिक 

पूर्वी लद्दाख की गलवन घाटी में हुए खूनी संघर्ष में अब तक अपने हताहत सैनिकों की संख्या छिपाते रहे चीन ने आखिरकार यह कुबूल कर लिया है कि इस भिड़ंत में उसके भी सैनिक मारे गए थे, हालांकि उसने मरने वाले सैनिकों की संख्या सिर्फ पांच बताई है। इसके साथ ही चीन ने यह भी स्वीकार किया है कि उसके मारे गए सैनिकों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का रेजिमेंट कमांडर स्तर का अधिकारी भी शामिल था।


मारे गए सैनिकों की संख्या को उजागर किया

काराकोरम पर्वत की घाटी में 15 जून को हुई इस घटना के आठ महीने बाद चीन ने शुक्रवार को पहली बार अपने मारे गए सैनिकों की संख्या को उजागर किया। चीन सरकार के मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने गलवन घाटी में भारतीय सैनिकों के हाथों मारे गए अपने सैनिकों के नाम प्रकाशित कर उनके योगदान को याद किया। चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) ने अपने इन सैनिकों को वीरता पुरस्कारों से भी नवाजा है। 


चीन बोला- हमारे चार सैनिक मारे गए 

इस आयोग के अध्यक्ष खुद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग हैं। चीनी सेना का कहना है कि उसके चार सैनिक गलवन में भारतीय सैनिकों के साथ हुए संघर्ष में मारे गए। जबकि अपने साथियों के बचाव में गए एक सैनिक की नदी में गिरने से मौत हो गई।

यहां यह उल्लेखनीय है कि दो हफ्ते पहले ही रूस की समाचार एजेंसी 'तास' ने इस संघर्ष में 45 चीनी सैनिकों के मारे जाने का अनुमान लगाया था। जबकि अमेरिकी खुफिया एजेंसी की पिछले साल की रिपोर्ट में करीब 35 चीनी सैनिकों के मारे जाने की बात कही गई थी। अपने सैनिकों के मारे जाने को लेकर चीन का यह कुबूलनामा ऐसे समय आया है जब वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य टकराव घटाने को लेकर भारत और चीन के सैनिक समाधान की ओर बढ़ रहे हैं और कल यानी शनिवार को कमांडर स्‍तर की वार्ता होने वाली है।


चीन ने जैक मा की कंपनी अलीबाबा पर कसा शिकंजा, लगाया 20 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना

चीन ने जैक मा की कंपनी अलीबाबा पर कसा शिकंजा, लगाया 20 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना

कई तरह की पाबंदियां लगाने के बाद अब चीन सरकार ने जैक मा की कंपनी अलीबाबा के खिलाफ एकाधिकार विरोधी नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। बीजिंग ने अलीबाबा समूह पर 2.8 अरब डॉलर (20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) का जुर्माना लगाया है। दरअसल, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अलीबाबा सहित चीन की इंटरनेट कंपनियों के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर चिंतित है। उसकी चिंता इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि अब ये कंपनियां वित्त, स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरे संवेदनशील क्षेत्र में अपना व्यापार फैला रही हैं। पार्टी का कहना है कि उसकी इस वर्ष की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर तकनीकी कंपनियों के एकाधिकार को खत्म करना है।

चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर मार्केट रेगुलेशन के मुताबिक अलीबाबा समूह ने एकाधिकार विरोधी नियमों का उल्लंघन किया है। साथ ही बाजार में अपनी साख का भी दुरुपयोग किया है। इसलिए कंपनी के खिलाफ 2.8 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की यह राशि 2019 में अलीबाबा द्वारा कमाए गए राजस्व के लगभग चार फीसद के बराबर है। अलीबाबा पर लगाया गया जुर्माना वर्ष 2015 में क्वालकॉम इंक द्वारा दिए गए जुर्माने से दोगुना है।

उधर, कंपनी ने कहा है कि वह सोमवार सुबह जुर्माने पर चर्चा के लिए हांगकांग में एक कांफ्रेंस बुलाएगी। अलीबाबा ने इस फैसले के खिलाफ कोई नाराजगी नहीं जताई है। कंपनी ने कहा, 'अलीबाबा ईमानदारी के साथ जुर्माना स्वीकार करता है और दृढ़ संकल्प होकर इसका अनुपालन सुनिश्चित करेगा। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए, अलीबाबा कानून के अनुसार काम करेगा। शनिवार को सरकारी समाचार पत्र पीपुल्स डेली में लिखे एक विचार संपादकीय में कहा गया है कि सरकार आर्थिक और सामाजिक विकास में इंटरनेट कंपनियों की भूमिका से भलीभांति परिचित है। जुर्माने का मतलब यह कतई नहीं है कि तकनीकी कंपनियों को लेकर सरकार ने अपनी नीति में कोई बदलाव किया है। इंटरनेट कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल तैयार हो, इसीलिए यह जुर्माना लगाया गया है।


कुछ दिनों पहले किया था हांगकांग के सबसे पुराने अखबार का अधिग्रहण

अलीबाबा ने हांगकांग के 118 वर्ष पुराने समाचार पत्र साउथ चाइना मार्निग पोस्ट का अधिग्रहण करके मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने चीन की मीडिया कंपनियों जैसे न्यूज वेबसाइट 36केआर, सरकारी स्वामित्व वाले शंघाई मीडिया गु्रप, चीन का ट्विटर जैसा प्लेटफार्म वीबो और दूसरे डिजिटल और प्रिंट न्यूज आउटलेट में हिस्सेदारी खरीदी थी। इससे नाराज चीन सरकार ने पिछले महीने ही अलीबाबा से मीडिया कंपनियों में हिस्सेदारी खत्म करने को कहा था।


सरकार के साथ कुछ ऐसे बढ़ा विवाद

जैक मा ने गत वर्ष अक्टूबर में शंघाई में दिए एक भाषण में देश के वित्तीय नियामकों और सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों की आलोचना की थी। उन्होंने सिस्टम में सुधारों की मांग करते हुए वैश्विक बैंकिंग नियामक को 'बूढ़े लोगों का क्लब' बताया था। उनकी ये आलोचना चीन सरकार को नागवार गुजरी थी और उसने नवंबर में आने वाले एंट ग्रुप के 37 बिलियन डॉलर के आइपीओ पर रोक लगा दी थी। सरकार की आलोचना के बाद लगभग दो महीने तक जैक मा सार्वजनिक तौर पर दिखाई तक नहीं पड़े थे। उनके बारे में रहस्य तब गहरा गया था जब वे अपने टैलेंट शो अफ्रीका के बिजनेस हीरो के फाइनल एपिसोड में भी नहीं दिखाई दिए। मा की जगह इस एपिसोड में अलीबाबा के एक अधिकारी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके बाद दुनिया भर में जैक मा के लापता होने की चर्चा की गई। इसके बाद जैकमा एक वीडियो कार्यक्रम में नजर आए।


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