चीनी कार्रवाई के डर से ब्रिटेन पहुंचे हांगकांग के हजारों लोग

चीनी कार्रवाई के डर से ब्रिटेन पहुंचे हांगकांग के हजारों लोग

चीन द्वारा हांगकांग में लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के चलते हजारों लोग अपना घर छोड़कर ब्रिटेन पहुंचे हैं। इनमें से कुछ को डर है कि लोकतंत्र समर्थकों के प्रदर्शन में साथ देने के कारण उन्हें दंडित किया जा सकता है। कई का मानना है कि उनके जीवन जीने के तरीके और नागरिक आजादी पर चीनी दखल असहनीय हो गया है, इस कारण वे बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए विदेश जाकर बसने को मजबूर हुए हैं।

लोकतंत्र के समर्थन में चीन से दंड मिलने व नागरिक आजादी पर मंडरा रहा खतरा
एक जानकारी के मुताबिक, हांगकांग में घरबार छोड़कर ब्रिटेन पहुंचे लोगों में से कई ने यहां कभी वापस नहीं लौटने का मन भी बना लिया है। हांगकांग में व्यवसायी और दो बच्चों की मां सिंडी की इस क्षेत्र में कई संपत्तियां हैं लेकिन वे भी अभिव्यक्ति की आजादी और निष्पक्ष स्वतंत्रता पर बंदिशों को लेकर अब लंदन जाकर बस गई हैं।

इसी तरह ब्रिटेन पहुंची वांग ने अपना पूरा नाम न बताकर कहा कि वे हांगकांग से बहुत जल्द बाहर निकलना चाहती हैं क्योंकि बीजिंग उन्हें बाहर जाने से रोक देगा। दूसरी तरफ, ब्रिटेन ने ‘ब्रिटिश नेशनल ओवरसीज’ (बीएनओ) वीजा के लिए रविवार से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस कारण भी लोग पहले से ही यहां के लिए हांगकांग छोड़ चुके हैं। ब्रिटेन ने कहा है कि बीएनओ दर्जे वाले करीब 7,000 लोग यहां पहुंचे हैं।

50 लाख लोगों के लिए ब्रिटेन ने खोले रास्ते
ब्रिटेन ने एलान किया था कि वह हांगकांग के 50 लाख लोगों के लिए विशेष आव्रजन मार्ग खोलेगा, ताकि वे ब्रिटेन में रह सकें, काम कर सकें और अंतत: यहां बस सकें। इस बीच, रविवार को हांगकांग के निवासियों के ब्रिटेन आने व त्वरित व्यवस्था के जरिये नागरिक बनने के लिए आवेदन करने का एक नया वीजा मार्ग आधिकारिक रूप से खोल दिया गया। उम्मीद है कि हांगकांग के करीब तीन लाख लोग इसके लिए आवेदन करेंगे। यह व्यवस्था ब्रिटिश नागरिक (अप्रवासी) (बीएन-ओ) पासपोर्ट धारकों और उनके आश्रितों के लिए है।


कहीं खतरनाक रूप न ले ले इजरायल-फलस्‍तीन के बीच छिड़ी लड़ाई! तुर्की का कड़ा रुख

कहीं खतरनाक रूप न ले ले इजरायल-फलस्‍तीन के बीच छिड़ी लड़ाई! तुर्की का कड़ा रुख

इजरायल-फलस्‍तीन के बीच छिड़ी लड़ाई के बढ़ने की आशंका गहरा गई है। तुर्की ने फिलीस्‍तीन के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा है कि इजरायल के खिलाफ सभी मुस्लिम देश एकजुट होकर जवाब दें। इस बीच अमेरिका ने एक बार फिर से इजरायल के हवाई हमलों को जायज करार देते हुए कहा है कि उन्‍हें अपनी रक्षा करने का अधिकार है। इन दोनों देशों के बीच छिड़ी लड़ाई में अब अलग-अलग खेमे बंटते जा रहे हैं। रूस ने भी तुर्की का साथ देते हुए फलस्‍तीन का समर्थन किया है। जबकि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस इजरायल के समर्थन में आ खड़े हुए हैं।

रॉयटर्स के मुताबिक दुनिया के 57 इस्‍लामिक देशों के संगठन इस्‍लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने इजरायल से तत्‍काल गाजा पर हमले रोकने की अपील की है। इस संगठन की एक आपात बैठक रविवार को बुलाई गई थी जिसमें कई देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्‍सा लिया था। इस बैठक में पूर्वी येरुशलम को फलस्‍तीन का हिस्‍सा बताते हुए उसकी राजधानी भी बताया गया। तुर्की ने इजरायली हमलों को देखते हुए सभी इस्‍लामिक देशों से एकजुट होने का आह्वान किया है। साथ ही उन्‍होंने कहा कि वो अंतरराष्‍ट्रीय कानूनों पर जरा भी विश्‍वास न करें, क्‍योंकि ये उनका साथ नहीं देने वाले हैं।

दोनों देशों के बीच छिड़ी इस लड़ाई ने आठवें दिन (दूसरे सप्‍ताह) में प्रवेश कर लिया है। इस बीच दोनों ही तरफ से किए जा रहे हमलों में कई नागरिकों की मौत हो चुकी है। पीटीआई के अनुसार रविवार को इजरायल द्वारा किए गए हमलों में गाजा में अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया समूह के ऑफिस समेत हमास के एक शीर्ष नेता के घर को भी उड़ा दिया गया। एएफपी के मुताबिक इस हमले में 44 से अधिक लोगों की जान गई है। ओआईसी ने इजरायल के इन हमलों को क्रूरतापूर्ण कार्रवाई बताया है। वर्चुअल रूप में हुई ओआईसी की बैठक में इजरायल द्वारा पवित्र शहर येरुशलम से फलस्‍तीनियों को भगाने की कार्रवाई की भी कड़े शब्‍दों में निंदा की गई है।


बैठक में शिरकत करते हुए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सउद ने पूरी दुनिया से इस लड़ाई को बंद करवाने के लिए पहल करने की अपील की है। उन्‍होंने कहा है कि दोनों के बीच मसलों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जानी चाहिए। हालांकि संगठन द्वारा जारी बयान से इतर मलेशिया, ब्रुनेई और इंडोनेशिया ने इस मसले पर अपने बयान अलग से जारी किए हैं। मलेशिया के शासक ने इस संबंध में तत्‍काल यूएन जनरल असेंबली की बैठक बुलाने का आह्वान किया है। वहीं सऊदी अरब, बहरीन और यूएई ने तुरंत सीजफायर करने की बात कही है। ओआईसी के मुताबिक इन हमलों में अब तक गाजा में 1200 से अधिक लोग हताहत हुए हैं जबकि करीब 200 लोगों की जान चली गई है।


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